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Rahila
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Rahila commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"बहुत -बहुत आभार आदरणीय तिवारी सरजी!"
Feb 16
indravidyavachaspatitiwari commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"रोहिला जी की लघुकथा में जो रवानी है वह काबिले तारीफ है। मां का सस्पेंस अपने आप में एक उदाहरण रखता है। अंत भी एक पुस्तक तक जाकर सराहनीय स्थान बनाता है। संग्रहणीय रचना के लिए सादर धन्यवाद"
Feb 15
Rahila commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"शुक्रिया आदरणीय उस्मानी जी! सलाह पर ध्यान दूँगी।सादर"
Feb 14
Rahila commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया कल्पना दीदी ! जो किताबें व्यक्ति को सकारात्मक होने की सलाह देती हैं,या अवसाद से लड़ने में मदद  करती हैं। उनमें कई तरह के प्रयोग करने को कहे जाते है। जिनमें एक ये भी होता है आप लोगों से बातचीत करें । कुछ  मनपसंद कार्य करें। इसमें…"
Feb 14
Sheikh Shahzad Usmani commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"बहुत बढ़िया। राह दिखाती सकारात्मक संदेश वाहक रचना। हार्दिक बधाई आदरणीया राहिला जी। थोड़ी कसावट की जा सकती है।"
Feb 14
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"बढ़िया लघुकथा हुई है आ राहिला जी | एक प्रश्न उठ रहा है मन में अन्यथा न लें तो -"सिर्फ इतना ही नहीं आजकल काफी रात तक चैटिंग करती रहती हैं। आजकल बहुत खुश दिखाई पड़ती है। वरना पहले तो बस रोतीं रहती थीं।" आगे आपने कहा है माँ किताबों से बातें…"
Feb 13
Rahila commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय मिश्रा सर जी!"
Feb 13
Rahila commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सर जी!"
Feb 13
Dr Ashutosh Mishra commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आपकी रचना में हमेश एक नयी सोच और ताजगी रहती है रचना का अंत सुखद लगा हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर "
Feb 13
TEJ VEER SINGH commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला आसिफ़ जी। बेहतरीन लघुकथा।एक यथार्थ को आपने लघुकथा में तब्दील कर दिया। सच में किताबों से बढ़कर कोई दोस्त नहीं होता।सादर।"
Feb 13
Rahila posted a blog post

***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला

"हुआ क्या है ? पागल! कुछ तो बता।" सुमि की बार -बार भरती - पुछती आँखे देख कर तृषा ने जोर देकर पूछा।"मुझे लगता है माँ का किसी के साथ...!" कह कर वह अपनी सबसे नजदीकी सखी के गले लगकर रो पड़ी।""क्याsss किसी के साथ....? तेरा दिमाग़ तो ठिकाने पर है ? ये शक़ कैसे पनपा तेरे मन में? उसने अविश्वास जताया।आज वेलेंटाइन डे है ,जब तक पापा रहे , वह उनके लिए फूल खरीदतीं थीं । लेकिन आज जब वह नहीं हैं तो फिर किसके लिए खरीद रहीं थीं ?""मतलब तूने उन्हें फूल खरीदते देखा?""सिर्फ इतना ही नहीं आजकल काफी रात तक चैटिंग करती…See More
Feb 13
Mahendra Kumar commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"उम्दा लघुकथा है आ. राहिला जी. शीर्षक चयन भी बेहतरीन है. इस बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आद0राहिला जी सादर अभिवादन।। बेहतरीन विषय को लेकर उम्दा लघुकथा कही आपने। बधाई इस प्रस्तुति पर"
Jan 15
Ajay Tiwari commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आदरणीया राहिला जी, कथा के लिए एक नया परिदृश्य तलाश कर उसे एक सामजिक व्यंग के सक्षम औजार में बदल देना बहुत अच्छा  लगा. (खूबसूरती ये है कि व्यंग में आक्रोश और करुणा दोनों अन्तर्निहित है )  कथा अगर लम्बी कहानी के फार्म में होती शायद परिवेश की…"
Jan 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"बड़ा ही रोचक और मार्मिक चित्रण किया है आदरणीया..सादर"
Jan 13
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"वाह जी वाह! राहिला जी बहुत बढ़िया विषय और औरतों का यह रूप तो गज़ब! नशामुक्ति आन्दोलन जहाँ भी चला है महिलाओं ने इसी तरह से पलटवार किया है| बढ़िया प्रस्तुतीकरण हुआ है| हार्दिक बधाई आपको|"
Jan 12

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला



"हुआ क्या है ? पागल! कुछ तो बता।" सुमि की बार -बार भरती - पुछती आँखे देख कर तृषा ने जोर देकर पूछा।

"मुझे लगता है माँ का किसी के साथ...!" कह कर वह अपनी सबसे नजदीकी सखी के गले लगकर रो पड़ी।"

"क्याsss किसी के साथ....? तेरा दिमाग़ तो ठिकाने पर है ? ये शक़ कैसे पनपा तेरे मन में? उसने अविश्वास जताया।

आज वेलेंटाइन डे है ,जब तक पापा रहे , वह उनके लिए फूल खरीदतीं थीं । लेकिन आज जब वह नहीं हैं तो फिर किसके लिए खरीद रहीं थीं ?"

"मतलब तूने उन्हें फूल खरीदते देखा?"

"सिर्फ…

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Posted on February 13, 2018 at 10:54am — 10 Comments

***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)

"लगता है एक तारीख है।" बस्ती में रोने -पीटने की आवाज सुनकर उसने मर्दानी आवाज में कहा।

"अब महीने के लगभग दस दिन यही चीख पुकार मची रहेगी।"दूसरी, ढोलक कसते हुए बोली।

"हाँ... सही कह रही हो...,मन तो करता है निकम्मों के हाथ पैर तोड़ दूँ।"

"तूने तो मेरे दिल की बात कह दी।"

"बेचारी ये औरतें सारा-सारा दिन दूसरों के चूल्हें -चौके समेटती फिरती है।और अंत में ये ईनाम मिलता है।"

"क़िस्मत तो देखो इन जुआरियों ,शराबियों की, निकम्मो को कैसी सोने के अंडे देने वाली मुर्गियां हाथ लगी…

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Posted on January 11, 2018 at 11:23am — 13 Comments

स्मार्ट (लघुकथा)राहिला

"हैलो.., गुड मॉर्निंग मैडम!"

"गुड मॉर्निंग, कौन बोल रहे हैं?"

"मैडम ! हम एस बी आई से बोल रहे हैं।

मैडम ! आपका एटीएम ब्लॉक होने वाला है, यदि आप चाहती हैं कि आपका एटीएम यथावत चालू रहे, तो आप अपने एटीएम का नम्बर वेरिफाई करवाएं।"

"ये आप क्या कह रहे हैं?"

"घबराइए नहीं मैडम ! यदि आप इस असुविधा से बचना चाहिती हैं तो अपना  एटीएम नम्बर बतलायें।"

"भाई साहब! नम्बर तो मैं बता दूं, लेकिन थोड़ी देर बाद कॉल कीजियेगा ।पहले जरा इनकी खबर ले लूं इनकी हिम्मत कैसे हुई मेरा…

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Posted on December 26, 2017 at 3:30pm — 11 Comments

कागज़ के घोड़े (लघुकथा)राहिला

कार्यालय में कई दिनों तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहने के वाले सुरेश कुमार को कमिश्नर साहब ने निलंबित क्या किया।वह हर कर्मचारी के लिए चर्चा का विषय बन गये।सब उनकी दबंगई और ईमानदारी के कायल हुए बगैर ना रह सके। आखिर उन्होंने मंत्री जी के दामाद के खिलाफ जो कार्यवाही की थी। वहीं निलंबन की खबर पाते ही उसी शाम ,एक मिठाई का डिब्बा लेकर सुरेश कुमार , कमिश्नर साहब के सरकारी बंगले पर पहुँच गए।

"नमस्कार सर!"

"नमस्कार ,नमस्कार कहो कैसे आये।"

"बस सर! आपको धन्यवाद कहना था। और यह एक छोटी सी… Continue

Posted on November 29, 2017 at 11:49am — 7 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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