For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तनहा कट गया जिन्दगी का सफ़र कई साल का

चंद अल्फाज कह भी डालिए अजी मेरे हाल पर

मौसम है बादलों की बरसात हो ही जाएगी

हंस पड़ी धूप तभी इस ख्याल पर

 

फिर कहाँ मिलेंगे मरने के बाद हम

सोचते ही रहे सब इस सवाल पर

खुशबुओं की राह से एक दिन गुजर गया

कहाँ से आ गई ये राह दीवाल पर

 

शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे

दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर

आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर

बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर

 

तेरा आँचल हवाओं में ऐसे लहराता है

दिखे है लहरा चांद नदी के दर्पण पर

और भी छलक जाती हैं निगाह मिलाकर

हश्र तो ये है तुमसे मुलाकात पर

 

जिसे देखकर बढ़ी जाती है प्यास हर पल

हाल तो ये है लगी झड़ी बरसात पर

जरा गौर फरमाईए 'राजीव' की इस बात पर

उस चांदनी रात का जिक्र क्यों न हो इस ख्याल पर

Views: 493

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 28, 2012 at 9:31pm

शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे

दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर

आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर

बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर

 

तेरा आँचल हवाओं में ऐसे लहराता है

दिखे है लहरा चांद नदी के दर्पण पर

और भी छलक जाती हैं निगाह मिलाकर

हश्र तो ये है तुमसे मुलाकात पर

प्रिय राजीव जी ...सुन्दर गजल ...प्रिय प्रियतमा के नाजुक बंधन ....कौन आये बीच में चाँद के .....भ्रमर ५ 

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 12, 2012 at 3:41pm

आदरणीय प्रदीप जी .धन्यवाद ! सराहना के लिए आभार.

दिल में उतर गई तहरीर आपकी

नजर  उठा  के  देखा  थी  वो  तस्वीर  आपकी.

बहुत खूब.आपकी प्रतिक्रिया ने आह्लादित कर दिया.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 12, 2012 at 3:36pm

धन्यवाद ! आदरणीय जवाहर जी.सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 12, 2012 at 3:35pm

धन्यवाद ! सरिता जी.सराहना के लिए आभार.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 10, 2012 at 12:43pm

शायद इन रस्तों से होकर ख्वाबों में गुजरे

दिखे हैं मुझको सहरा चांद हर जर्रे पर

आसमान थर्राता था जिन आवाजों की जुम्बिश पर

बहरा चांद भी चुप है मेरी आवाजों पर

aavaj do kahan ho tum dunia meri javan hai 

aadarniya rajiv sir ji, saadar abhivadan

dil main utar gayi tahrir aapki

najar utha ke dekha thi vo tasvir aapki. badhai.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 9, 2012 at 10:26pm

तेरा आँचल हवाओं में ऐसे लहराता है

दिखे है लहरा चांद नदी के दर्पण पर

और भी छलक जाती हैं निगाह मिलाकर

हश्र तो ये है तुमसे मुलाकात पर

बहुत ही सुन्दर! झा  जी  बधाई !

Comment by Sarita Sinha on April 9, 2012 at 2:21pm

rajiv ji namaskar, 

bahut hi khubsurat is ghazal ki badhai swikar kijiye....

insan kitna bhi mazbut dikhe par andar koi n koi nazuk dhaga to hota hi hai...

khubsurat nazuk ehsas...

badhai...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"जय हो "
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद +++++++++ उषा काल आरम्भ हुआ तब, अर्ध्य दिये नर नार। दूर हुआ अँधियारा रवि का, फैले तेज…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Jan 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Jan 18
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Jan 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service