For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नाभी में लेकर कस्तूरी  तय करता मृग कितनी दूरी (गीत राज )

नाभी में लेकर कस्तूरी 
तय करता मृग कितनी दूरी 

पागल मनवा उलझा उलझा 
सहरा-सहरा जंगल-जंगल 
खोज रहा है नादानी में
बौराया सा हर पल प्रति पल 
नाभी में लेकर कस्तूरी 
तय करता मृग कितनी दूरी 

रब के दर्शन की चाहत में 
मंदिर मस्जि़द रस्ते रस्ते 
भान नहीं है उनको इतना 
राम रहीमा उर में बसते 
बाहर ढूंढें चंदन नूरी 
कैसे होगी चाहत पूरी 

खेतों में जब उगता सूरज 
मिलता सबसे वो हँस हँस कर 
उजली भोर संदेशा लाती 
माटी बैठे तब सज धज कर 
मांग भरें किरणें सिंदूरी 
दिन भर करती फ़िर मजदूरी 

सहरा में पानी है दिखता
बादल में रोटी दिखती है 
उसके माथे की रेखा में 
किस्मत भी क्या क्या लिखती है 
ख्वाब अधूरे प्यास अधूरी
देखो गुर्बत की मजबूरी

नाभी में लेकर कस्तूरी 
तय करता मृग कितनी दूरी 
राजेश कुमारी राज

Views: 1161

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 24, 2018 at 5:59pm

आद० तेजवीर सिंह जी आपको गीत पसंद आया बहुत बहुत आभारी हूँ 

Comment by Samar kabeer on September 24, 2018 at 12:12pm

बहना राजेश कुमारी जी आदाब,बहुत सुंदर गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

मुझे ऐसा लग रहा है कि आपने ये गीत पहले भी ब्लॉग पर पोस्ट किया है?

एक ज़रूरी बात ये कि आपने  रचना के साथ मंच के नियमानुसार मौलिक व अप्रकाशित नहीं लिखा?

Comment by Ajay Kumar Sharma on September 24, 2018 at 6:53am

बहुत सुन्दर रचना.

बधाई स्वीकार करें

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 24, 2018 at 4:30am

आ. राजेश दी, सादर अभिवादन । सुंदर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by narendrasinh chauhan on September 22, 2018 at 2:04pm

बहोत सुन्दर रचना 

Comment by TEJ VEER SINGH on September 22, 2018 at 12:24pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी।बेहतरीन गीत।

सहरा में पानी है दिखता
बादल में रोटी दिखती है 
उसके माथे की रेखा में 
किस्मत भी क्या क्या लिखती है 
ख्वाब अधूरे प्यास अधूरी
देखो गुर्बत की मजबूरी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"आदरणीय जी भविष्य के लिए  स्पष्ट हुआ ।हार्दिक आभार आदरणीय जी "
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .दीपावली
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन की समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दुओं का भविष्य…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ * ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं…See More
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, इस गजल को अभी तनिक और समय दिया जाना था.  सादर  "
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .दीपावली
"आदरणीय सुशील सरना जी,  दीप जले हर द्वार पर, जग में हो उजियार ...       …"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,  तीर्थ जाना  हो  गया है सैर जबभक्ति का यूँ भाव जाता तैर…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"किसने कहा छंद स्वर आधारित 'ही' हैं। तब तो शब्दों के अशुद्ध उच्चारण करने वाले छांदसिक…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । स्पर्शों में…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय विजय निकोर जी, एक अरसे बाद आपकी कोई रचना पढ़ रहा हूँ. एकान्त और अकेलापन के बीच के अन्तर को…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . शृंगार
"बात हुई कुछ इस तरह,  उनसे मेरी यार ।सिरहाने खामोशियाँ, टूटी सौ- सौ बार ।। ............ क्या…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"इस स्नेहिल अनुमोदन हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी. "
Monday
vijay nikore posted a blog post

सुखद एकान्त है या है अकेलापन

तारों भरी रात, फैल रही चाँदनीइठलाता पवन, मतवाला पवनतरू तरु के पात-पात परउमढ़-उमढ़ रहा उल्लासमेरा मन…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service