For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

SHARAD SINGH "VINOD"
  • Male
  • BHADOHI, UTTAR PRADESH
  • India
Share
 

SHARAD SINGH "VINOD"'s Page

Latest Activity

SHARAD SINGH "VINOD" commented on Harash Mahajan's blog post तरही ग़ज़ल : ये दिया जैसे जलता हुआ रह गया
"आदरणीय महाजन जी एहसास व अनुभूति परक रचना हेतु बधाई सादर..."
Mar 4
SHARAD SINGH "VINOD" commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post होली
"आ.  डॉ छोटेलाल सिंह जी सार्थक रचना.... होली की सतरंगी आभा,कण कण में फैलाएंगेवैर भाव का बीज कहीं पे,हरगिज नहीं उगाएंगे प्रेरणादायक व शिक्षादायक रचना हेतु बधाई स्वीकार हो आदरणीय..सादर"
Mar 3
SHARAD SINGH "VINOD" commented on Naveen Mani Tripathi's blog post कुंडलियाँ
"आदरणीय नवीन जी होली के रंगो ने तन को और आपकी रचना ने मन को तर कर दिया.. हार्दिक बधई स्वीकार हो "
Mar 3
SHARAD SINGH "VINOD" commented on TEJ VEER SINGH's blog post प्रतिज्ञा - लघुकथा –
"आदरणीय तेज वीर जी सादर बधाई...... प्रासंगिक लेख व शीर्षक से बंधा हुआ अति सुंदर"
Mar 3
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।
"आद0 शरद जी सादर अभिवादन। भुजंगप्रयात का बढिया प्रयास पर छबद में मात्रा पतन नहीं लिया जाता, इस लिहाज से रचना समय माँगती है। बहरहाल इस प्रस्तुति पर कोटिश बधाई स्वीकार कीजिए"
Feb 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।
"सुंदर भाव..।"
Feb 27
Samar kabeer commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।
"जनाब विनोद जी आदाब, भुजंग प्रयात छन्द का अच्छा प्रयास है,लेकिन छन्द में मात्रा पतन की छूट नहीं होती,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 26
SHARAD SINGH "VINOD" posted a blog post

अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।

भुजंग प्रयात छन्द (122 -122-122-122)बड़ा तंग करता वो करके बहाने,बड़ी मुश्किलों से बुलाया नहाने।किया वारि ने दूर तंद्रा जम्हाँई,तुम्ही मेरे लल्ला तुम्ही हो कन्हाई।कभी डाँटके तो कभी मुस्कुरा के,करे प्यार माता निगाहेँ चुराके।बड़े कौशलों से किया मातु राजी,पढ़ो लाल जीतोगे जीवन की बाजी।सुना जी हिया-उर्मि के नाद को मैं,कि आभास ऐसा छुआ चाँद को मैं।अघाई निगाहें बटोरूँ दुआ मैं,अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।'विनोद' (मौलिक-अप्रकाशित)See More
Feb 25
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"आद0 शरद जी सादर अभिवादन। प्रयास उत्तम है, शेष गुणीजनों ने कह दिया है। सादर"
Feb 22
रामबली गुप्ता commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"आदरणीय शरद सिंह जी रचना पर प्रयास के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। बताना चाहूँगा कि आपकी रचना में तमाम शैल्पिक त्रुटियों के साथ-साथ कई बंदों के भाव भी उलझे हुए हैं। अतः रचना अभी पर्याप्त समय मांग रही है। प्रथम छंद को लीजिये-कर्जित का क्या आशय लिया…"
Feb 22
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"बहुत खूबसूरती से आपने भावी को व्यक्त किया है आदरणीय..सादर"
Feb 21
Samar kabeer commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"जनाब "विनोद" जी आदाब, शक्ति छन्द पर आधारित 'मधुर'जी को अच्छी श्रद्धांजलि दी है आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'असिंचित ज़मीन है खुला आसमाँ' इस पंक्ति में मात्रा बढ रही है,इसे यूँ होना था :- "असिंचत ज़मीं…"
Feb 21
SHARAD SINGH "VINOD" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मिज़ाज (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी सादर बधाई...            आपने दो अलग व्यक्तित्व का दो पंक्तियों में ही सार्थक विश्लेषण किया ........ गागर में सागर ..पुन: बधाई!!"
Feb 21
Shyam Narain Verma commented on SHARAD SINGH "VINOD"'s blog post 'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......
"बहूत ही उम्दा प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Feb 19
SHARAD SINGH "VINOD" posted a blog post

'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......

11-02-2018 "मधुर" जी के स्मृति में भावभीनी श्रद्धाञ्जलिछन्द विधा : शक्ति छंद*********************कहां प्यार ऐसा मिलेगा कहीं,हमारे सखा सा जहां में नहीं।दिया प्यार इतना कि कर्जित हुए,हुई आंख नम जो थे गर्वित हुए। हमारा सभी का बड़ा भाग था,अकल्पित उन्हीं पे झुका राग था।"मधुर" जी में किंचित नहीं द्वेष था, अकिंचन हुआ आज जो शेष था। कहीं राग बिखरे कहीं रागिनी,कृतियों में जो थी वही वागिनी। तिया रागिनी आज कैसे बने,सनी धूल में राग हैं सामने। असिंचित जमीन है खुलाआसमाँ,सभी आश का संघनन है थमा। बिना दामिनी…See More
Feb 19
SHARAD SINGH "VINOD" replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"भुजंग प्रयात छन्द (122 -122-122-122) बड़ा तंग करता वो करके बहाने, बड़ी मुश्किलों से बुलाया नहाने। किया वारि ने दूर तंद्रा जम्हाँई, तुम्ही मेरे लल्ला तुम्ही हो कन्हाई। कभी डाँटके तो कभी मुस्कुरा के, करे प्यार माता निगाहेँ चुराके। बड़े कौशलों से किया…"
Feb 17

Profile Information

Gender
Male
City State
BHADOHI
Native Place
garaura
Profession
teacher
About me
simple honest and hardworker

SHARAD SINGH "VINOD"'s Blog

अहा! वत्सला मातृ द्रष्टा हुआ मैं।

भुजंग प्रयात छन्द (122 -122-122-122)



बड़ा तंग करता वो करके बहाने,

बड़ी मुश्किलों से बुलाया नहाने।

किया वारि ने दूर तंद्रा जम्हाँई,

तुम्ही मेरे लल्ला तुम्ही हो कन्हाई।



कभी डाँटके तो कभी मुस्कुरा के,

करे प्यार माता निगाहेँ चुराके।

बड़े कौशलों से किया मातु राजी,

पढ़ो लाल जीतोगे जीवन की बाजी।



सुना जी हिया-उर्मि के नाद को…

Continue

Posted on February 25, 2018 at 12:37pm — 3 Comments

'मधुर' जी की मधुर स्मृति .......

11-02-2018 "मधुर" जी के स्मृति में भावभीनी श्रद्धाञ्जलि

छन्द विधा : शक्ति छंद

*********************

कहां प्यार ऐसा मिलेगा कहीं,

हमारे सखा सा जहां में नहीं।

दिया प्यार इतना कि कर्जित हुए,

हुई आंख नम जो थे गर्वित हुए।

 

हमारा सभी का बड़ा भाग था,

अकल्पित उन्हीं पे झुका राग था।

"मधुर" जी में किंचित नहीं द्वेष था,

 अकिंचन हुआ आज जो शेष था।

 

कहीं राग बिखरे कहीं…

Continue

Posted on February 19, 2018 at 3:30pm — 5 Comments

: भई विचलित व्रत, रति सत्ता से : 26/07/2005

हो न कभी राग रति से, यही लिया व्रत ठान |

कर लूँ कुछ सत्कर्म सृजित , हो मेरा यश गान |

बेधा उर रति-बान ने, दीक्षा पे आघात |

छंदरूप मृदु गात लखि, व्रत है टूटा जात ||

 

अपलक भए नेत्र मोरे, देखि अनुप रूप को |

वक्ष गिरि, कटि गह्वर, रसद मधुर गात है |

मचलै ना माने हिय लोचन निहार हार |

कबरी पे आँचल फसाए चाली जात है |

कर्ण-कुण्डल कपोल छुए, अधर सोहे मूँगे सा |

नयना कमल हो मानो मुखड़ा प्रभात है |

पाँव से शीश लाइ, समांग…

Continue

Posted on June 4, 2015 at 7:30pm — 8 Comments

-: खींच अहं के मग से डग प्रभु :-

-: खींच अहं के मग से डग प्रभु :-  (संसोधित)

खींच अहं के मग से डग प्रभु,

रख लें अपने चरणों में ||

है परम कांति अरु चरम शांति जो,

और किसी ना शरणों में |

सजा हुआ मद की बेड़ी मे,

जड़ा हुआ हूँ कहीं सिखा पर,

तोड़ एकांकी अहं का आसन,

मिला लें पद रज-कणों में |

खींच अहं के मग से डग प्रभु,

रख लें अपने चरणों में ||

यह राह नहीं है सीधा-सादा ;

मैं निकल पड़ा जिसपर |

रसहीन…

Continue

Posted on May 25, 2015 at 8:00pm — 12 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका हृदय से आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी "
1 hour ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी आदाब,                  …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय छोटे लाल जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतीश मापतपुरी जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया अनामिका जी आदाब,                    …"
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी आदाब,                      …"
4 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया सुनंदा झा जी आदाब,                    …"
4 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति पर उपस्थित होकर प्रोत्साहित करने के लिए आपका आभार आदरणीय अखिलेश जी सादर"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण भाई चित्र को परिभाषित करती इस सुंदर सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 86 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी चित्र को परिभाषित करती इस सुंदर सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई। अंतिम छंद के लिए…"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service