For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ashish Srivastava's Blog – September 2013 Archive (8)

उलटी इनकी चाल - आज की राजनीतिक घटना के सन्दर्भ में

चाल चला जब हंस की, बगुला बहुत सयान

बगुला खाया मात तब, खोया अपना मान

खोया अपना मान, इस्तीफे की है मांग

बात बड़ेन की मान, है टूटी छोटी  टांग

कह सागर कविराय, नेता इनका है बाल

इन्हीं को अब पड़ी, है उलटी इनकी चाल

आशीष ( सागर सुमन ) 

मौलिम एवं अप्रकाशित

Added by Ashish Srivastava on September 27, 2013 at 11:00pm — 10 Comments

टेरत टेरत - एक कुंडली छंद

टेरत टेरत जुग भया, सुधि नहि लीन्ही मोहि   

बौरा बन घूमत फिरा, मिला न मुझको तोहि   
मिला न मुझको तोहि, कहाँ मैं जग में ढूंढूं
कहौ मुझी से कोहि , कौन सी माला फेरूँ 
कह सागर कविराय, मनहि को फेरत फेरत 
मिल जावेगा तोय ,स्वयम को टेरत टेरत  
आशीष ( सागर सुमन ) 

Added by Ashish Srivastava on September 27, 2013 at 1:22pm — 9 Comments

दुखियारी आँख - एक कुंडली छंद

मोहि दुखियारी आँख को,सुक्ख मिलत है नाहि  

देखत तुम बनते नहीं,बिन देखे अकुलाहि 
बिन देखे अकुलाहि, सजन को कहाँ निहारै  
होवेंगी कब चार , मिलन की राह बुहारै 
कह सागर कविराय,हुयी है अँखियाँ भारी, 
कबहुं मिलोगे मोय,पूछहि मोहि दुखियारी 
.
आशीष ( सागर सुमन ) 
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Ashish Srivastava on September 26, 2013 at 12:00pm — 9 Comments

प्रेम - एक कुंडली छंद

मदिरा मत समझो मुझे , नहीं नशे की चीज़ 

एक दीवानी प्रेम की , प्रेम से जाओ भीज 

प्रेम से जाओ भीज , नहीं मैं साकी बाला   
नैन मेरे संगीत , नहीं ये मधु की शाला …
Continue

Added by Ashish Srivastava on September 16, 2013 at 1:00pm — 5 Comments

मदिरा सवैया - एक छंद

प्रेम कि बांसुरि बाजि रही  पिय के मन को अकुलाय रही 

भोर समान खिलै मुखि चन्द चकोर पिया को बुलाय रही 

रीझि गया मन लाजि गया तन सांझ क़ि बात सुनाय रही 

रीति क़ि प्रीति बनी बिगरी पर प्रीति की  रीति बताय रही     

आशीष श्रीवास्तव ( सागर सुमन ) 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Ashish Srivastava on September 5, 2013 at 10:00pm — 8 Comments

मैं भक्त सुदामा वाला हूँ

मौलिक एवं अप्रकाशित

तुम में ही लीन प्रान मेरे , प्राणों में मेरे प्रियवर हो 

इसलिये विलग होकर भी तुम, मुझमे ही सदा निवासित हो 

अलके पलकें भी रो रोकर , दो चार अश्रु ही चढ़ा रही

मेरे भगवन मेरे प्रियतम,  बस राह धूल ही हटा रही

---

खुद के अन्दर तुम तक जाना, चरणोदक पीकर जी जाना 

इस धूल धूसरित मन से ही , अपने प्रियतम में लग जाना   

आकुल व्याकुल इस साधक पर, कुछ प्रेम सुधा बरसा…

Continue

Added by Ashish Srivastava on September 4, 2013 at 8:00pm — 21 Comments

मुक्तक - तीन

उन्हें चस्का बहुत था बेरुखी हमसे भी करने का 

डुबो कर आँख मेरी पीर में काजल लगाने का   

तुम्हारे इश्क की सांसें अभी कागज में तैरेंगी 
कभी उड़कर जो पहुंचे तुम तलक जादू है लफ्जों का 
-------------------------------------------------------
हवा भी रुख बदल लेती दिया जब प्यार जलता है 
अँधेरा भी करे साजिश मगर सूरज निकलता है  
कोई कर्जा पुराना है नयन बादल का सागर पर 
कभी बदले नहीं वो पर जमाना ही…
Continue

Added by Ashish Srivastava on September 2, 2013 at 9:55pm — 16 Comments

प्रेम योग - कुंडली छंद

बीमारी के अर्थ दो , नहि केवल ये रोग  

इक तो केवल रोग है, दूसर केवल योग   

दूसर केवल योग, बहूत है कठिन समझना   

प्रेम रोग इक भाव , इसे है सरल समझना 

कह सागर सुमनाय,कहो अब कुशल तिहारी  

रोग योग दो अर्थ , प्रेम कहा या बिमारी  

मौलिक व अप्रकाशित 
आशीष श्रीवास्तव (सागर सुमन) 

Added by Ashish Srivastava on September 2, 2013 at 8:30pm — 12 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service