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Rash Bihari Ravi's Blog – June 2010 Archive (9)

अपना दुःख किससे कहू मैं ,

अपना दुःख किससे कहू मैं ,

यहा कौन हैं सुनने वाला ,

हर तरफ फैला अन्धियारा ,

धधक रही दहेज की ज्वाला ,



बेटी के बाप तो हमभी हैं ,

बड़ी मुश्किल से पढ़ा पाए ,

हम खाय आधपेट मगर ,

बेटी को हम बी कॉम कराए ,



लड़का बढ़िया खोज रहा हु ,

दहेज़ के बिना हैं परेशानी ,

अब सोचता हु क्यों पढ़ाया ,

जन्मते क्यों नहीं नमक खिलाया ,



मर गई होती ये तब ,

परेशानी ये ना आती अब ,

ये लड़का वालो जरा समझो ,

हम भी पढाये ये तो समझो… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 24, 2010 at 4:00pm — 5 Comments

सुन्दरकांड से

सुन्दरकांड

जामवंत के बचन सुहाए ! सुनि हनुमंत हर्दय अति भाए !!

तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई ! सहि दुख कंद मूल फल खाई !!

जब लगि आवों सीतहि देखी ! होइहि काजू मोहि हरष बिसेषी !!

यह कहि नाइ सबन्हि कहूँ माथा ! चलेउ हरषि हिएँ धरि रघुनाथा !!

सिंधु तीर एक भूधर सुन्दर ! कौतुक कूदी चढ़ेउ ता ऊपर !!

बार बार रघुबीर संभारी ! तरकेउ पवनतनय बल भारी !!

जेहि गिरि चरन देई हनुमंता ! चलेउ सो गा पाताल तुरंता !!

जिमि अमोध रघुपति कर बाना ! एही भांति चलेउ हनुमाना !!

जलनिधि… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 12, 2010 at 7:14pm — 7 Comments

कुछ बाते जो बुजुर्गो से सुना हु ध्यान देने योग हैं ,

कुछ बाते जो बुजुर्गो से सुना हु ध्यान देने योग हैं ,

१. नाशवान को महत्व देना ही बंधन हैं ,
२ सत्य ही कलिकाल की तपस्या हैं ,
३. नम्रता से कही हुई कठोर बाते भी अच्छी लगती हैं,
४ वस्तु , ब्यक्ति से सुख लेना महान जड़ता हैं,
५. यदि शांति चाहते हो तो कामना का त्याग करो ,
६. परमात्मा की प्राप्ति में भाव की प्रधानता हैं.
७. सच्ची बात को मान ले ये सत्संग हैं.
८. कiम करते समय भगवान को मत भूलो ,

अच्छा लागे तो गाठ बांघ लो भाई ,

Added by Rash Bihari Ravi on June 12, 2010 at 6:45pm — 1 Comment

पिचकू पाड़े ,

डॉक्टर के पास पहुचे प्यारे प्यारे पिचकू पाड़े ,

बोले डाक्टर साहब क्या काम है पिचकू भाई ,

संग में जो आये बोले, परेशान हैं पिचकू पाड़े ,

बावन जोड़ा पूड़ी रात में ये खाये थे ,

संग में दही तीन किलो उड़ाये थे ,

घर का खाना ये कभी न खाते हैं ,

एक दिन खाकर तीन दिन तक पचाते हैं

सुबह से परेशान हैं, होती हैं खूब दौड़ाई ,

रुक जाये भागम-भाग,जल्दी दे दो कुछ दवाई ,

डाक्टर बोला थोड़ा कम तो खाओ यार ,

उम्र बढ़ी हैं कुछ तो अपना रखो ख्याल ,

डॉक्टर को भी बडे प्यार… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 11, 2010 at 8:00pm — 2 Comments

दिल में सवाल था ,

दिल में सवाल था ,
बड़ा बेमिसाल था ,
लेकिन हम डर डर के ,
अनोखा काम किया ,
था तो सुंदर वो ,
उसको सजाकर मैं ,
अति सुंदर किया ,
जिस के पास भाई ,
अह ना आये ,
उसी का नाम गुरु ,
सही में कहलाये ,
आपने जो कहा ,
वही सर आखो पे ,
मेरे लिए कुछ भी करे ,
सर अब ना डरे ,
डर से अपना ही ,
होना नुकसान था ,
दिल में सवाल था ,
बड़ा बेमिसाल था ,

Added by Rash Bihari Ravi on June 10, 2010 at 2:30pm — 2 Comments

मैं इन्सान हु इंसानियत भूल गया ,

मैं इंसान हू ,

इंसानियत भूल गया ,

मानवता से कुछ लेना देना नहीं .

वो हमसे कोशो दूर गया ,

आपकी नजर में ,

मानवता के लिए जो हम लड़ते हैं ,

हम अपने फायदा के काम करते हैं ,

जगह जगह पोस्टर लगवाता हू ,

काम से ज्यादा अपना नाम चमकाता हू ,

मैं खुद को इतना बुलंद करना चाहता हू ,

की सामने वाला भींगी बिल्ली लगे ,

मैं इंसान हू ,

इंसानियत भूल गया ,

कोई सड़क पर मर रहा हैं .

पानी के लिए तरस रहा है,

मैं मानवता का पक्षधर हू ,

सरकार ने लाल… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 10, 2010 at 1:00pm — 2 Comments

ना मैं तुलसी हू....

मैं ना तो कोई तुलसीदास

जो दोहावली सजाऊँ,

ना ही मैं कबीर कोई

कि भजनमाल बुन पाऊँ !



सूरदास की भक्ति कहाँ

जो गीत श्याम के गाऊँ,

ओज सुभद्रा सा भी नहीं,

ना टैगोर का सुर बना पाऊँ !



फिर भी दिल में ये चाहत है,

में दिल की बात सुनाऊँ,

और प्यार दोस्तों का कहता है,

में भी कलम उठाऊँ !



मुझमे ऐसा कुछ भी नहीं,

कि में कुछ भी बन जाऊं,

प्यार आपका होगी वजह,

जो कुछ सार्थक कह पाऊँ !



मित्रों की प्रेरणा शक्ति… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 9, 2010 at 2:00pm — 3 Comments

पेंडुलम .

पेंडुलम .

पेंडुलम यही समझ रहे हो ना मुझे ,

यही भूल अगली सरकार की थी ,

और तुम्हे मिल गया ये मलाई ,

जिसे बारे प्यार से आपस में ,

बाटकर मस्ती से खा रहे हो ,

हमें चाहिए एक होनहार कर्मनिस्ट,

जो समझे हमें जाने हमें ,

और तुम हो की जानना ही नहीं चाहते ,

लोकतंत्र में युवराज दिखा रहे हो ,

यही ना हमें पेंडुलम समझ कर ,

उल्लू बना रहे हो ,

जिस जनता को तूम उल्लू समझ रहे हो ,

ओ सब जानती हैं ,

कोई पानी तक नहीं मांगता ,

जब ओ मरती हैं… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 9, 2010 at 12:55pm — 4 Comments

नेट पे होती है बाते ,

नेट पे होती है बाते ,

फिर होती है मुलाकाते ,

यारो दिल की सुनो ,

कहता हु दोस्ती के नाते,

ये तो सुनहरा मौका ,

देता हैं (ओ बी ओ )

प्यार से मिलो और ,

प्यार में ही जिओ ,

गुरु के संग गणेश जी ,

और सतीश जी ,

पावन स्थल पटना,

मंदिर महाबीर की ,

तीनो जो हम मिले ,

दोस्ती दिल के खिले ,

लगता नहीं था यारो ,

पहली बार हम मिले ,

बरसो की दोस्ती हो ,

हो बरसो से मिलते रहे ,

दिल में बहुत हैं बाते ,

और मैं क्या कहू… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on June 3, 2010 at 4:00pm — 6 Comments

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