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Neelam Upadhyaya's Blog – June 2018 Archive (5)

अब तो आओ मेघ

बहुत हुआ सूरज का तपना

अब तो आओ मेघ

जम कर बरसो मेघ

 

तपती धरती का सीना हो ठंढा 

सूखी मिट्टी महके सोंधी

बंजर सी जमीं पर

अब फैले हरियाली

ठूंठ बन गए  पेड़ों के

पत्ते  अब हरियाएँ 

नभ पर जमकर छा जाते

गरज का बिजली कड़काते

संग में वर्षा भी  लाते

गर्मी डरकर जाती भाग

मौसम हो जाता खुशहाल

पर बादल तो

इधर से आये उधर गए

हम तो आस ही लगाए रहे

खुली चोंच लिए पक्षी

प्यासे ही रह गए

खेत जोतने को

हल लिए किसान…

Continue

Added by Neelam Upadhyaya on June 30, 2018 at 3:25pm — 8 Comments

हाइकू

अरण्य घन

सुन स्वर लहरी

मादल थाप

  

पवन मंद

बिखरे मकरंद

नव अंकुर

  

ढीठ हवाएँ

पत्ते बुहार रहीं

पतझड़ में

  

पर्वत नाले

पार करती चली

चंचल नदी

 

 मेघ ढिठौना

तपते आकाश में

बरसेगा क्या

… मौलिक एवं अप्रकाशित

(मादल की थाप का प्रसंग आशापूर्ण देवी जी की कहानी से )

 

 

Added by Neelam Upadhyaya on June 25, 2018 at 3:00pm — No Comments

हाइकू

अंबर अटा

रेगिस्तानी धूल से

जीना मुहाल

 

 

चढ़ती धूप

सुस्ताने भर ढूँढे

टुकड़ा छांव

 

 

खड़ी है धूप

छांव से सटकर

प्रतीक्षा सांझ

 

कटते पेड़

मौन रोता जंगल

सुनता कौन

 

 

… मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Neelam Upadhyaya on June 20, 2018 at 3:30pm — 12 Comments

पापा तुम्हारी याद में

जीवन की पतंग

पापा थे डोर

उड़ान हरदम

आकाश की ओर

पापा सूरज की किरण

प्यार का सागर

दुःख के हर कोने में

खड़ा उनको पाया

छोटी ऊँगली पकड़

चलना मुझको सिखलाया

हर उलझन को पापा

तुमने ही सुलझाया

हर मुश्किल में पापा

प्यार हम पर बरसाया

मेरे हर आंसू ने

तुम्हारी आँखों को भिगोया

मेरे कमजोर पलों में

मेरा विश्वास बढ़ाया

तुम से बढ़कर पापा

प्यार न कोई पाया

प्यार न कोई पाया।

मौलिक एवं…

Continue

Added by Neelam Upadhyaya on June 17, 2018 at 6:05pm — 15 Comments

हाइकू

झरता रहा

माँ के आशीर्वाद सा

हरसिंगार

 

उषा की लाली

रेशम का आँचल

वात्सल्य माँ का

पुलक तन

शाश्वत है बंधन

नमन मन

  

स्नेहिल स्पर्श

वात्सल्य का कंबल

संबल मन

 …

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Neelam Upadhyaya on June 14, 2018 at 12:30pm — 10 Comments

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