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Er. Ganesh Jee "Bagi"'s Blog – October 2013 Archive (5)

लघुकथा : डंक (गणेश जी बागी)

राहुल और निधि कब एक दूसरे के हो गये पता ही नही चला | दोनों ने साथ साथ जीने मरने की कसमें खायीं थीं । निधि के घरवाले इस शादी के सख्त खिलाफ थे, किन्तु निधि की जिद के आगे उनकी एक न चली और अंतत: उन्हें शादी के लिए अपनी रज़ामंदी देनी ही पड़ी।



निधि उस दिन ऑफिस से जल्दी ही निकल गई, वह राहुल को यह खुशखबरी देना चाहती थी । निधि दरवाजे की घंटी बजाने ही वाली थी कि राहुल के कमरे से आ रही तेज आवाज़ों को सुन रुक गई,

"अरे राहुल, शादी की मिठाई कब खिला रहा है…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 24, 2013 at 12:30pm — 31 Comments

शातिर (अतुकांत) ---गणेश जी बागी

बादलों से ढँका

नीला नही काला आकाश,

उचाईयों को मापता

उन्मुक्त पंछी,

चट्टान की ओट मे

फाँसने को आतुर बहेलिया,

आहा ! इधर ही आ रहा मूर्ख

फँसेगा, ज़रूर फँसेगा,

ओह ! बच गया,

शायद भांप गया । 



पुनः पेड़ की ओट मे,

वाह ! इधर ही आ रहा दुष्ट

आएगा इस बार

इस तीर की…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 17, 2013 at 3:30pm — 33 Comments

लघुकथा : गिफ्ट (गणेश जी बागी)

साफ साफ बताओं, आख़िर बात क्या है ? जबसे तुम अपनी छोटी बहन की शादी से लौटी हो, तुम्हारा मूड उखड़ा उखड़ा है और ढंग से बात भी नही कर रही हो, प्रकाश नें अपनी पत्नी नीतू से पूछा | 

"कुछ नही बस यूँ ही" 

"देखो 'बस यूँ ही' कहने से काम नही चलने वाला, तुम्हे मेरी कसम, सच सच बताओं हुआ क्या ?"

"प्रकाश आपने मेरी बहन…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 14, 2013 at 10:30am — 53 Comments

लघुकथा : कन्या पूजन (गणेश जी बागी)

राधना तीन बेटों की माँ बन गयी थी, लेकिन बेटी की कमी हमेशा उसे अन्दर से कचोटती रहती। सासू माँ ने समझाया भी कि बहूँ एक बार और देख लों शायद माता रानी सुन लें, पर वह कोई चांस नहीं लेना चाहती थी, बड़ी ननद ने तो यहाँ तक कहा कि मेडिकल साइंस आज बहुत आगे है - चेक करा लेना और यदि बेटी नहीं हुई तो…… लेकिन आराधना ने साफ़ साफ़ कह दिया कि वो ऐसा घृणित पाप नहीं कर सकती । 



नवरात्रि का पहला दिन था सुबह सुबह आराधना पूजा की डलिया लिए मंदिर जा रही थी, तभी…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 5, 2013 at 2:30pm — 43 Comments

लघुकथा : गिरगिट (गणेश जी बागी)

ल राज्य में आम चुनाव के परिणाम का दिन था लोटन दास 'चम्मच छाप' पार्टी का पक्का समर्थक था, 'चम्मच छाप" बिल्ला लगाए, झंडा और गुलाल लिए वो और उसके साथी मतगणना स्थल पर सुबह से मौजूद थें, उसकी पार्टी को शुरूआती बढ़त मिलने लगी, लोटन दास और उसके साथी पूरे उमंग में नारे लगा-लगा कर गुलाल उड़ाते हुए नाच रहे थे । 

किन्तु यह क्या ! दोपहर बाद 'थाली छाप' पार्टी ने बढ़त बना ली और अंततः…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 3, 2013 at 9:00am — 30 Comments

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