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Manan Kumar singh's Blog – October 2016 Archive (4)

गीतिका/हिंदी गजल

दीप-पर्व पर(भुजंगप्रयात छंद)

122 122 122 122

*****************************

चलो रोशनी को जगाने चलें हम

अँधेरे यहाँ से हटाने चलें हम।1



रहे माँगते इक किरण का सहारा

लिये दीप कर में जलाने चलें हम।2



बँटे खेत कितनी तरह से अभी हैं

दिलों की लकीरें मिटाने चलें हम।3



बहुत बार देखी नजाकत जहाँ की

जरा नाज अपना दिखाने चलें हम।4



कहानी हुआ भेद बढ़ना यहाँ का

चलो आज पर्दा उठाने चलें हम।5



इशारों पे' अबतक उझकते फिरे… Continue

Added by Manan Kumar singh on October 23, 2016 at 7:30am — 13 Comments

हिंदी गजल/गीतिका(टूटता रहता घरौंदा...)

#गीतिका#

***

टूटता रहता घरौंदा फिर बनाना चाहिये

जोड़कर कड़ियाँ जरा-सा गीत गाना चाहिये।1



जिंदगी से दर्द का बंधन बड़ा मशहूर है

जब समय थोड़ा मिले तो मुस्कुराना चाहिये।2



तीर ये कबके सँजोये चल रहे हैं आजतक

बात पहले की भुला नजदीक आना चाहिये।3



आदमी को आदमी के दर्द का अहसास हो

बस हवा ऐसी बहा गंगा नहाना चाहिये।4



मिल रहीं नजरें यहाँ परवान पन चढ़ता नहीं

आपके दिल में जरा मुझको ठिकाना चाहिये।5



फूल छितराये नहीं ऐसी करूँ… Continue

Added by Manan Kumar singh on October 18, 2016 at 8:00pm — 8 Comments

गजल(लूट का धंधा.....)

2122 2122 2122 212

लूट का धंधा करें जो वे सभी रहबर हुए

जिंस कुछ जिनकी नहीं है आज सौदागर हुए।1



आशियाने जल रहे सब हो रहे बेघर यहाँ,

अब परिंदे क्या उड़ेंगे लग रहा बेपर हुए।2



मिल रही बहकी हवा कातिल बवंडर से अभी,

खरखराते पात सब हर डाल पर अजगर हुए।3



घुल रहा कैसा जहर गमगीन लगती है फिजा,

शब्द वैसे ही धरे हैं अर्थमय आखर हुए।4



है वही अपना गगन भरता गया काला धुआँ,

पूछते पंछी विकल हालात क्यूँ बदतर हुए।5



पत्थरों को फाड़ कर… Continue

Added by Manan Kumar singh on October 10, 2016 at 7:30pm — 9 Comments

गजल

( बेवजह भौंकनेवालों को संबोधित)

रमल मुरब्बा सालिम

2122 2122

***

देख ढ़ेर बवाल मत कर

दोहरी अब चाल मत कर।1



रंग देख हँसे जमाना,

गिरगिटों-सा हाल मत कर।2



हैं सियारों-सी अदाएँ,

शेर वाली खाल मत कर।3



जो लड़ाई लड़ रहा उस

शस्त्र को वाचाल मत कर।4



कर रहा कुछ खुद नहीं तू,

भौंक कर अब ढ़ाल मत कर।5



बुझ गयीं कितनी मशालें,

और अब पामाल मत कर।6



श्वान भी सीमा बचाते,

भौंक,पर बेताल मत… Continue

Added by Manan Kumar singh on October 8, 2016 at 2:30am — 8 Comments

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