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"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है मुझे

क़त्ल करने के बाद ख़्वाबों का

देके वो ख़ूँबहा गया है मुझे

हक़ किसी और का नहीं उस पर

दिल वो करके हिबा गया है मुझे

दर्द बढ़ता ही जा रहा है,"समर"

कैसी देकर दवा गया है मुझे

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on June 4, 2020 at 11:46am

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।

Comment by Samar kabeer on June 4, 2020 at 11:45am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।

Comment by Samar kabeer on June 4, 2020 at 11:44am

जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on June 3, 2020 at 11:08pm
वाह वाह वाह बहुत खूब सर लाजवाब ग़ज़ल हुई । हार्दिक बधाई ।
Comment by Sushil Sarna on June 3, 2020 at 9:23pm

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

वाह आदरणीय समर कबीर साहिब वाह आप ग़ज़ल के बेताज बादशाह हैं। इस बेहतरीन और खूबसूरत दिल को छूती ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on June 3, 2020 at 8:36pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, इस बा-कमाल ग़ज़ल पर बधाई क़ुबूल फ़रमाएँ। एक एक शे'र में आपका फ़न और उस्तादी झलक रही है। और मक़्ता तो वाक़ई लाजवाब है। आपको सादर नमन।

Comment by Samar kabeer on June 1, 2020 at 6:27pm

जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका बहुत शुक्रिय: ।

Comment by Samar kabeer on January 10, 2019 at 11:57am

जनाब फूल सिंह जी आदाब,

//कबीर " बहुत खूब उम्दा रचना बधाई स्वीकारें//

आप बड़े हैं नाम लेकर भी सम्बोधित कर सकते हैं,ग़ज़ल की सराहना के लिए धन्यवाद आपका ।

Comment by PHOOL SINGH on January 10, 2019 at 11:50am

"कबीर " बहुत खूब उम्दा रचना बधाई स्वीकारें

Comment by Samar kabeer on November 1, 2018 at 2:22pm

जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

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