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Tasdiq Ahmed Khan's Blog – March 2018 Archive (3)

ग़ज़ल (मेरी आँखों में तस्वीरे दिलदार है )

(फ़ाइलुन---फ़ाइलुन---फ़ाइलुन---फ़ाइलुन)



हो रहा उनका हर वक़्त दीदार है |

मेरी आँखों में तस्वीरे दिलदार है |



कुछ तो है दोस्तों शक्ले महबूब में

देखने वाला कर बैठता प्यार है |



उनका दीदार मुमकिन हो कैसे भला

उनके चहरे पे बुर्क़े की दीवार है |



मुझ पे तुहमत दग़ा की लगा कर कोई

कर रहा ख़ुद को साबित वफ़ादार है |



चाहे दीदारे दिलबर ,दवाएं नहीं

वो हकीमों मुहब्बत का बीमार है |



उसको क्या वारदाते जहाँ की ख़बर

जो पढ़े ही नहीं…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 14, 2018 at 11:30am — 32 Comments

ग़ज़ल (वो लगता है आफ़ात करने चले हैं )

(फ़ऊलन--फ़ऊलन--फ़ऊलन--फ़ऊलन)



शुरूए इनायात करने चले हैं |

वो लगता है आफ़ात करने चले हैं |



ख़ुदा ख़ैर पाबंदियाँ हैं नज़र पर

मगर वो मुलाक़ात करने चले हैं |



यक़ीं ही नहीं उम्र ढलने का उनको

जो तब्दील मिर आत करने चले हैं |



खिलाना है फ़िरक़ा परस्तों को मुंह की

वो लोगों फ़सादात करने चले हैं |



मुहब्बत के अंजाम से हैं वो ग़ाफ़िल

जो इसकी शुरुआत करने चले हैं |



भला किस तरह कर दें उसको नुमायाँ

सनम से जो हम बात करने चले हैं…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 8, 2018 at 5:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल ( आप से मैं प्यार करना चाहता हूँ )

(फ़ाइलातुन ---फ़ाइलातुन ---फ़ाइलातुन )



बह्रे आतिश पार करना चाहता हूँ |

आप से मैं प्यार करना चाहता हूँ |



जिस खता की आपने मुझको सज़ा दी

वो खता सौ बार करना चाहता हूँ |



शहरे दिलबर छोड़ कर जाने से पहले

मैं विसाले यार करना चाहता हूँ |



बंदिशें मेरी निगाहों पर हैं लेकिन

उन का मैं दीदार करना चाहता हूँ |



फेर कर बैठे हुए हैं आप चहरा

मैं निगाहें चार करना चाहता हूँ |



मैं ख़ुदा हाफ़िज़ तुम्हें कहने से पहले

इश्क़ का…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 3, 2018 at 6:30pm — 9 Comments

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