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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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गजल(मनन)

आईं एगो गजल भइल बा देखीं सब रउए कइल बा।1 हहरल हियरा रउए खातिर इचिको ना एमे मइल बा।2 नयन मटक्का करते करते जिनगी के हर रोज गइल बा।3 खेले ख…

Started by Manan Kumar singh

1 Mar 15, 2016
Reply by Manan Kumar singh

गजल(मनन)

मेल बढाईं बात बनी सब झगड़ा में अब का धइल बा। आज तिलंगी उड़ते उड़ते देखीं रउए पास गइल बा। टूट सकी का धागा कबहूँ ? रउए माँझा जोर कइल बा।

Started by Manan Kumar singh

0 Mar 7, 2016

गजल(मनन)

अइसन मौसम आइल बा मनवा अब फगुआइल बा।1 खिल रहल बा कली गुलाबी भौंरा खूब अगराइल बा।2 टहले के मिलल तब निमन नाहीं तब गभुआइल बा।3 कर रहल मनुहार…

Started by Manan Kumar singh

4 Feb 28, 2016
Reply by Manan Kumar singh

जाड़ा बीतल,बसंत आइल (बसंत ऋतु पर भोजपुरी गीत)

जाड़ा बीतल,बसंत आइल। सब प्राणी के मन हर्षाइल।। हरियर बा धरती के आँचल, सुरुज देवता अइलन माकल, सभे रजाई छोड़ के भागल, चर-फर बा,देहिया अलसाइल।…

Started by जयनित कुमार मेहता

1 Feb 18, 2016
Reply by Shyam Narain Verma

ओ, दसरथ माँझी !

ओ ! दसरथ माँझी, ओ ! दसरथ माँझी जियरा तू पोढ़ कइलो दसरथ माँझी |   जाना उस पार बीचे बाटै पहाड़ काटौ पाथर-गरब अपार   हाथ-गोड़ लोह कइलो दसरथ माँझी…

Started by Santlal Karun

4 Feb 14, 2016
Reply by Santlal Karun

देहियाँ पे गाढ़ा चुंबन

जड़ दिहला हो, रामा ! जड़ दिहला सगरौ देहियाँ पे गाढ़ा चुंबन, जड़ दिहला |   हथवौ से जड़िला, नजरियौ से जड़िला बहियाँ में लइके अँकवरियौ से जड़िला अंगै…

Started by Santlal Karun

8 Dec 15, 2015
Reply by Santlal Karun

सदस्य टीम प्रबंधन

चुनावी दौर के बाद (दोहा छन्द) // --सौरभ

जवन चलीं हम नीक बा, तहरे बाउर चाल !                             [बाउर - ग़लतराजनीति के खेल में, कूल्हि पैंतरा गाल !!                        …

Started by Saurabh Pandey

7 Nov 13, 2015
Reply by Santlal Karun

गजल

वोटर के उद्गार भउजी कहली वोट गिरावल जाई। चलीं नेतवन के समुझावल जाई। बात बनउअल भइल बहुत अब एकनी के आज बतावल जाई। बहुते नाच नचवलख इ सब एकनी क…

Started by Manan Kumar singh

0 Oct 11, 2015

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी गीत : शाबास बबुआ

बबुआ बम्बई में बंगला बनवले बा, बाबू माई के अपना बइलवले बा । टिप टाप बनके रहे दुनों रे परानी, नया युग आइल मरल अखियां के पानी, बबुआ दुधवो मे…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

16 Sep 22, 2015
Reply by indravidyavachaspatitiwari

सदस्य टीम प्रबंधन

गइल भँइसिया पानी में अब (भोजपुरी नवगीत) // --सौरभ

गइल भँइसिया पानी में अब कइल-धइलसब बंटाधार !  बान्हब पगहारउए ढूँसी  सुखहा मोन्हे मूड़ी ठूँसीघींच-घाँच ले आईं रउआ  करीं फेर सेचारा-भूँसी !परल…

Started by Saurabh Pandey

1 Sep 19, 2015
Reply by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"

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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
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"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
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"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
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"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
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"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
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"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
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"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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