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जनता जस-की-तस! (छंदमुक्त/अतुकांत कविता)

विश्वास-अविश्वास की बहस
जगहंसाई के रहस्य
फ़िल्मी रस
लोकतंत्र को डस
संस्कार तहस-नहस
रो ले , सो ले या बस हंस!
जनता जस-की-तस!
*
अचरज ही अचरज
वर्षों पुराना मरज़
डीलें संवेदनशील

अपनों को बस लील
ग़रीबों पर तरस
धन अमीरों पर बरस
फ़िल्मी रस
व्यवस्था तहस-नहस!
मतदाता जस-का-तस!
*
राज़ों का संत्रास
हिलते स्तंभों के आभास
धर्म-गुरुओं के दास
बदले राजनीति के अंदाज़
जनता पर ग़ाज़
गप्पों की झप्पी
विवादों की लत्ती
बड़बोलेपन की मस्ती
हंसी-मज़ाक, ग़रीबी सस्ती
विश्वास-अविश्वास की बहस
विधि-विधान तहस-नहस
संविधान को डस!
जनता जस-की-तस!


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 9, 2018 at 6:34pm

हौसला अफ़ज़ाई हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय श्याम नारायण वर्मा साहिब और जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 9, 2018 at 6:32pm

मेरी इस प्रविष्टि पर समय देकर टिप्प्णियों द्वारा अनुमोदन और विचार साझा करने हेतु और पुनः स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  डॉ. आशुतोष मिश्रा  साहिब , मुहतरमा नीलम उपाध्याय साहिबा ,  मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब , मुुुहतरमा नीता कसार साहिबा,  मुहतरमा बबीता गुप्ता साहिबा, मुहतरम जनाब विजय निकोरे साहिब, जनाब तेजवीर सिंह साहिब , जनाब सुशील सरना साहिब साहिब, जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब और जनाब   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहिब

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 31, 2018 at 10:16pm

आ0 उस्मानी साहब बहुत अच्छी रचना हेतु बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on July 23, 2018 at 2:54pm
बहुत सुन्दर ॥ अतुकांत रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ सादर 
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 22, 2018 at 8:06pm

आ. भाई शेख शहजाद जी, अच्छी रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on July 22, 2018 at 12:06pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा अतुकान्त कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on July 22, 2018 at 7:51am

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                        सामयिक और विचारोत्तेजक कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on July 21, 2018 at 11:13pm

बेहतरीन रचना देश की राजनीति, सामाजिक, आर्थिक सभी को बयां करती, बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय शेख सर जी. 

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