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पुस्तक समीक्षा Discussions (112)

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"काँवर" श्रवण कुमार की: कान्ता रॉय

कांवर श्रवण कुमार की लेखक :  देवेन्द्र दीपक डी-15,शालीमार गार्डन कोलार रोड ,भोपाल -42 . प्रकाशक : सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन एन -77,कनाट स…

Started by kanta roy

0 Jul 8, 2016

सदस्य कार्यकारिणी

स्तुत्य, सम्यक, सरस,सुगन्धित पुष्प वल्लरी है ‘काल है संक्रांति का’ (आचार्य संजीव सलिल जी की पुस्तक समीक्षा )

हमारे वेद शास्त्रों में कहा गया है “छन्दः पादौ वेदस्य” अर्थात छंद वेद के पाँव हैं |यदि गद्य की कसौटी व्याकरण है तो कविताओं की  कसौटी छंद है…

Started by rajesh kumari

0 Jul 3, 2016

सदस्य कार्यकारिणी

समरा: वारिस-ए-क़मर का सरमाया

मोहतरम जनाब समर कबीर साहब के वालिद मरहूम जनाब क़मर साहब एक आला दर्ज़े के शायर थे; यानि ग़ज़लगोई जनाब समर कबीर साहब के खून में है और उनकी ग़…

Started by शिज्जु "शकूर"

2 Jun 2, 2016
Reply by शिज्जु "शकूर"

नारी की अनिवर्चनीय पीड़ा का अनोखा दस्तावेज – अहिल्या एक सफ़र------डॉ० गोपाल नारायण श्रीवास्तव

‘अहिल्या –एक सफ़र’ कुंती मुकर्जी का पहला उपन्यास है . इसकी भूमिका पढ़ते समय मुझे आचार्य हजारी प्रसाद द्वेवेदी के उपन्यास ‘अनामदास के पोथा’ की…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 May 23, 2016

डॉ आनंद के मन का ठहराव , आत्मबल को दृढ़ रख संयम से जीना सिखाती है यह पुस्तक -- कान्ता रॉय

पुस्तक समीक्षा --कांता रॉय ,भोपाल आनंद कही - अनकही लेखक -डॉ अरविन्द जैन प्रकाशक -- अक्षर विन्यास एफ-6/3 , ऋषि नगर ,उज्जैन प्रथम संस्करण 201…

Started by kanta roy

0 May 19, 2016

तीन बीमारियाँ : तीन दवाएँ : तीन किताबें

हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह अपनी एक कविता मे "जाना क्रिया" को सबसे खतरनाक मानते हैं । हरेक आदमी अपने अनुभव के आधार पर लिखता है इसीलिय…

Started by ASHISH ANCHINHAR

0 Mar 24, 2016

शिष्टाचारी देश में - कुण्डलिया संग्रह // पाठकीय समीक्षा.

कुण्डलिया संग्रह - शिष्टाचारी देश में रचनाकार – श्री तोताराम शर्मा उर्फ़ तोताराम ‘सरस’ प्रकाशक – संवेदना प्रकाशन , गली-2, चंद्रविहार कॉलोनी…

Started by Ashok Kumar Raktale

0 Mar 8, 2016

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मर्दों के खोखले दंभ पर बेधड़क वार करती है ’वो अजीब लड़की’ // --सौरभ

वो अजीब लड़की ! .. हाँ, वो लड़की अजीब ही है । हो भी क्यों न ? ’स्वघोषित’ मर्दों के संसार में जिन प्रहारक इंगितो और तिर्यक भंगिमाओं को अमूमन…

Started by Saurabh Pandey

0 Mar 7, 2016

सदस्य टीम प्रबंधन

भावना तिवारी के पास अंतर्मन को खँगालने की नैसर्गिक क्षमता है

समीक्षा - सौरभ पाण्डेय   ================ गीत आत्मीय भावों की गहनता के शाब्दिक स्वरूप होते हैं । इसी कारण, गीतों में प्रेम, वेदना, करुणा, आ…

Started by Saurabh Pandey

4 Feb 24, 2016
Reply by Saurabh Pandey

काँटों की नोंक से / कहानी संग्रह / पुस्तक समीक्षा / कान्ता रॉय , भोपाल।

काँटों की नोंक से / कहानी संग्रह /लेखिका - डॉ. निहारिका 'रश्मि 'प्रकाशक - रचनायन प्रकाशन , भोपाल। आज डाॅ निहारिका ' रश्मि ' जी की कहानी सं…

Started by kanta roy

0 Feb 21, 2016

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दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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दोहा पंचक. . . दिल

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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
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