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"पल्लू"

मुख
मलीन हो रहा है
तेज नष्ट भ्रष्ट
मुझे छोड़ दिया न
तुमने
गोरी के पल्लू ने
धीरे से कानों में कहा
देखो सब घूर रहे हैं
नज़र लगा देंगे
हर नज़र एक सी नहीं होती
ये नज़रें
बचाता हूँ मैं
छुपाता हूँ तुम्हे
ये कटारी सी नज़रें
लिबास तक
तार तार कर देती हैं
मैं पल्लू बस नहीं
मर्यादा हूँ
रिवाज हूँ
संस्कार हूँ
मुझे छोड़ दिया न
अब देखो
अंग्रेजी क्रीम लगा के
गोरी से मेम बन के
अंखियों से लाज हटा के
उनको असमान के ख्वाब दिखा के
क्या मिल रहा है
काम करने से किसने रोका है
तुमने गहने उतारे
मैंने कुछ न कहा
लेकिन शर्म हया भी उतार फेंकी
अब देखो
टकटकी लगाए
घूरते लोग
क्या तुम सबके देखने के लिए हो
क्या तुम सबकी आँखों की तिश्ना मिटाने वाली हो
क्या तुम कोई परा शक्ति हो
जो सबका ध्यान रखे
नहीं न
मैं तुम्हारी शान हूँ
पल्लू हूँ
सर पे डाल के रखो
कम से कम
बुरी नज़र से बची रहोगी
अब हर कोई तो दुशासन तो नहीं होता न
हाँ मगर कन्हैया है भी या नहीं
इसमें शक है

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by rajesh kumari on July 29, 2012 at 4:01pm

सुन्दर भाव बहुत अच्छी रचना 

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 28, 2012 at 6:58pm

मुख
मलीन हो रहा है
तेज नष्ट भ्रष्ट
मुझे छोड़ दिया न
तुमने
गोरी के पल्लू ने
धीरे से कानों में कहा

सत्य को दर्शाती सुन्दर रचना. बधाई.

Comment by Rekha Joshi on July 27, 2012 at 10:45pm

मैं तुम्हारी शान हूँ 
पल्लू हूँ 
सर पे डाल के रखो 
कम से कम 
बुरी नज़र से बची रहोगी 
अब हर कोई तो दुशासन तो नहीं होता न 
हाँ मगर कन्हैया है भी या नहीं 
इसमें शक है ,बहुत खूब ,क्या बात है पल्लू की ,बधाई 

Comment by Albela Khatri on July 27, 2012 at 10:32pm

waah bhai sandip patel ji.......

bahut khoob

achhi rachna post ki apne....

मैं तुम्हारी शान हूँ
पल्लू हूँ
सर पे डाल के रखो
कम से कम
बुरी नज़र से बची रहोगी
अब हर कोई तो दुशासन तो नहीं होता न
हाँ मगर कन्हैया है भी या नहीं
इसमें शक है

 

__umda khyal..........badhaai

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 27, 2012 at 7:42pm

मैं तुम्हारी शान हूँ -पल्लू हूँ 
सर पे डाल के रखो, 
कम से कम बुरी नज़र से बची रहोगी  

संदीप कुमार पटेल जी, हमारी लज्जा और परमपरा को उजागर करती 

अच्छी रचना  बधाई 

Comment by AVINASH S BAGDE on July 27, 2012 at 4:38pm

ये कटारी सी नज़रें 
लिबास तक 
तार तार कर देती हैं ..sateek.

----

मैं पल्लू बस नहीं 
मर्यादा हूँ 
रिवाज हूँ 
संस्कार हूँ ...wah..

--

मैं तुम्हारी शान हूँ 
पल्लू हूँ 
सर पे डाल के रखो 
कम से कम 
बुरी नज़र से बची रहोगी ...umda.

------संदीप पटेल "दीप".ji "पल्लू".ke madhyam se ek sarthak samwad sadha hai aapane.

 

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