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Shaikh Zubair
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एक ग़ज़ल । हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा

फाइलुन फाइलुन फाइलुन2 1 2 ,2 1 2 , 2 1 2हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा,काम आई तेरी बद-दुआ ।इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,यार मुझ को न तू आज़मा।रात भर जागता रहता है,चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।आखरी बार मुझ से मिलो ,आखरी बार है इल्तिजा ।अब नही देखता तुझ को मैं,रायगाँ है सवरना तेरा ।- शेख ज़ुबैर अहमदमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 22
Shaikh Zubair posted a blog post

एक ग़ज़ल । हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा

फाइलुन फाइलुन फाइलुन2 1 2 ,2 1 2 , 2 1 2हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा,काम आई तेरी बद-दुआ ।इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,यार मुझ को न तू आज़मा।रात भर जागता रहता है,चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।आखरी बार मुझ से मिलो ,आखरी बार है इल्तिजा ।अब नही देखता तुझ को मैं,रायगाँ है सवरना तेरा ।- शेख ज़ुबैर अहमदमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 15
Shaikh Zubair commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"वाह, बहुत ख़ूब, मोहतरम समर कबीर सर पढ़ कर दिल ख़श हो गया"
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Rakshita Singh commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय शेख़ जी,  बहुत ही बेहतरीन रचना बहुत बहुत मुबारकबाद ।"
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Shaikh Zubair commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"मोहतरम समर कबीर साहब,आदाब बहुत बहुत शुक्रिया आपका मुझे तुम फ़ोन करना इबादत हो गई तो। इस शेर में ये कहने की कोशिश की है के, तुम्हारी इबादत होने के बाद मुझे फ़ोन करना, इबादत को पहल दी गई है बेशक इबादत सब से पहले है। लेकिन आपकी राय सर आँखों पर, बदलने की…"
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Samar kabeer commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"जनाब शैख़ ज़ुबैर अहमद साहिब आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुझे तुम फ़ोन करना,इबादत हो गई तो' इस शैर का मफ़हूम (भाव)स्पष्ट नहीं है,देखियेगा ।"
Jun 12
Shaikh Zubair posted a blog post

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2मुहब्बत हो गई तो ?क़यामत हो गई तो ?सनम तू पास मत आ,मुसीबत हो गई तो ?कहानी पढ़ रहा हूँ ,हक़ीक़त हो गई तो ?मुझे तुम फ़ोन करना,इबादत हो गई तो ।सिपाही मैं अकेला ,बग़ावत हो गई तो ?खुदा तेरे जहाँ से ,शिकायत हो गई तो?- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
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Shaikh Zubair replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सभी को ईद की बहुत बहुत मुबारक़बाद ❤"
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
May 29
Shaikh Zubair is now a member of Open Books Online
May 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Nandurbar
Native Place
Nandurbar
Profession
Student
About me
Talib e ilm,Urdu/Hindi shayari me dilchaspi hain

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एक ग़ज़ल । हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा

फाइलुन फाइलुन फाइलुन
2 1 2 ,2 1 2 , 2 1 2

हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा,
काम आई तेरी बद-दुआ ।

इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,
यार मुझ को न तू आज़मा।

रात भर जागता रहता है,
चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।

आखरी बार मुझ से मिलो ,
आखरी बार है इल्तिजा ।

अब नही देखता तुझ को मैं,
रायगाँ है सवरना तेरा ।
- शेख ज़ुबैर अहमद

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 15, 2019 at 12:54pm

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2

मुहब्बत हो गई तो ?
क़यामत हो गई तो ?
सनम तू पास मत आ,
मुसीबत हो गई तो ?
कहानी पढ़ रहा हूँ ,
हक़ीक़त हो गई तो ?
मुझे तुम फ़ोन करना,
इबादत हो गई तो ।
सिपाही मैं अकेला ,
बग़ावत हो गई तो ?
खुदा तेरे जहाँ से ,
शिकायत हो गई तो?
- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 12, 2019 at 1:41am — 3 Comments

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