For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"धरा की पाती"/ कविता-अर्पणा शर्मा, भोपाल

मैं तृषित धरा ,
आकुल ह्रदया,
रचती हूँ ये पाती,
मेरे बदरा,
तुम खोए कहाँ,
मुझसे रूठे क्यों,
हे जल के थाती,

दूर-दूर तलक,
ना पाऊँ तुम्हें,
कब और कैसे,
मनाऊँ तुम्हें,
नित यही मैं ,
जुगत लगाती,
साँझ- सबेरे,
राह निहारे ,
मैं अनवरत ,
थकती जाती,

आओ जलधर,
जीवन लेकर,
बिखेरो सतरंग,
सब ओर मुझपर,
तड़ित चपला की,
शुभ्र चमक में,
श्रृंगारित हो,
सुसज्जित हो,
हरी चूनर मैं,
ओढ़ लजाऊँ,
जल-मोतीयों का,
पहन नवलखा,
जीवन के,
हर रंग सजाऊँ,
यह मन्नत मैं
सदा मनाती,

उमड़ो बदरा,
घिर आओ नभ में,
सूर्य रथ भेजो,
विश्राम गृह में,
गरजो घन-घन,
बरसो रिमझिम,
मनुहार करूँ,
बारम्बार करूँ,
मेरे आँगन,
करो आगमन,
इंद्रधनुषी ओढ़ा दो,
मुझे वसन,
तप्त-व्याकुल मैं ,
गुहार यही लगाती,


आ जाओ ,
जीवन संवाहक बन,
 भर घटाओं में,
 जल-सुमन,
देर ना करना,
शीघ्र बरसना,
पढ़ आस भरी यह पाती ...!!

मौलिक एवं  अप्रकाशित


Views: 656

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shyam Narain Verma on July 23, 2018 at 2:58pm
"क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को " .सादर 
Comment by Neelam Upadhyaya on July 23, 2018 at 2:53pm

आदरणीया अर्पणा शर्मा जी, बरखा को मनाती मनुहार करती अच्छी रचना  की प्रस्तुति। बधाई स्वीकार करें । 

Comment by Arpana Sharma on July 22, 2018 at 11:55pm

जनाब मो.आरिफ जी - बेशक मानसून आ चुका । लेकिन अभी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। पूरे वर्ष भर के लिये नदी-तालाबों में पेयजल एकत्र नहीं हुआ है। 

अधिकांश शहरों में बाढ़ के हालात तो पहली तेज बारिश के बाद से ही दिखने लगते हैं जो कि शहरों के अव्यवस्थित   विकास और जल-निकासी व्यवस्था के अवरूद्ध या अनयोजित होने का नतीजा है।

मई-जून की प्रचंड़ गर्मी और सूखे को याद कीजिए । हमारे भोपाल का बड़ा तालाब भी अभी तक आधा भी नहीं भरा सो "धरा की ये मनुहार" उचित बैठती है। 

शुक्रिया आपने कविता पसंद की। 

Comment by Mohammed Arif on July 22, 2018 at 8:54pm

आदरणीया अर्पणा शर्मा जी आदाब,

                               बदरा के बरसने की मान मनुहार करती बेहतरीन भावाभिव्यक्ति । मगर पूरे देश में बदरा मेहरबान होकर झमाझम बरस रहे हैं । बाढ़ से कहीं-कहीं हालात बेकाबू हैं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Arpana Sharma on July 22, 2018 at 3:37pm

आदरणीया जनाब समय कबीर जी, जनाब उस्मानी जी, नरेन्द्र जी एवं बीता-  आप सभी के सह्रदय प्रोत्साहन का बहुत धन्यवाद 

Comment by narendrasinh chauhan on July 22, 2018 at 12:39pm
सुन्दर रचना
Comment by Samar kabeer on July 22, 2018 at 11:56am

मुहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब,बहुत सुंदर कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by babitagupta on July 21, 2018 at 11:16pm

बेहतरीन रचना द्वारा वरखा बहार को बयां करती पंक्तियाँ, बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीया अपर्णा दी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 21, 2018 at 12:31am

बहुत सुंदर अलंकृत शब्द मोतियों से परिपूर्ण रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया अपर्णा शर्मा जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, पोस्ट पर आने एवं अपने विचारों से मार्ग दर्शन के लिए हार्दिक आभार।"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार। पति-पत्नी संबंधों में यकायक तनाव आने और कोर्ट-कचहरी तक जाकर‌ वापस सकारात्मक…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब। सोशल मीडियाई मित्रता के चलन के एक पहलू को उजागर करती सांकेतिक तंजदार रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार।‌ रचना पटल पर अपना अमूल्य समय देकर रचना के संदेश पर समीक्षात्मक टिप्पणी और…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर समय देकर रचना के मर्म पर समीक्षात्मक टिप्पणी और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक…"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, आपकी लघु कथा हम भारतीयों की विदेश में रहने वालों के प्रति जो…"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मनन कुमार जी, आपने इतनी संक्षेप में बात को प्रसतुत कर सारी कहानी बता दी। इसे कहते हे बात…"
7 hours ago
AMAN SINHA and रौशन जसवाल विक्षिप्‍त are now friends
8 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रेत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
8 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
10 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
10 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service