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Shaikh Zubair
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Shaikh Zubair commented on Shaikh Zubair's blog post चार शेर ( फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन  )
"उस्ताद ए मोहतरम समर कबीर साहब आपने बेहद कीमती इस्लाह दी,बेहद शुक्रिया, ख़ुदा आपको सलामत रखे। मैं दोनो शेर सही कर लेता हूँ। बोहत शुक्रिया।"
Mar 17
Samar kabeer commented on Shaikh Zubair's blog post चार शेर ( फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन  )
"जनाब शैख़ ज़ुबैर जी आदाब,अच्छे अशआर हुए हैं,बधाई स्वीकार करें । जिस के पीछे अब ज़माना है पढ़ा वो कभी मेरी भी दीवानी रही' इस शैर को यूँ कर लें:- 'जिसके पीछे ये ज़माना है पड़ा वो हमेशा मेरी दीवानी रही' 'दोस्ती कर ली किताबों से मैं…"
Mar 17
Shaikh Zubair posted a blog post

चार शेर ( फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन  )

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन(बह्र: रमल मुसम्मन महजूफ)2122. 2122. 212.ज़िन्दगी भर ये परेशानी रहीमेरे चारो सम्त वीरानी रही ।।जिस के पीछे अब ज़माना है पढ़ावो कभी मेरी भी दीवानी रही ।।शब मिलन की थी बहुत गहरी मगररात भर तारो की निगरानी रही।।दोस्ती कर ली किताबों से मैं नेभूलने में उसको आसानी रही ।।- शेख़ ज़ुबैर अहमद( मौलिक एवम अप्रकाशित )See More
Mar 15
Shaikh Zubair commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"विजय निकोरे जी आप का बहुत बहुत शुक्रिया ।"
Feb 8
Shaikh Zubair commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"मोहतरम समर कबीर साहब बहुत बहुत शुक्रिया,आपकी कमेंट और इस्लाह के ही इनतेज़ार में था। जैसा आप ने बताया मैं उसे स्वीकार करता हूँ |"
Feb 8
Samar kabeer commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"जनाब शैख़ ज़ुबैर जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के ऊला को सानी और सानी को ऊला करना उचित होगा । 'रायगाँ है सवरना तेरा' इस मिसरे में 'सवरना' को "सँवरना" कर लें ।"
Feb 8
vijay nikore commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल। हार्दिक बधाई, मित्र शेख जुबैर अह्मद जी"
Feb 2
Shaikh Zubair posted a blog post

ग़ज़ल

फाइलुन फाइलुन फाइलुन 212 212 212 हम हैं नाकाम-ए-राह-ए-वफ़ा काम आई तेरी बद-दुआ ।इश्क़ की है अभी इब्तिदा , यार मुझ को न तू आज़मा।रात भर जागता रहता है, चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।वो पता पूछे तो बोलना "कुछ दिनों से हूँ मैं लापता"आखरी बार मुझ से मिलो , आखरी बार है इल्तिजा ।अब नही देखता तुझ को मैं, रायगाँ है सवरना तेरा ।जा रहा हूँ तेरे दर से मैं दिलरुबा ग़म छुपा,,मुस्कुरा | - शेख ज़ुबैर अहमद (मौलिक व अप्रकाशित)See More
Feb 2
Shaikh Zubair commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"वाह, बहुत ख़ूब, मोहतरम समर कबीर सर पढ़ कर दिल ख़श हो गया"
Jul 12, 2019
Rakshita Singh commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय शेख़ जी,  बहुत ही बेहतरीन रचना बहुत बहुत मुबारकबाद ।"
Jun 22, 2019
Shaikh Zubair commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"मोहतरम समर कबीर साहब,आदाब बहुत बहुत शुक्रिया आपका मुझे तुम फ़ोन करना इबादत हो गई तो। इस शेर में ये कहने की कोशिश की है के, तुम्हारी इबादत होने के बाद मुझे फ़ोन करना, इबादत को पहल दी गई है बेशक इबादत सब से पहले है। लेकिन आपकी राय सर आँखों पर, बदलने की…"
Jun 12, 2019
Samar kabeer commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"जनाब शैख़ ज़ुबैर अहमद साहिब आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुझे तुम फ़ोन करना,इबादत हो गई तो' इस शैर का मफ़हूम (भाव)स्पष्ट नहीं है,देखियेगा ।"
Jun 12, 2019
Shaikh Zubair posted a blog post

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2मुहब्बत हो गई तो ?क़यामत हो गई तो ?सनम तू पास मत आ,मुसीबत हो गई तो ?कहानी पढ़ रहा हूँ ,हक़ीक़त हो गई तो ?मुझे तुम फ़ोन करना,इबादत हो गई तो ।सिपाही मैं अकेला ,बग़ावत हो गई तो ?खुदा तेरे जहाँ से ,शिकायत हो गई तो?- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jun 12, 2019
Shaikh Zubair replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सभी को ईद की बहुत बहुत मुबारक़बाद ❤"
Jun 6, 2019

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Nandurbar
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Nandurbar
Profession
Student
About me
Talib e ilm,Urdu/Hindi shayari me dilchaspi hain

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चार शेर ( फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन  )

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

(बह्र: रमल मुसम्मन महजूफ)

2122. 2122. 212.

ज़िन्दगी भर ये परेशानी रही

मेरे चारो सम्त वीरानी रही ।।

जिस के पीछे अब ज़माना है पढ़ा

वो कभी मेरी भी दीवानी रही ।।

शब मिलन की थी बहुत गहरी मगर

रात भर तारो की निगरानी रही।।

दोस्ती कर ली किताबों से मैं ने

भूलने में उसको आसानी रही ।।

- शेख़ ज़ुबैर अहमद

( मौलिक एवम अप्रकाशित )

Posted on March 15, 2020 at 6:57pm — 2 Comments

ग़ज़ल

फाइलुन फाइलुन फाइलुन

212 212 212

हम हैं नाकाम-ए-राह-ए-वफ़ा

काम आई तेरी बद-दुआ ।

इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,

यार मुझ को न तू आज़मा।

रात भर जागता रहता है,

चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।

वो पता पूछे तो बोलना

"कुछ दिनों से हूँ मैं लापता"

आखरी बार मुझ से मिलो ,

आखरी बार है इल्तिजा ।

अब नही देखता तुझ को मैं,

रायगाँ है सवरना तेरा ।

जा रहा हूँ तेरे दर से मैं

दिलरुबा ग़म छुपा,,मुस्कुरा |

- शेख ज़ुबैर अहमद

(मौलिक…

Continue

Posted on February 1, 2020 at 4:33pm — 4 Comments

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2

मुहब्बत हो गई तो ?
क़यामत हो गई तो ?
सनम तू पास मत आ,
मुसीबत हो गई तो ?
कहानी पढ़ रहा हूँ ,
हक़ीक़त हो गई तो ?
मुझे तुम फ़ोन करना,
इबादत हो गई तो ।
सिपाही मैं अकेला ,
बग़ावत हो गई तो ?
खुदा तेरे जहाँ से ,
शिकायत हो गई तो?
- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 12, 2019 at 1:41am — 3 Comments

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