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विजयदशमी पर कुछ दोहे :

विजयदशमी पर कुछ दोहे :

राम शरों ने पाप को, किया धरा से दूर।
दम्भी रावण का हुआ, दम्भ अंत में चूर।1।

हाथ जोड़ वंदन करें , कहाँ राम हैं आप।
प्रतिपल बढ़ते जा रहे ,हर सत्या पर पाप।2।

छद्म वेश में घूमते, जगह जगह लंकेश।
नारी को वो छल रहे, धर कर मुनि का वेश।3।

राम नाम के दीप से, हो पापों का अंत।
मन से रावण दूर हो ,उपजे मन में कंत।4।

जीवन में लंकेश सा, जो भी करता काम।
ऐसे पापी को कभी , क्षमा न करते राम।।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on October 18, 2019 at 5:09pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 16, 2019 at 7:31pm
  1. आ. भाई सुशील जी, उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।
Comment by Sushil Sarna on October 14, 2019 at 6:45pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on October 14, 2019 at 6:45pm

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रजजी सृजन में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2019 at 10:07am

वाह बहुत ही सुन्दर दोहे आदरणीय..

Comment by Samar kabeer on October 11, 2019 at 7:05pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,विजयदशमी पर अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on October 8, 2019 at 9:13pm

आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार, विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ । 

Comment by Sushil Sarna on October 8, 2019 at 9:13pm

आदरणीय  Sheikh Shahzad Usmani  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार, विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ । 

Comment by Sushil Sarna on October 8, 2019 at 8:23pm

आदरणीय  Sheikh Shahzad Usmani  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार, विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ । 

Comment by Sushil Sarna on October 8, 2019 at 8:22pm

आदरणीय TEJ VEER SINGH  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार, विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ । 

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