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Deepak Sharma Kuluvi's Blog – August 2010 Archive (15)

कहाँ जाएँगे

کهن جانگه



कहाँ जाएँगे



कश्ती मंझधार में है बचकर कहाँ जाएंगे

अब तो लगता है ऐ-दिल डूब जाएँगे

कोई आएगा बचाने ऐसा अब दौर कहाँ

अब तो चाहकर भी साहिल पे ना आ पाएँगे

हमनें सोचा था संवर जाएगी हस्ती अपनी

उनके दिल में ही बसा लेंगे बस्ती अपनी

इस भंवर में पहुँचाया हमें अपनों ने ही

अब इस तूफां से क्या खाक बच पाएँगे

अपनी बेबसी पे ऐ-कुल्लुवी क्या बहाएँ आंसू

वक़्त जो बच गया अब उसको कैसे काटूं

चंद लम्हों में यह 'दीपक' भी बुझ जाएगा

हम भी… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 19, 2010 at 4:19pm — 3 Comments

कोन कहता

कोन कहता ज़िन्दगी इक गम का नाम है
दर्द मैं डूबी हुई दुखों की खान है
मेरी तरह जलो और रोशन करो दुनियां को
फिर देखो यह ज़िन्दगी कितनी हसीन ख्वाब है

दीपक शर्मा कुल्लुवी

09136211486

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 5:47pm — 3 Comments

तन्हा तन्हा पाया

ग़ज़ल

تنهى تنهى بيا

तन्हा तन्हा पाया





न उसनें साथ निभाया

न इसने साथ निभाया

जब भी देखा दिल को अपनें

तन्हा तन्हा पाया

कहनें को तो सब थे अपनें

सब तो यही कहते थे

लेकिन जब भी मुड़कर देखा

साथ किसीको ना पाया

कद्र मेरे जज्वातों की

वोह क्या खाक करेंगे

जिनको मुहब्बत नफरत में

फर्क करना ना आया

कोन नहीं चाहता उनकी याद में

बनें ना यादगारें

हमनें अपनी यादों को

सबके दिल… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 3:36pm — 4 Comments

कितना बदल गया

कितना बदल गया



मेरा शहर कितना बदल गया

मेरे वास्ते अब क्या रहा

मेरा शहर कितना बदल -----

न वोह मंजिलें न वोह रास्ते

जो कभी थे मेरे वास्ते

यहाँ लुट गया मेरा आशियाँ

यहाँ हमसफ़र न कोई रहा

मेरा शहर कितना बदल -----

जो गुजर गया उसे भूल जा

मेरा दिल यह कहता है मान जा

यह वक़्त की सौगात है

मेरा वक़्त अच्छा ना रहा

मेरा शहर कितना बदल -----

अब तो अजनवी सा लगे शहर

रिश्तों में घुल चुका ज़हर

कहने को सब अपनें हैं

अपनापन अब… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 12:41pm — 4 Comments

अफ़सोस

अफ़सोस

किनारों पे चलाना मुमकिन नहीं था
डूब जाएंगे हम यह डर था हमें
खुद हमनें किनारों पे मारी थी ठोकर
आज तलक रास्ता मिला ना हमें
हम अपनीं तवाही के कसूरबार खुद हैं
संभल ही सके ना यह ग़म है हमें
यादों के नश्तर तीखे बहुत हें
यह अपनें ही ग़म हैं मंज़ूर है हमें
देखते हैं आइना जब फुर्सत में हम
सोचते हैं अक्सर हुआ क्या हमें
जलाते रहो यूँ भी 'दीपक' हैं हम
और आपकी फ़ितरत का ईल्म है हमें

दीपक शर्मा कुल्लुवी

09136211486

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 12:26pm — 2 Comments

NA JAAO

हमारी हंसी पे न जाओ यारो
दर्द तो मेरे भी दिल में होता है
लेकिन उनके ग़म की मीठी सी चुभन
रोने भी नहीं देती हमें

DEEPAK KULUVI

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 12:25pm — 1 Comment

ना करेंगे & आओ

نا کارنگه



ना करेंगे



हम दर्द अपना बाँट कर

कुच्छ कम ना करेंगे

जो लिखा है किस्मत में

उसका ग़म ना करेंगे

मिट जाएँगे हंसते हुए

यह जानते हैं हम

बेरुखी पे आपकी

शिकवा ना करेंगे

आपको भी याद तो

आएगी एक दिन

जब ना लगेगा दिल आपका

'दीपक कुल्लुवी' के बिन

आपको हो ना हो

कोई ग़म नहीं

हम तो आपकी मुहब्बत पे

एतवार करेंगे





दीपक शर्मा कुल्लुवी

داپاک شارما… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 12:22pm — 2 Comments

क्या होगा

क्या होगा

जहाँ सैक्स स्कैंडल हाकी में
इंजेक्शन लगता लौकी में
अस देश का यारो क्या होगा
वहां पड़ता सबको ही रोना
ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ
जहाँ चौड़ी छाती चोरों की
मौज है रिश्वत खोरों की
अस देश का यारो क्या होगा
वहां पड़ता सबको ही रोना
ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ
जहाँ मिलता सबकुछ नकली है
और गरीब की हालत पतली है
अस देश का यारो क्या होगा
वहां पड़ता सबको ही रोना
ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ

दीपक शर्मा कुल्लुवी
09136211486

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 10:48am — 2 Comments

हद

ग़ज़ल
حد

हद


ले लो कुछ मेरे भी गम दोस्तों
कब तलक आपके ग़म उठाऊंगा मैं
बह न जाएँ कभी अश्क डर है मुझे
कब तलक अपनें आसूं छुपाऊंगा मैं
आपकी याद जीने ना देगी मुझे
मोत से खुद को कब तक बचाऊंगा मैं
खुदा तो नहीं मैं भी इन्सान हूँ
ज़ख्म सीने में कब तक दबाऊंगा मैं
ना पीने की हमनें कसम तोड़ दी
आपके ख्यालों से कब तक बहलाऊंगा मैं

दीपक शर्मा कुल्लुवी

دبك شارما كلف

09136211486

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 10:45am — No Comments

कब तलक

ए ग़म कब तलक साथ चलता रहेगा

छोड़ दे मेरा साथ अब खुदा के लिए

ज़र्रा ज़र्रा टूट चुका है मेरा नाजुक सा दिल

माँ ले मेरी बात अब खुदा केलिए

दीपक कुल्लुवी

إ جم كاب طلاق ثاث شلت رهج
شهد د مرة سطح أب خودا ك لي
زارا زارا توت شوكة مرة نازك سى ديل
مان ل مري بات أب خودا ك لي
دبك شارما كلف

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2010 at 10:44am — No Comments

आखरी पन्नें

AAKHARI PANNEN
आखरी पन्नें
آخر بن

मेरे आंसुओं के
कद्रदान हैं बहुत
हम रोना नहीं चाहते
वोह बहुत रुलाते हैं

दीपक शर्मा कुल्लुवी
دبك شارما كلف

हमनें किसी के वास्ते
कुछ भी नहीं किया
अब किसको क्या बतलाएं
किस हाल में मैं जिया

दीपक शर्मा कुल्लुवी
دبك شارما كلف

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 16, 2010 at 4:23pm — 4 Comments

मैं और मेरी शायरी

मैं और मेरी शायरी


मुझे अपनी खता मालूम नहीं
पर तेरी खता पर हैराँ हूँ
तकदीर के हाथों बेबस हूँ
अफ़सोस है फिर भी तेरा हूँ

दीपक शर्मा कुल्लुवी

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 16, 2010 at 4:21pm — 2 Comments

कातिल हैं

قتل حین



कातिल हैं



तेरी बेरुखी तेरा ग़म

मेरी तकदीर में शामिल है

कभी तो करते हमपे यकीं

के हम भी तेरे काबिल हैं

तेरी बेरुखी तेरा ग़म----

लाख जुदाई हो तो क्या

यादों में कभी हो ना कमीं

बचा लेंगे मंझधार से भी

हम ही तेरे साहिल हैं

तेरी बेरुखी तेरा ग़म----

क़त्ल भी कर दो उफ़ ना करें

हँसते हँसते मर जाएंगे

ना ज़िक्र करेंगे दुनियां से

कि आप ही मेरे कातिल हैं

तेरी बेरुखी तेरा ग़म----

हम 'दीपक' थे जल जाते… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 16, 2010 at 2:10pm — 5 Comments

प्राकृति से खिलवाड़

प्राकृति से खिलवाड़



प्राकृति से खिलवाड़ होगा तो प्राकृतिक आपदा आएगी ही I



कहीं बाढ़ कहीं आग कहीं सूखे की मार कहीं बादल फटने की घटनाएँ कहीं भूकंप आज एक आम सी बात हो गई है I कारण केवल एक ही है प्राकृति से खिलवाड़ I पहाड़ों जंगलों खेत खलिहानों को काट काटकर बड़े बड़े भवन,होटल बन गए I भूमाफिया जंगल माफिया राज कर रहे हैं I गरीब लोग परेशान हैं I वृक्ष कटते जा रहे हैं I धीरे धीरे हम प्रलय की और जाते जा रहे हैं I समय रहते हम लोगों में जागरूकता नहीं आई तो वो दिन दूर नहीं जब इस धरा का… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 16, 2010 at 12:10pm — No Comments

MERI SHAYARI

आपकी यादों का खज़ाना लिए

इक रोज़ चले जाएँगे हम

याद तो करोगे ज़रूर

पर कहाँ आ पाएँगे हम

दीपक कुलुवी



दो कतरा-ए-शराब पास न होती

तो क़यामत होती

तमाम रात बीत जाती

तेरी याद ही न जाती
DEEAP SHARMA KULUVI

09136211486

Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 16, 2010 at 12:08pm — 3 Comments

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