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मापनी - २१२२ 12 1222 

चाहते हैं मगर नहीं आती

हर ख़ुशी सबके’ घर नहीं आती  

 

दिल में’ थोड़ी सी’ गुदगुदी कर दे  

आजकल वो खबर नहीं आती  

 

मैं इधर जब उदास होता हूँ  

नींद उसको उधर नहीं आती

 

पास जाओ तो’ पैर चूमेगी

दूर तक क्यूँ लहर नहीं आती

 

जिन्दगी से न कोई’ मिल पाता

मौत मिलने अगर नहीं आती

 

आप इज्जत सँभाल कर रखिये

जो गई, लौटकर नहीं आती

 

दर्दे दिल का कमाल है वरना

शाइरी उम्र भर नहीं आती

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by santosh khirwadkar on November 3, 2018 at 10:48am

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी नमस्कार , सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति ,बधाई ! बाक़ी गुणीजनों ने कह दिया है. सादर.

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 3, 2018 at 9:07am

आदरणीय बलराम धाकड़ जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 3, 2018 at 9:06am

आदरणीय राज़ नवादवी जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई का बेहद शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 3, 2018 at 9:06am

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार , गजल आपको पसंद आई, मेहनत सार्थक हुई 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 3, 2018 at 9:04am

आदरणीय समर कबीर जी आपके आशीष को सादर नमन, देखिये यूँ ठीक रहेगा क्या 

आप इज्जत बचा के रखियेगा 

जो गई, लौटकर नहीं आती 

Comment by राज़ नवादवी on November 3, 2018 at 6:03am

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ. बाक़ी गुणीजनों ने कह दिया है. सादर. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 3, 2018 at 5:33am

आ. भाई बसंत जी, संशोधित गजल बेहतरीन हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Balram Dhakar on November 3, 2018 at 12:20am

आदरणीय बसंत कुमार जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।

दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं।

सादर।

Comment by Samar kabeer on November 2, 2018 at 10:32pm

अब ठीक है ।

'गई फिर लौटकर नहीं आती'

इस मिसरे को और चुस्त करें ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 2, 2018 at 8:09pm

सभी विद्वजनों से आग्रह , अब देखें कुछ ठीक हुई क्या '

चाहते हैं मगर नहीं आती

हर ख़ुशी सबके’ घर नहीं आती  

 

गुदगुदाने लगे हृदय को जो

आजकल वो खबर नहीं आती  

 

दिल इधर हो उदास मेरा तो

नींद उसको उधर नहीं आती

 

पास जाओ तो पैर चूमेगी

दूर तट पर लहर नहीं आती

 

रोज दिखती थी’ वोट पड़ने तक  

अब वो सूरत नजर नहीं आती

 

दर्द दिल में अगर नहीं होता

शायरी उम्र भर नहीं आती

 

जिन्दगी से न कोई’ मिल पाता

मौत मिलने अगर नहीं आती

 

आप इज्जत बचा के रखियेगा

गई फिर लौटकर नहीं आती

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