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अहसास .. कुछ क्षणिकाएं

अहसास .. कुछ क्षणिकाएं

छुप गया दर्द
आँखों के मुखौटों में
मुखौटे
सिर्फ चेहरे पर
नहीं हुआ करते

.............................
छील गया
उल्फ़त की चुभन को
एक रेशमी खंजर
चुपके से

...........................

झील की आगोश में
चाँद की
चाँद संग सरगोशियाँ
कर गई बेनकाब
सह्र की
पहली किरण

........................

बन जाती
घास पर
ओस की बूँद
रोता है
जब चाँद

आसमान से

...............................

मुस्कानों की बागानों में
कभी कभी
उग आती है
दर्द की खरपतवार
आंसूओं की
बरसात से

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 579

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 20, 2019 at 5:07pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब .... सर सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on July 19, 2019 at 11:34am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on July 18, 2019 at 3:59pm
आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।
Comment by Sushil Sarna on July 18, 2019 at 3:58pm
आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।
Comment by narendrasinh chauhan on July 16, 2019 at 6:52pm

बहोत लाजवाब रचना सर

Comment by TEJ VEER SINGH on July 16, 2019 at 7:21am

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बेहतरीन क्षणिकांयें।

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