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मेरे शहर की बारिश

मेरे शहर की बारिश
लेकर आती है
ठंडी हवा के झोंकों में लिपटी 
माटी की सोंधी खुशबू 
बेसाख्ता बरसती बूँदें
समेटे प्यार दुलार भरी ठंडक
और तन बदन भिगोती
मन तक भिगो जाती है
लेकिन किसी को ये सब झूठ लगता है
क्यूंकि ये लेकर आती है
घरों की टपकती
छत की टप-टप
तेज़ हवा के झोंको से सरसराहट
दरवाजों पे आहट
बिरह की आग
सखी की याद
धुत्कार भरी तपिश
भिगोती है तन बदन संग मन
बचपन का अल्हड़पन समेटे
मेरे शहर की बारिश

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by AVINASH S BAGDE on June 21, 2012 at 3:44pm

sachchai se rubaroo......Deep ji.

Comment by Yogi Saraswat on June 21, 2012 at 3:08pm

दरवाजों पे आहट
बिरह की आग
सखी की याद
धुत्कार भरी तपिश
भिगोती है तन बदन संग मन
बचपन का अल्हड़पन समेटे
मेरे शहर की बारिश

sundar shabd , sandeep ji

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 21, 2012 at 11:17am

aap sabhi kaa hriday se shukriya ...............aadarneey डॉ. सूर्या बाली "सूरज sir ji , @PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA sir ji ..@SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR sir ji @Albela Khatri sir ji ......aadarneeya rajesh kumari ji ..@Rekha Joshi ji .....aap sabhi kaa saadar aabhar ......samyaabhaav se grasit hun abhi main ..........aap sabhi vigy jan mujhe kshma karenge aisee aasha hai

Comment by Albela Khatri on June 21, 2012 at 8:44am

गज़ब है  संदीप जी आपके शहर की  बारिश........
ख़ूब भिगोती  है आपको..........
भीगते रहिये
और ऐसे ही  सृजन करते रहिये,,,,,,,,,
__सादर !

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 20, 2012 at 8:55pm
प्रिय संदीप 'दीप' जी बारिस के बिभिन्न रूप रंगों को आप ने दिखाया ...अच्छा लगा ..एक ही सिक्के के अलग पहलू हैं हर मन में ये बारिस अपना अलग प्रभाव छोड़ ..कभी जलाती है कभी शीतल ....सुन्दर 
भ्रमर ५ 
Comment by Rekha Joshi on June 20, 2012 at 7:42pm

वाह संदीप जी ,क्या कविता लिखी है ,बहुत खूब ,बहुत बहुत बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 20, 2012 at 1:42pm

आपके शहर  का मौसम कुछ अजीज है 

आपका ये भाव हर दिल अजीज है 

है तपन यहाँ मगर मगन संदीप है 

खुश है प्रदीप बारिश का मौसम करीब है.

बधाई. 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 20, 2012 at 1:13pm

अच्छी कविता संदीप भाई !! बधाई हो !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 20, 2012 at 11:46am

बहुत सुन्दर भावों को संजोया है रचना में 

कृपया ध्यान दे...

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