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कसमों की डोरी ....

कसमों की डोरी ....

चलो
कोशिश करते हैं
जीवन को
कसमों की डोरी में
रस्मों की गंध से
अलंकृत कर दें

चलो
कोशिश करते हैं
हिना के रंग को
स्नेह अभिव्यक्ति के
अनमोल पलों से
अमर कर दें

चलो
कोशिश करते हैं
अपरिचिति श्वासों को
हवन कुंड की अग्नि के समक्ष
एक दूजे में समाहित कर
सृष्टि की पावनता को
श्रृंगारित कर दें

चलो
कोशिश करते हैं
लकीरों में छुपे
अपने सफ़र को
नेह गंध से सुवासित
मधुर पथ दे दें

चलो
कोशिश करते हैं
मैं और तुम
हम बन जाएँ
मेरी ख़ुशी पर
तुम मुस्कुराओ
तुम्हारे ग़म में
मेरे नैन भर आएँ
कुछ कसमें
तुम निभाओ
कुछ कसमें
मैं निभाऊं
देह से अदेह तक
हर बंधन
मोहब्बत की हिना से
महक जाए
सँग-सँग
कुछ जागी-जागी
सोई-सोई सी रातों में
कोशिश
मंज़िल बन जाए
ख़्वाब
यकीन हो जाएँ
मैं और तुम की ज़िल्द में
हम
अनुपम पृष्ठों की
किताब हो जाए


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on Tuesday

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार। गृह निवास से बाहर होने के कारण आभार व्यक्त न कर सका , क्षमा चाहता हूँ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 3, 2018 at 12:16pm

बहुत ही सुन्दर कविता है आदरणीय...बधाई

Comment by Sushil Sarna on November 1, 2018 at 7:32pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on November 1, 2018 at 7:32pm

आदरणीय राज़ नवादवी साहिब, आदाब .... प्रस्तुति की गहनता को अपने अनुमोदन से अलंकृत करने का दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on November 1, 2018 at 7:32pm

आदरणीय नरेंदर सिंह चौहान जी सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on November 1, 2018 at 7:32pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सृजन के भावों पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on November 1, 2018 at 11:57am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by राज़ नवादवी on November 1, 2018 at 8:25am

आदरणीय सुशील सरना जी, आदाब........चलो कोशिश करते हैं.........बहुत सुन्दर कोशिश, इस सुन्दर रचना पे दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. सादर. 

Comment by narendrasinh chauhan on October 31, 2018 at 5:04pm

आदरणीय सुशील  जी खूब  सुंदर रचना के लिए  बहोत बधाई

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 31, 2018 at 1:02pm

आदरणीय सुशील सरना जी बहुत ही सुंदर रचना बहुत बहुत बधाई

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