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Rahila
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Latest Activity

ARUNESH KUMAR 'Arun' commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"बेहद सुन्दर लघु कथा है ।"
Sep 12
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब, अच्छी लघुकथा । बधाई स्वीकार करें तथा गुणीजनों की बातों पर गौर करें ।"
Sep 12
पंकजोम " प्रेम " commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"वाह दी बहुत खूब"
Sep 12
Rahila commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय महेंद्र सर जी!बहुत-बहुत आभार रचना पर प्रतिक्रिया के लिए।बेशक़ रचना थोड़ी लंबी हो गयी।शायद किसी भी पात्र की वार्ता और प्रतिक्रिया को ना हटा पाने के मोह ने गुंजाइश पैदा कर दी।फिर काम करूंगी इसपर ।रही बात टाइपिंग समस्या की तो मैंने आदरणीय रवि सर…"
Sep 12
Mahendra Kumar commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"आ. राहिला जी, लघुकथा अच्छी है किन्तु सम्पादन की गुंजाइश मौजूद है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. इस मंच पर आ रही टाइपिंग सम्बन्धी समस्या के लिए मुझे लगता है कि आपको कार्यकारणी सदस्यों या आ. प्रधान सम्पादक जी से संपर्क करना चाहिए. आ. समर सर…"
Sep 11
Rahila commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय तेजवीर सर जी !सादर आभार। आदरणीय कबीर सर जी!आदाब,सर जी !बड़ी मुश्किल से व्यस्तता के बाबजूद खुद को सक्रिय रख पा रही हूं।दूसरी बड़ी समस्या ये है कि इस मंच पर पता नहीं क्यों टाइपिंग सपोर्ट नहीं करता।मैं कहीं और टाइप कर, कट पेस्ट से रचनाएँ और कमेंट…"
Sep 11
Samar kabeer commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । एक निवेदन ये कि पटल की दूसरी रचनाएँ भी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रया का इन्तिज़ार करती हैं,कृपया मंच पर अपनी सक्रियता बनाये रखें ।"
Sep 11
TEJ VEER SINGH commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला जी।बेहतरीन लघुकथा।"
Sep 11
Rahila posted blog posts
Sep 11
Rahila and vijay nikore are now friends
Sep 6
Tasdiq Ahmed Khan commented on Rahila's blog post नई लकीर (लघुकथा)राहिला
"मुहतर्मा राहिला साहिबा ,अच्छी लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं"
Sep 6
Rahila commented on Rahila's blog post नई लकीर (लघुकथा)राहिला
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता दीदी!सादर प्रणाम"
Sep 6
Rahila commented on Rahila's blog post नई लकीर (लघुकथा)राहिला
"आदरणीय रवि सर जी!रचना पर आपकी उपस्थित के लिए सप्रथम बहुत-बहुत आभार।आपकी टिप्पणी मेरे लिए मार्गदर्शन है। यूँ लगा जैसे क्लास में कॉपी चेक कराई हो।जिसपर सुधार हेतु नोट मिला हो।आपकी हर सलाह पर आगे ध्यान रखूंगी।सादर नमन"
Sep 6
Rahila commented on Rahila's blog post नई लकीर (लघुकथा)राहिला
"आदरणीय सुरेंद्र सर जी!,आदरणीय महेंद्र सर जी!,आदरणीय सुशील सर जी!आदरणीय आशुतोष सर जी!और आदरणीय कबीर साहब !आप सब का तहेदिल से शुक्रिया करती हूं।आप सब ने रचना को सराहा पसंद किया।सादर नमन"
Sep 6
Nita Kasar commented on Rahila's blog post नई लकीर (लघुकथा)राहिला
"कथा अच्छी है शुरू में जिज्ञासा पैदा करती,पात्र कुछ ज़्यादा हो गये।बाकी वरिष्ठजन कह चुके है आपकी कथा की प्रतीक्षा में मुझे शामिल मानिये।बहरहाल बधाई प्रिय राहिला जी ।"
Sep 6
Ravi Prabhakar commented on Rahila's blog post नई लकीर (लघुकथा)राहिला
"आदरणीय राहिला जी, आपकी लघुकथा पढ़़ी बल्‍िक दो तीन दफा पढ़ी और इस नतीजे पर पहुंचा कि इस लघुकथा के पीछे पहले से ही तय किया अंत था। 'बंद मुट्ठी में बंद राखी को सामने रख,' कथ्‍य के आस पास सारा ताना-बाना बुना गया है। लघुकथा सहजता से अंत…"
Sep 5

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

*अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला

पिताजी हमेशा के लिए शांत हो चुके थे ।और अपने पीछे छोड़ गए थे अपने ग़ुस्सैल स्वभाव ,बुरी आदतों और थोपे गए फैसलों के अनगिनत किस्से ।साथ ही बड़े और मंझले भाई के रूप में अपनी छाया।लेकिन अपने गिरेवान में झांकने की जुर्रत कौन करता ।भूल से यदि कोई उन्हें आईना दिखा देता, तो झट अनुवांशिक लक्षणों की आड़ में ठीकरा, पिता के सिर पर फूटता ।आज पिताजी के फूल थे।और घर की बैठक में घरु लोगों की बैठक जमी थी।

"अब बुआ !मुझे कोई क्यों दोष दे,गुस्सा तो पिताजी की ही देन है ।स्वभाव और व्यक्तित्व एक दिन में थोड़ी ना बन… Continue

Posted on September 11, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

नई लकीर (लघुकथा)राहिला

"बेटा !बात हमारी गैरहाजिरी में उसे घर लाने की है।"

"तो मैं क्या करती अम्मी?आप ही बताएं ।उसे इस हाल में छोड़ा जा सकता था क्या?शुभम और रोहित से बोला था मैनें इसे एक दिन के लिए अपने घर पर रख लें, लेकिन उनके पास भी अपनी वाजिब वजहें थीं"

"ये सब मैं नहीं जानती शमा!तुम्हारे अब्बू को जब पता लगेगा की हमारी गैरहाजिरी में तुमने... "

"तो क्या गलत किया अम्मी?"

वह माँ की बात बीच में काट कर बोली।

"एक भी दिन का नागा ना करने वाला लड़का, चार दिन से ना स्कूल आया ना ट्यूशन।तब कहीं जाकर…

Continue

Posted on September 5, 2017 at 12:29pm — 11 Comments

ठिकाना (लघुकथा)राहिला

हुलिए से वह बूढ़ा कोई भिखारी जान पड़ रहा था। अलसुबह मंडी लगते ही हाथ में एक मैली कुचैली सी प्लास्टिक की बोरी लिये वह एक ठेले वाले के पास पहुँचा| आदतन फलवाले ने उसकी तरफ एक छोटा सा आम बढ़ा दिया।

उम्मीद से परे बूढ़े ने सिर हिलाकर उसे लेने से इंकार कर दिया और एक तरफ छाँटकर रखे सड़े आमों की ओर इशारा किया। दुकानदार ने उसे हैरानी से देखा और इस बार एक बड़ा आम उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा "अरे बाबा! वे आम तो सड़े हुए हैं ,उन्हें खाओगे तो बीमार पड़ जाओगे।

बूढ़े ने इस बार भी इंकार में सिर हिला दिया| अब एक… Continue

Posted on July 17, 2017 at 7:59pm — 5 Comments

खामियाजा***(लघुकथा)राहिला

क्या मैं जान सकती हूँ सब कुछ फाइनल होने के बाद विवाह से इंकार करने की वजह क्या है?

"आपसे पिछली मुलाक़ात!"उसने सपाट सा उत्तर दिया।

"पिछली मुलाक़ात?"कहते हुए उसके माथे पर हैरानी से बल पड़ गए।

" जहाँ तक मुझे याद है..., उस दिन तो ऐसी कोई बात नहीं हुई थी, जो आपके इंकार की वजह बने।"

"हुई थी!,उस दिन एक ऐसी बात हुई थी जिसकी वजह से मुझे ये फैसला लेना पड़ा।"

" देखिए..!पहेलियां बुझाने से अच्छा ,आप साफ-साफ बताएं।"वह मुद्दे पर आ गयी।

"ठीक है तो सुने!"उसने दोनों हाथ टेबल पर रखते हुए… Continue

Posted on July 11, 2017 at 6:26am — 9 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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