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Tasdiq Ahmed Khan's Blog – February 2018 Archive (4)

तरही ग़ज़ल --2 (शौक़े वफ़ा में ग़म न उठाएँ तो क्या करें )

(मफऊल -फाइलात -मफाईल -फाइलुन )

.

शौक़े वफ़ा में ग़म न उठाएँ तो क्या करें |

वादा वफ़ा का हम न निभाएँ तो क्या करें |

.

मजबूर हो के हो गया दीवाना जिनका दिल

अब जान भी न उनपे लुटाएँ तो क्या करें |

.

गैरों की बात हो तो उसे कर दें दर गुज़र

पर हम पे ज़ुल्म अपने ही ढाएँ तो क्या करें|

.

उम्मीद जिसके आने की न ज़िंदगी में हो

उसको न अपने दिल से भुलाएँ तो क्या करें |

.

बैठे हुए हैं सामने महफ़िल में गीब्ती

उन…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on February 25, 2018 at 9:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल (जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है )

(मफाईलुन-मफाईलुन-फऊलन )

जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है|

ये दिल फिर उसकी हसरत कर रहा है |

लगाए ज़ख़्म देने वाला मरहम

ये दिल यूँ ही न हैरत कर रहा है |

वफ़ा मिलती कहाँ है हुस्न में वो

जिसे पाने की जुरअत कर रहा है |

दिले नादां दगा जिसकी है फ़ितरत

उसी से तू महब्बत कर रहा है |

मरीज़े इश्क़ की लौटी हैं साँसें

कोई शायद अयादत कर रहा है |

मिलेंगे हश्र में यह बोल कर वो

मुझे कूचे…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on February 21, 2018 at 8:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल ( दूर माशूक़ से आशिक़ कहाँ जाना चाहे )

(फाइलातुन -फइलातुन- फइलातुन-फेलुन )

दूर माशूक़ से आशिक़ कहाँ जाना चाहे |

कूचये यार में वो अपना ठिकाना चाहे |

मैं ही आया हूँ नहीं सिर्फ़ परखने क़िस्मत

उन को तो अपना हर इक शख्स बनाना चाहे |

थाम के हाथ जो देता हो हमेशा धोका

कौन उस शख्स से फिर हाथ मिलाना चाहे |

फितरते शमअ जलाना है तअज्जुब है मगर

जान परवाना वहाँ फिर भी लुटाना चाहे |

मुफ़लिसी के हैं यह मारे हुए ज़ालिम वरना

तेरी दहलीज़ पे सर कौन…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on February 12, 2018 at 12:30pm — 23 Comments

ग़ज़ल (मुझको अपना बना कर दगा दे गया )

ग़ज़ल (मुझको अपना बना कर दगा दे गया )

-------------------------------------------------------

(फाइलुन-- फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन)

 

कोई उल्फ़त का बहतर सिला दे गया |

मुझको अपना बनाकर दगा दे गया |

 

जो खता मैं ने की ही नहीं प्यार में

उफ़ मुझे वो उसी की सज़ा दे गया |

 

दास्ताँ मैं तबाही की कैसे कहूँ

वो मुझे प्यार का वास्ता दे गया |

 

दूर यूँ मौत से कब हुई ज़िंदगी

कोई जीने की मुझको दुआ दे गया…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on February 2, 2018 at 10:43pm — 10 Comments

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