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सौदा जो सिर्फ देह  का  परवान चढ़ गया - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२


दिल से निकल के बात निगाहों में आ गयी
जैसे  हसीना  यार  की  बाहों  में  आ  गयी।१।


धड़कन को मेरी आपने रुसवा किया हुजूर
कैसे  हँसी, न  पूछो  कराहों  में  आ  गयी।२।


रुतबा है आपका कि सितम रहमतों से हैं
हमने दुआ भी की तो वो आहों में आ गयी।३।


कैसा कठिन सफर था मेरा सोचिये जरा
हो कर परेशाँ धूप  भी  छाहों में आ गयी।४।


सौदा जो सिर्फ देह  का  परवान चढ़ गया
सच्ची थी आशिकी वो गुनाहों में आ गयी।५।


नभ से गिरे तो.. वाली कहावत का सार ये
कैसे  कहूँ  कि  आज  पनाहों  में  आ गयी।६।


ये सब है वक्त और हवाओं की साजिशें
यूँ ही कली न  टूट  के  राहों में आ गयी।७।


लायी है उसको यार गरज खींच कर यहाँ
ये मत समझ कनीज सलाहों में आ गयी।८।
*****

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 20, 2019 at 10:07am

आ. भाई दिगम्बर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 20, 2019 at 10:05am

आ. भाई बृजेश जी, गजल की प्रशंसा के लिए आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 20, 2019 at 10:03am

आ. भाई आमोद जी, हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 20, 2019 at 10:02am

आ. भाई बसंत जी, गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 20, 2019 at 10:01am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।

इंगित शेर के विषय में मैं भी शंसय में था । मार्गदर्शन के लिए आभार।

Comment by दिगंबर नासवा on April 19, 2019 at 8:00pm

बहुत खूबसूरत गज़ल हुयी है आदरणीय ...

दिली दाद मेरी ...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 19, 2019 at 3:39pm

वाह बहुतखूब ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई

Comment by amod shrivastav (bindouri) on April 19, 2019 at 10:54am

आ मुशाफिर भाई साहब सदर नमस्कार
गजल के लिए दिली दाद। .नमन

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 19, 2019 at 9:38am

आदरणीय लक्ष्मण धामी को सादर नमस्कार,  लाजबाब ग़ज़ल हुई है , आनंद आ गया , 

बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by Samar kabeer on April 17, 2019 at 6:09pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

 
'हो कर परेशाँ धूप  भी  छाहों में आ गयी'

इस मिसरे में क़ाफ़िया सहीह नहीं है,देखियेगा ।

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