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दरख्त की पीर कौन समझेगा

इश्क के मजबूत दरख्त में
शक की दीमक लग गयी है
यकीन के सब्ज पत्ते
पीले पड़ पड़ के
रिश्तों की ड़ाल से बेसाख्ता गिर रहे हैं
झूठ के तेज़ झोंके
दरख्त को जड़ से उखाड़ने की फिराक में हैं
सच की माटी जड़ों का साथ छोड़ रही है
दौरे हाजिर में बंजर होती जमीं

नफरत के खार से सजी धजी है
दरख्त की पीर कौन समझेगा 
इश्क का मजबूत दरख्त
हर सुबह खोखला होता जा रहा है ...................दीप .....................

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Comment

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Comment by आशीष यादव on June 24, 2012 at 1:54pm
वाह, क्या खूब लिखा आपने आजके मोहब्बत को, बिल्कुल सही।
बधाई
Comment by आशीष यादव on June 24, 2012 at 1:49pm

वाह, क्या खूब लिखा आपने आजके मोहब्बत को, बिल्कुल सही।
बधाई


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 22, 2012 at 10:58pm
सुन्दर प्रस्तुति.. 
Comment by Rekha Joshi on June 22, 2012 at 9:48pm

Sandeep ji 

इश्क के मजबूत दरख्त में 
शक की दीमक लग गयी है 
यकीन के सब्ज पत्ते 
पीले पड़ पड़ के 
रिश्तों की ड़ाल से बेसाख्ता गिर रहे हैं  bahut khub 

Comment by Yogi Saraswat on June 22, 2012 at 4:16pm

नफरत के खार से सजी धजी है
दरख्त की पीर कौन समझेगा 
इश्क का मजबूत दरख्त
हर सुबह खोखला होता जा रहा है

सुन्दर अभिव्यक्ति ! इश्क करने वालों को एक बार पढनी चाहिए

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 22, 2012 at 4:02pm

बेशक, बधाई.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 21, 2012 at 11:38pm

आज के दौर की इश्क़िया हालत बखूबी उभर कर आयी है.

बहुर खूब.

 

Comment by Raj Tomar on June 21, 2012 at 9:50pm

बहुत खूब..:)

Comment by AVINASH S BAGDE on June 21, 2012 at 3:34pm

इश्क के मजबूत दरख्त में 

शक की दीमक लग गयी है 

यकीन के सब्ज पत्ते 

पीले पड़ पड़ के 

रिश्तों की ड़ाल से बेसाख्ता गिर रहे हैं ...vishwas ka ANTI TERMIDE khatm ho gaya hai....

 

behtareen soch v shabd sanyojan............दीप ji ..........

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