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Deepak Sharma Kuluvi's Blog – September 2010 Archive (6)

कहाँ तक

कहाँ तक

कहाँ तक संजोउं मैं सपने सुहाने
कहाँ तक बचाऊ मैं सपने सुहाने
अपना ही नाम तक भूलने लगा हूँ
कहाँ तक छुपाऊं मैं सपने सुहाने
क्या हूँ मैं किसको पता
क्या था मैं किसको पता
सबको दिखेगा बस मेरा आज
दिखाऊं किसे ज़ख्म दिल के पुराने
कल तक तो 'दीपक' था 'कुल्लुवी' है आज
किसे क्या पता ,है आवाद या बर्वाद
कोई भूल चुका होगा किसी को याद होगा
किसे क्या पता अब तो हम हैं दीवाने

दीपक शर्मा कुल्लुवी

०९१२३६२११४८६

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 30, 2010 at 11:05am — 1 Comment

शर्म का घाटा

शर्म का घाटा



मिलावट का एक और खुलासा

मिलावट खोरों को शर्म का घाटा

शहद में मीठा ज़हर मिलाया

जिसनें भी खाया वोह पछताया

देश की नामीं बारह कम्पनियों में से

ग्यारह के सैम्पल में पाया

जन्म से लेकर मृत्यु तक

शहद का होता है उपयोग

किसको पता था मिटेंगे नहीं

लग जाएँगे और भी रोग

रामदेव बाबा जी के शहद से लेकर

डाबर तक यह पाया गया

मीठे मीठे चटकारों से

हम सबको बहलाया गया

सूली पर लटका दो सबको

या फिर मार दो गोली

जिस जिसनें… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 16, 2010 at 12:30pm — 5 Comments

कुछ न कुछ

कुछ न कुछ

मेरे शे-रों में कुछ न कुछ तो ज़रूर रहा होगा
वर्ना अश्क आपके,इस कदर न छलकते
अंधेरों में ही सही,चिराग जलाने चले आते हो
वर्ना मेरी मजार के आसपास,इस कदर बेबस न भटकते
मायूस होकर ना देखते,बंद फाइलों में तस्वीरें मेरी
मेरी यादों के लिए,इस कदर ना तरसते
यह तो 'दीपक कुल्लुवी' का वादा था याद रखेंगे
आप तो बेवफा थे,इस कदर बेवजह ना बदलते

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
०९१३६२११४८६
१५/०९/२०१०

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 15, 2010 at 11:16am — 3 Comments

इंसानियत का फ़र्ज़

इंसानियत का फ़र्ज़



डेंगू का कहर देखकर

बेचारे मच्छर भी शरमा गए

अपनें तो पीछे हट गए

बेचारे मच्छर मदद को आ गए

कहनें लगे ना घबराना

हम इंसानियत का फ़र्ज़ निभाएँगे

आपके अपनें तो धोखा दे गए

हम ब्लड डोनेशन को ज़रूर आएँगे

अपना खून देकर भी

हम आपको ज़रूर बचाएँगे

जितना आपसे चूसा था

उससे दुगुना देकर जाएंगे

अपनी तो मज़बूरी थी

ना पीते तो कैसे जीते

लेकिन आपकी खातिर हम

बिन पिए मर जाएंगे

लेकिन आपके अपनों की तरह

पीठ… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 13, 2010 at 2:56pm — 1 Comment

पैरोडी :भाई मीडिया तो सच ही दिखात है !

पैरोडी



सखी सैयां तो खूब ही कमात है,महंगाई डायन खाए जात है की धुन पर आधारित



भाई मीडिया तो सच ही दिखात है

शीला जलत भुनत जात है

हत्थनी कुण्ड करे बँटाधार है

बरसात कहर ढाए जात है

भाई मीडिया तो सच -----

सारी दिल्ली है बेहाल

आई फ्लू ,डेंगू की है मार

डाक्टर हो रहे मालामाल

कॉमनवेल्थ सुसरी सर पे सवार है

बरसात कहर ढाए जा-------

भाई मीडिया तो सच ही-----

जहाँ भी देखो जाम ही जाम

सड़कों पर भी चल रही नाव

दिल्ली का जीवन… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 13, 2010 at 2:30pm — 3 Comments

क़दम

क़दम


उन्ही के कदमों में जा गिरा ज़माना है
इश्क़-ओ-मुहब्बत का जिनके पास ख़ज़ाना है
वफ़ा की सूली पे जो हँसता हुआ चढ़ जाए
नाम-ए-बेवफ़ाई से बिल्कुल जो अंजाना है
ईद और दीवाली में जो फ़र्क़ नहीं करता
अल्ला और राम को एक जिसने माना है
आसां नहीं है जीना ऐसे जनू वालों का
शॅमा की मुहब्बत में हँसकर जल जाते परवाने हैं
'दीपक कुल्लवीउन सबको करता है सलाम
इंसानियत का बोझ जो हंसकर उठाते हैं


दीपक शर्मा कुल्लवी
09136211486

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 10, 2010 at 4:25pm — 2 Comments

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