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एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात "समर"

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:32pm

जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Aazi Tamaam on February 4, 2022 at 3:49pm

वाह आ गुरु जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई

सभी शे र बेमिसाल हैं

इस बहर् पर कब से कोशिश कर रहा हूँ में लेकिन एक दो शे र से ज्यादा कुछ न कह पाया

वाह बेहतरीन ग़ज़ल हुई

मुबारक बाद कुबूल फरमाएं 

Comment by Samar kabeer on June 1, 2020 at 6:24pm

जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत शुक्रिय: ।

Comment by Samar kabeer on August 17, 2019 at 4:12pm

बहुत शुक्रिय:

Comment by क़मर जौनपुरी on August 17, 2019 at 4:07pm
बहुत उम्दा मुहतरम
Comment by Samar kabeer on July 30, 2019 at 6:30pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी,आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by Rachna Bhatia on July 30, 2019 at 4:11pm

आदरणिय समर कबीर सर, सादर नमस्कार। लाजवाब ग़ज़ल। सभी अश्आर एक से बढ़ कर एक। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Samar kabeer on July 30, 2019 at 2:22pm

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on July 30, 2019 at 2:20pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on July 30, 2019 at 2:18pm

जनाब अनीस शैख़ जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

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