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Asha pandey ojha's Blog (14)

थी तो स्त्री न ?

कई रोज से खाली पेट थी

संभाल न सकी भूख

पसीज कर

दया करूणा ने

दो रोटी दस रूपये में

इतना भरा उसका पेट

फिर नौ माह

फूला रहा 



वो कुत्ता बिल्ली नहीं थी

बिना किसी एवज

भूख मिटा दी जाती

विक्षिप्त थी तो क्या

थी तो स्त्री…

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Added by asha pandey ojha on January 13, 2015 at 8:30pm — 30 Comments

त्रिसुगंधि (गीत ग़ज़ल व कविताओं का संकलन) का लोकापर्ण

काठमांडू नेपाल में होटल शंकर में अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकला मंच मुरादाबाद द्वारा आयोजित दिनांक 8 जून से 11 जून तक हुई अंतराष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी में द्वारा 134 लेखकों को लेकर संपादित की गई पुस्तक त्रिसुगंधि  गीत ग़ज़ल व कविताओं का संकलन 296 पृष्ठों की इस पुस्तक का लोकापर्ण करते अतिथिगण , कार्यक्रम के अध्यक्षडॉ हरिराज  सिंह  नूर  पूर्व कुलपति इ .वी .वी, मुख्य अतिथि थे डॉ  आर के मित्तल कुलपति टी .एम .यू…

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Added by asha pandey ojha on June 16, 2013 at 8:30pm — 18 Comments

ओ बी ओ के समस्त साहित्यकारों से विनम्र निवेदन

साथियों, मैं एक शोध पत्र तैयार कर रही हूँ जो आगामी अखिल भारतीय साहित्यकला मंच द्वारा काठमाण्डु (नैपाल) में आयोजित (अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी समारोह - 8 जून 2013 से 11 जून, 2013 तक) में पढ़ा जायेगा, इस निमित ओ बी ओ के समस्त साहित्यकारों से विनम्र निवेदन के साथ कहना है कि यदि आप सभी के माध्यम से मुझे विदेशों में रहने वाले भारतीय साहित्यकारों की  सूची, उनके द्वारा सृजित साहित्य, व उनके द्वारा सम्पादित पत्र पत्रिकाओं की सूची उपलब्ध हो सकती हो तो कृपया उपलब्ध करायें, यदि आप…

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Added by asha pandey ojha on March 13, 2013 at 10:30pm — 4 Comments

राजस्थानी भाषा में म्हारा कीं हाइकुड़ा

राजस्थानी भाषा में म्हारा कीं हाइकुड़ा 

मेल-माळीया 
अन धन रो  ढेर 
जीव जूझे…
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Added by asha pandey ojha on March 5, 2013 at 1:30pm — 8 Comments

त्रिसुगंधि .. काव्य संकलन हेतु रचनाएँ आमंत्रित

अखिल भारतीय साहित्यकला मंच

द्वारा

काठमाण्डु (नैपालमें आयोजित

(अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी समारोह 8 जून 2013 से 11 जून, 2013 तक) …

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Added by asha pandey ojha on March 5, 2013 at 1:30pm — 53 Comments

कुछ हाइकु

कुछ हाइकु 


(१)
मंदिर द्वारे 
 जीवन अभिशाप 
 देव दासी का
 (२)…
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Added by asha pandey ojha on February 22, 2012 at 1:00pm — 10 Comments

सरहद पर जाते वक्त

सरहद पर जाते वक्त 

वो  जो नज़र झुका कर कहा तुमने 
प्रिया! लौट कर न आ पाऊं  शायद
फिर से तेरी बांहों में 
जम्भूमि के कर्ज  चुकाने हैं 
नहीं निभा पाउँगा तुम्हारे प्रति अपना फर्ज 
हो सके तो माफ़ कर देना मुझे 
सच कंहूँ तो  तेरी इस शपथ  से  
डबडबाये   जरुर थे मेरे नयन  
पर यकीं कर  साथी 
मेरा माथा गर्व से तन गया था उस वक्त 
कितनी खुश नसीब होती हैं 
वो…
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Added by asha pandey ojha on February 16, 2012 at 4:00pm — 14 Comments

किसी को मत अपना मान परिंदे

किसी को मत अपना मान परिंदे
ये दुनिया बड़ी बेईमान परिंदे
मंदिर-मस्जिद ढूंढ़ रहा किसको
हर गली बिकता भगवान परिंदे
मोह का झूठा बंधन दुनियादारी
मत उलझा इसमें जान परिंदे
सांसों के पंख नहीं वश में अपने
ज़िस्मानी पंख झूठी शान परिंदे
मन की तिजोरी जब तक खाली
दौलत पर कैसा अभिमान परिंदे
जितना ऊपर उड़ता जीवन पंछी
खुलता सच का आसमान परिंदे
दुनिया में जो जीना चाहे सुख से
बंद रख आँखें और कान परिंदे
मेरी पुस्तक "एक कोशिश रोशनी की ओर "से

Added by asha pandey ojha on August 2, 2010 at 10:15am — 8 Comments

Gzal

इक तेरे तसव्वुर ने महबूब यूं संवार दी ज़िन्दगी



कि तेरे बगैर भी हमने हँस कर गुजार दी ज़िन्दगी



राहें -मुहब्बत में दर्दो -ग़म देने वाले बेदाद सुन



तेरी इस सौगात के बदले हमने निसार दी ज़िन्दगी



तमाम उम्र यूं रखा हमने अपनी साँसों का हिसाब



जैसे किसी सरफ़िरे ने ब्याज़ पर उधार दी ज़िन्दगी



बात मुक़दर की जब आये शिकवा -गिला बेमानी है



जिसने तुझे गुल बनाया उसी ने मुझे ख़ार दी ज़िन्दगी



तूं ही बता ऐ ख़ुदा उसकी आतिश -अफ़सानी… Continue

Added by asha pandey ojha on June 27, 2010 at 10:16am — 9 Comments

हवा मिस- झुक -लुक -लुक -छुप

हवा मिस- झुक -लुक -लुक -छुप





डार-डार से करे अंखियां चार





कस्तूरी हुई गुलाब की साँसें





केवड़ा,पलाश करे श्रृंगार





छूते ही गिर जाये पात लजीले





इठलाती-मदमाती सी बयार





सुन केकि-पिक की कुहूक-हूक





बौरे रसाल घिर आये कचनार





अम्बर पट से छाये पयोधर





सुमनों पर मधुकर गुंजार





कुंजर,कुरंग,मराल मस्ती में





मनोहर,मनभावन… Continue

Added by asha pandey ojha on June 7, 2010 at 12:44pm — 11 Comments

इस देश का संबल बनो

नव पीढी तुम इस देश का संबल बनो

माहौल कीचड़ है तो क्या तुम कमल बनो

जो जलना चाहता है उसके लिए अंगार बनो

चैन-सुकूं जो चाहे उसके लिए जलधार बनो

चंड-प्रचंड ज्वाला कहीं, कहीं गंगाजल बनो

नव पीढी तुम .......

माहौल कीचड़ ........

वतन की खुशहाली तेरी आँखों का सपन हो

दिल में हो वतन परस्ती,सर पर कफ़न हो

हर क़दम हो दृढ़ता भरा,कभी न विचल बनो

नव पीढी तुम ......

माहौल कीचड़ ........

तोड़ दो उन हाथों को जो छीनते ग़रीब का निवाला

वतन से जो करते… Continue

Added by asha pandey ojha on May 13, 2010 at 11:46am — 13 Comments

माँ तुम

माँ तुम ममता का मूर्त रूप

तुम सतरंगी स्नेह -आँचल

तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र

तुम पावन -पुनीत गंगाजल

टेढ़ा -मेढ़ा विकट जीवन जगत

तुम सीधी-सादी सरल प्रांजल

छल ,छदम ,कपट चारों तरफ़

माँ तेरी गोदी निर्मल ,निश्छल

पावक ,अनल सामान जीवन

तुम चन्दन की छाया शीतल

तेरे आशीषों की ज्योत्सना से

पथ मेरा नित -नित उज्जवल

पाने तेरा वात्सल्य सोम -सुधा

ज़न्म-ज़न्म पी लूँ जीवन गरल

तेरी कोख पाने की अभिलाषा में

स्वयं -भू भी है आतुर प्रतिपल

मेरी… Continue

Added by asha pandey ojha on May 8, 2010 at 3:30pm — 16 Comments

ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर

ऐ खुदा इतना भी कमाल न कर
ज़िंदगी में मौत सा हाल न कर
काँटों को इतनी तरज़ीह देकर
यूं फूलों का जीना मुहाल न कर
ये दुनिया इक मुसाफ़िर ख़ाना
इसमें बसने का ख़याल न कर
ग़मे दहर का झगड़ा लेकर
तूं अपने घर में बवाल न कर
दर्द का दरमाँ तड़फ ही है
करके मुहब्बत मलाल न कर
आग बहुत दुनिया में,पानी कम
ये आंसू बेवज़ह पैमाल न कर
याद कर वो माज़ी के मंज़र
तूं अपना बरबादे-हाल न कर
चांदनी की चाह में यूं न पगला
इन अंधेरों से विसाल न कर

Added by asha pandey ojha on May 4, 2010 at 1:30pm — 16 Comments

कहीं धूप में

कहीं धूप में जले लोग

कहीं बर्फ में गले लोग



दर्दो-ग़म की बस्ती में

तन्हाई के काफ़िले लोग



बारूदों की तल्ख़ धूप में

खूं-पसीने से गिले लोग



बिन जुर्म जो काटे सज़ा

वो सलीब की कीलें लोग



कुछ पड़े हैं लाशों जैसे

कुछ हैं गिद्द-चीलें लोग



सागर थे जो सूख गए

बचे रेत के टीले लोग



खूं भी नहीं खौलता अब

नहीं होते लाल-पीले लोग



पाप अधम के बाजों पर

नाच रहे रंगीले लोग



दुनिया की फुलवारी… Continue

Added by asha pandey ojha on April 30, 2010 at 8:00am — 16 Comments

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