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Rahila
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rajesh kumari commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"बहुत अच्छा कटाक्ष ..अच्छी लघु कथा राहिला जी बहुत बहुत बधाई "
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"अच्छी कविता हुई आदरणीया..सादर"
Tuesday
pratibha pande commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति प्रिय राहिला जी हार्दिक बधाई"
Monday
Samar kabeer commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब,कविता का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Rahila commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय अहमद साहब!सादर"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"मुहतर्मा राहिला साहिबा ,उम्दा लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
Monday
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब, मेरे कहने का नाम आशय यह है कि यह सुंदर अभिव्यक्ति तो है ही और रचना नकारने के लायक कतई नहीं है । यदि आप किसी छंद में लिखती तो अच्छा होता । कौन से छंद में रचना बेहतर होगा यह आपको तय करना होगा ।"
Monday
Rahila commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"आदरणीय आरिफ़ साहब सिर्फ अभिव्यक्ति है। मुझे छंद ,मात्रा देखकर ही बुखार आ जाता है। यदि ये कविता के व्याकरण से सही नहीं है तो बेशक़ नकारने योग्य है।"
Monday
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब, सुंदर भावाभिव्यक्ति । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । यह रचना किस छंद में लिखी गई है ? बताने का कष्ट करें ।"
Sunday
Rahila posted a blog post

परित्यागी (कविता)राहिला

ना हम तुम से कोई प्रश्न करें।।न तुम हम से कोई सवाल करो ,ना हम तुमसे कोई शिक़वा करें।।ना तुम हम से कोई मलाल रखो।तुम मन चाहा पथ चुन ही लो,फिर मेरी राह ना आन धरो।।तुम मन चाहा स्वप्न बुन ही लो,फिर मेरे दर ना कान धरो।जब अंध अहं सीमा लांघे,जब मेरा वजूद ख़ाक करो ,तब स्वयं स्वतंत्र कर मेरा मनतुम मुझ पर अहसान करो।।जाओ ,जहाँ तुम्हें छाँव मिले,जाओ, वहाँ जहां दिल खिले,जाओ,सत्य स्वीकार किया,तुम अपना जहाँ आबाद करोअब ना चाहो, कि संग चलूँ,और मनमाना सा भरम रखूँ,या सरि का दूजा तट बनूँ,तुम अब ना मेरी सांस हरो।ना हम…See More
Sunday
Rahila commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय सुरेन्द्र जी!इतनी सुंदर टिप्पणी देने के लिए एवं रचना के मर्म को समझने के आपका तहे दिल से शुक्रिया।सादर"
Sunday
Rahila commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय कबीर साहब!हौसला अफजाई के लिए एवं रचना को सराहने के लिए बहुत शुक्रिया।सादर"
Sunday
Rahila commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय नीता दी !सराहना लिए एवं रचना को पसंद कर ने के लिए बहुत शुक्रिया।सादर"
Sunday
Rahila commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय उस्मानी जी!प्रथम टिप्पणी देने के लिए एवं रचना को सराहने के लिए बहुत शुक्रिया।सादर"
Sunday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"आद0 राहिला जी सादर अभिवादन, बढ़िया लघुकथा, वाकई में आज कल जो शिक्षा विभाग में चल रहा है, उसपर् सटीक व्यंग कसती यह लघुकथा है। बधाई आपको इस प्रस्तुति पर।"
Nov 19
Samar kabeer commented on Rahila's blog post ***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब,उम्दा लघुकथा,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 19

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

परित्यागी (कविता)राहिला

ना हम तुम से कोई प्रश्न करें।।

न तुम हम से कोई सवाल करो ,

ना हम तुमसे कोई शिक़वा करें।।

ना तुम हम से कोई मलाल रखो।



तुम मन चाहा पथ चुन ही लो,

फिर मेरी राह ना आन धरो।।

तुम मन चाहा स्वप्न बुन ही लो,

फिर मेरे दर ना कान धरो।



जब अंध अहं सीमा लांघे,

जब मेरा वजूद ख़ाक करो ,

तब स्वयं स्वतंत्र कर मेरा मन

तुम मुझ पर अहसान करो।।



जाओ ,जहाँ तुम्हें छाँव मिले,

जाओ, वहाँ जहां दिल खिले,

जाओ,सत्य स्वीकार किया,

तुम अपना… Continue

Posted on November 19, 2017 at 6:39pm — 6 Comments

***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला

"क्यों मिश्रा जी!आजकल किस क्षेत्र में सीजन चल रहा है।"

मेज पर फ़ाइल रखने आये बाबू से उन्होंने पूछा ।साहब का आशय समझ, वह टेढ़ी मुस्कान के साथ बोला-

"साहब!त्योहार तो बचे नहीं,लेकिन एक तहसील में कमलेश्वर भगवान के मंदिर चला जा सकता है।"

"अच्छा...! क्यों, वहाँ क्या हो रहा है ?"

"साहब!स्थानीय मेला लगा है।और कम से कम दस विद्यालय हैं उस क्षेत्र में ।"

"दस तो काफी हैं।"

कहते हुए हरियाली की चकाचौंध उनकी आँखों में कौंध गयी।

"नहीं साहब!दस में से सिर्फ चार पर ही जा… Continue

Posted on November 16, 2017 at 12:30pm — 11 Comments

***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)

"अरे अम्माँ ! आपको अहमदाबाद वाले सिद्दीक साहब याद हैं ?"

"आपको जानकर खुशी होगी कि हमने जो दो फ्लैट पसंद किए हैं, उनमें से एक उनके ही पड़ोस में है।इनको तो वही जम रहा है।"

"क्या कह रही हो..! सिद्दीक यहाँ है? बड़ी भली बहू थी उसकी बहुत ही मुहब्बती।"

उसका ज़िक्र आते ही उनकी आँखों में आज भी मुहब्बत उमड़ आयी।

" बस तो फिर डिसाइड हो गया। उसे ही फाइनल कर लेते हैं।क्यों अम्माँ ? सही है न..!"

"और दूसरा वाला फ्लैट कैसा है?"अम्माँ ने प्रतिप्रश्न किया।

"वह भी बहुत बढ़िया है ।कम तो कोई… Continue

Posted on November 6, 2017 at 2:00pm — 18 Comments

अपने-पराये(लघुकथा)राहिला

"तुम्हारी सारे फैसलों से मैं हमेशा सहमत रहा हूँ । लेकिन आज इस फैसले से मैं कतई सहमत नहीं।आख़िर मेरी गैरहाजिरी में ऐसा क्या हुआ कि अचानक तुमने वहां वापसी की ज़िद पकड़ ली?बड़ी भाभी या सुषमा ,किसी ने कुछ कहा क्या?"



"...."



" कुछ तो बोल बिट्टो! क्या तू भूल गयी उन लोगों ने तेरे साथ कितना गलत किया था?"

" नहीं ..,कुछ नहीं भूली, लेकिन ये भी याद है कि इन सब के बाद वह अपने व्यवहार पर शर्मिंदा भी हुए थे!"उसने सपाट भाव से उत्तर दिया।

"तू !पागल हो गयी है? कुत्ते की पूंछ कभी सीधी… Continue

Posted on October 10, 2017 at 2:29pm — 8 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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