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ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा

ग़ज़ल

212 212 212

तू है इक आइना ओबीओ
सबने मिल कर कहा ओबीओ

जो भी तुझ से मिला ओबीओ
तेरा आशिक़ हुआ ओबीओ

तुझसे बहतर अदब का नहीं
कोई भी रहनुमा ओबीओ

जन्म दिन हो मुबारक तुझे
मेरे प्यारे सखा ओबीओ

यार बरसों से रूठे हैं जो
उनको वापस बुला ओबीओ

हम तेरा नाम ऊँचा करें
है यही कामना ओबीओ

जो नहीं सीखना चाहते
उनसे पीछा छुड़ा ओबीओ

और जो सीखते हैं उन्हें
अपने सर पर बिठा ओबीओ

जो मेरे दिल ने मुझ से कहा
मैंने वो कह दिया ओबीओ

हम तेरे साथ आगे बढ़ें
रास्ता वो दिखा ओबीओ

तेरा सेवक हूँ मुद्दत से मैँ
और रहूँगा सदा ओबीओ

तू सदा यूँ ही फूले फले
है 'समर की दुआ ओबीओ

'समर कबीर'

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Samar kabeer on April 26, 2022 at 4:04pm

जनाब शैख़ शेह्ज़ाद उस्मानी जी आदाब, घजाल की सराहना के लिये आपका बहुत धन्यवाद I 

Comment by Chetan Prakash on April 20, 2022 at 6:55pm
  1. आदाब,  मुहतरम  समर कबीर साहब,  अस्वस्थता के कई दिन बाद  ब्लाग्स  झाँकना  शुरु हुआ , आपकी  ओ बीओ  जयंती विषयक  गज़ल  पढ़कर  मन आह्लादित हो गया। मेरे  लिए  ओ.बी.ओ  मन्दिर  के  समान है,  आदर्श  साहित्यिक- काव्य  समूह  है।अत:  मैं, सभी श्रद्धेय   संस्थापक आदरणीय इं.गणेशजी बागी, मुख्य सम्पादक आदरणीय  योगराज प्रभाकरे और आप जैसे  मार्ग-दर्शक  , आदरणीय सौरभ पाण्डेय साहब  का इस अवसर  पर एतद्वारा  अभिनंदन  करता  हूँ ।
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 18, 2022 at 11:42pm

हम तेरे साथ आगे बढ़ें
रास्ता वो दिखा ओबीओ.........वाह ! सही कहा है साहब.

तेरा सेवक हूँ मुद्दत से मैँ
और रहूँगा सदा ओबीओ......कोई शक नहीं है साहब.

तू सदा यूँ ही फूले फले
है 'समर की दुआ ओबीओ...........ओबीओ से जुड़े हर सदस्य की यही दुआ है.

आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, पिछले कुछ दिनों से जाने क्यों ओबीओ का पटल न कंप्यूटर पर और न मोबाइल पर खुल रहा था. आज पुनः कोशिश की तो खुल गया है. ओबीओ की प्रत्येक वर्षगाँठ पर  पटल को समर्पित एक खूबसूरत ग़ज़ल आपके दिल के क़लम से निकल ही आती है और इसमें भी एक खासियत जो मैं देख रहा हूँ. ग्यारहवीं वर्षगाँठ पर ग्यारह अशआर वाली ग़ज़ल तो बारहवीं वर्षगाँठ पर बारह अशआर की ग़ज़ल. यकीनन अगले वर्ष यहाँ १३ अशआर की एक खूबसूरत ग़ज़ल होगी . कमाल है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर

Comment by Aazi Tamaam on April 12, 2022 at 6:40pm

वाह वाह आ गुरू जी बेहद सुन्दर रचना ओ बी ओ के लिए नायाब तुह्फ़ा बधाई स्वीकार करें आदरणीय

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 11, 2022 at 7:50pm

बहुत ही शानदार ढंग से मंच को बधाई समर्पित की है आदरणीय... बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 8, 2022 at 1:57am

आदरणीय समर कबीर जी, ओबीओ को समर्पित इस शानदार ग़ज़ल की प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई। अशआर एक से बढ़कर एक हुए हैं। मंच की आत्मा को शाब्दिक करते शेर क्या ही खूब कहे हैं। वाह। सादर

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 7, 2022 at 5:31pm

आदरणीय बाऊजी आपकी गज़लें....आपके अशआर....सीखने की किताबें हैं...इस ख़ूबरु ग़ज़ल के माध्यम से ओबीओ को जन्म दिवस की बधाई देने और सीखने वालों को ऊर्जान्वित करने के लिए आपको बार बार साधुवाद।

शेष जिस मारक शेर की चर्चा अधिक होनी थी वह तो अग्रज नें पहले ही कि है......सादर प्रणाम

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 7, 2022 at 6:30am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। ओबीओ के स्थापना दिवस पर बहुत सार्थक गजल हुई है। इस मंच पर निरंतर आप सभी प्रबुद्ध जनो का मार्गदर्शन मिलता रहे इसी कामना के साथ हार्दिक बधाई।

Comment by Rachna Bhatia on April 5, 2022 at 9:21pm

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर् बहुत शानदार ग़ज़ल हुई।हर अश्आर पर दाद क़ुबूल करें।

इससे बेहतर तुहफ़ा हो ही नहीं सकता।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 5, 2022 at 12:22am

बहुत सुंदर उपहार ओबीओ परिवार के लिए 

हर शेर दिल को गहरे छू कर निकला 

बहुत प्रणाम 

कृपया ध्यान दे...

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