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ग़ज़ल -दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए

बह्र- 2122  2122  2122  212

मीडिया की फ़ौज लेकर रह्म कब खाने गए
झोपड़ी में सिर्फ़ वे दिल अपने बहलाने गए

रेडियो से ही हुआ करती थी सुब्ह-ओ-शाम जब
दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए

नीम पीपल छाँछ लस्सी बाजरे की रोटियाँ
ज़िन्दगी से गाँव की ये सारे अफ़साने गए

जोड़ते थे जो दिलों को अपनी माटी से यहाँ
फ़ाग चैता और कजरी के वे सब गाने गए

पूछने पर लाल के माँ ने कहा पापा तेरे
ओढ़कर प्यारा तिरंगा चाँद को लाने गए

ख़ुद ही काले हो गए वो बात और व्यवहार से
घुस के कालिख में उसे जो साफ़ करवाने गए

झेलकर तफ़्तीश की सब दिक़्क़तें यूँ बारहा
सोचते मज़लूम हैं आखिर वे क्यों थाने गए

ख़ुद-ग़रज़ हैं लोग कितने देखिये यह बानगी
काटकर सब पेड़ उसकी छाँव सुस्ताने गए

भूक क्या इफ़्लास क्या इनसे उन्हें मतलब नहीं
रहनुमा मुफ़लिस के दर बस फ़ोटो खिचवाने गए

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2020 at 9:42pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी बढ़िया ग़ज़ल कही है।

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 3, 2020 at 9:36pm
आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' सादर नमस्कार!
आज की राजनीति पर कटाक्ष करती सुंदर ग़ज़ल पर आपको हार्दिक बधाई।
Comment by नाथ सोनांचली on August 3, 2020 at 2:01pm

आद0 दण्डपाणि नाहक जी सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और खूबसूरत प्रतिक्रिया का हृदयतल से स्वागत है। बहुत बहुत आभार आपका

Comment by नाथ सोनांचली on August 3, 2020 at 2:00pm

 आद0 लक्ष्मण धामी "मुसाफ़िर" जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी दाद का ममनून हूँ। सादर

Comment by नाथ सोनांचली on August 3, 2020 at 1:59pm

आद0 सालीक गणवीर जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति और प्रतिक्रिया का हृदयतल से आभार ज्ञापित करता हूँ। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 2, 2020 at 3:43am

आ. भाई सुरेंद्र नाथ जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सालिक गणवीर on July 31, 2020 at 5:28pm

भाई सुरेश नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
सादर अभिवादन
बेहतरीन अश'आर से सजी एक उम्दा ग़ज़ल हम तक पहुँचाने के आप निस्संदेह बधाई के पात्र हैं.स्वीकार करें बंधुवर.

Comment by नाथ सोनांचली on July 31, 2020 at 12:13pm

आद0 अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सादर अभिवादन। भाई जी आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति और दाद का हृदयतल से आभार।

Comment by नाथ सोनांचली on July 31, 2020 at 12:12pm

आद0 डिंपल शर्मा जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति और दाद का शुक्रियः।सादर

Comment by नाथ सोनांचली on July 31, 2020 at 12:11pm

आद0 भाई रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और दाद पाकर प्रफुल्लित हूँ। सादर आभार आपका

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