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मापनी - २१२२ 12 1222 

चाहते हैं मगर नहीं आती

हर ख़ुशी सबके’ घर नहीं आती  

 

दिल में’ थोड़ी सी’ गुदगुदी कर दे  

आजकल वो खबर नहीं आती  

 

मैं इधर जब उदास होता हूँ  

नींद उसको उधर नहीं आती

 

पास जाओ तो’ पैर चूमेगी

दूर तक क्यूँ लहर नहीं आती

 

जिन्दगी से न कोई’ मिल पाता

मौत मिलने अगर नहीं आती

 

आप इज्जत सँभाल कर रखिये

जो गई, लौटकर नहीं आती

 

दर्दे दिल का कमाल है वरना

शाइरी उम्र भर नहीं आती

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by Ravi Shukla on November 6, 2018 at 1:25am

आदरणीय बसंत कुमार जी , सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए दिली,बधाई पेश करता हूँं 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 5, 2018 at 3:16pm

आदरणीय  Mohammed Arif  जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 5, 2018 at 3:16pm

आदरणीय Ajay Tiwari  जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 5, 2018 at 3:15pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 5, 2018 at 3:15pm

आदरणीय समर कबीर जी, सादर नमस्कार, आपकी अदालत में गजल पास हुई, आनंद  आ गया, सादर नमन आपको 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 5, 2018 at 3:14pm

आदरणीय santosh khirwadkar जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by Mohammed Arif on November 4, 2018 at 8:06am

आदरणीय बसंत कुमार जी आदाब,

                   बहुत ही शानदार ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।

Comment by Ajay Tiwari on November 3, 2018 at 7:58pm

आदरणीय बसंत जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. आख़िरी दो शेर ख़ास तौर पर अच्छे लगे. हार्दिक बधाई.

 

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 3, 2018 at 2:03pm

आदरणीय वसन्त जी वसन्त के समान मदमस्त कर देने वाली गजल कमाल के भाव वाह मजा आ गया बधाई हो

Comment by Samar kabeer on November 3, 2018 at 11:34am

//

आप इज्जत बचा के रखियेगा 

जो गई, लौटकर नहीं आती //

अब ठीक है ।

कृपया ध्यान दे...

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