For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

न हम मंदिर बनाते हैं न हम मस्जिद बनाते

कभी काँटे बिछाते हैं कभी पलकें बिछाते हैं॥

सयाने लोग हैं मतलब से ही रिश्ते बनाते हैं॥

हमारे पास भी हैं ग़म उदासी बेबसी तंगी,

तुम्हें जब देख लेते हैं तो सब कुछ भूल जाते हैं॥

वो धमकी रोज देता है के घर मेरा जला देगा॥

बड़ी मासूमियत से उसको हम माचिस थमाते हैं॥

इबादत के लिए उसकी हमारा दिल ही काफी है,

न हम मंदिर बनाते हैं न हम मस्जिद बनाते हैं॥

ग़रीबों की गली में क़त्ल अरमानों का होता है,

जहां पर ख़्वाब पलने से ही पहले टूट जाते हैं॥

मुहब्बत के फसाने में वो ज़िंदा रहते हैं हरदम,

वफ़ा की राह में हँसकर जो अपना सर कटाते हैं॥

जगी आँखों से सपने देखते हैं जो यहाँ “सूरज”,

फ़लक पर चाँद तारों की तरह वो जगमगाते हैं॥

डॉ॰ सूर्या बाली “सूरज”

(स्वरचित और अप्रकाशित)

 

Views: 860

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by मोहन बेगोवाल on February 20, 2013 at 9:17pm

डाक्टर साहिब, 

 एक प्यारी गज़ल पोस्ट करने की हमारी वधाई कबूल करें ,हर शेर लाजवाब है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 20, 2013 at 8:26pm

वाह एक और शानदार ग़ज़ल पढवाई डॉ बाली जी हर शेर कमाल का है दाद कबूल करें 

Comment by Rita Singh 'Sarjana" on February 20, 2013 at 7:06pm

ग़रीबों की गली में क़त्ल अरमानों का होता है,

जहां पर ख़्वाब पलने से ही पहले टूट जाते हैं॥

मुहब्बत के फसाने में वो ज़िंदा रहते हैं हरदम,

वफ़ा की राह में हँसकर जो अपना सर कटाते हैं॥ bahut sundar surya ji badhai

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 20, 2013 at 6:50pm

वाह वाह सर जी

एक एक शेर लाजवाब है किस किस की तारीफ करूँ

बस पढता ही गया

बहता ही गया

आनंद ही आनंद

हर शेर के लिए दाद पे दाद क़ुबूल कीजिये सर जी

स्नेह बनाये रखिये .........जय हो

Comment by Satyanarayan Singh on February 20, 2013 at 6:45pm

खूब सूरत गजल हेतु हार्दिक बधाई. स्वीकार करें.

Comment by वेदिका on February 20, 2013 at 6:33pm

कभी भूले से सर्मिन्दा मेरे हमराज़ होते है 

वो अपनी चाल चलते  है मुझे ऐसे बनाते है 

                                                   -"वेदिका "

लाजबाब रचना है आपकी ..:)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 20, 2013 at 5:18pm

इस रवानगी और उम्दा भाव के साथ देर तक बहता रहा. मतले से ही जिस तरीके आपने बाँध लिया, मक्ते तक वही बना रहा है. यह ग़ज़ल आने वाले सालोंसाल तक आपकी सारी ग़ज़लों में अलग ही दखेगी.

बार-बार पढूँ और बार-बार दिल से दाद कहूँ. 

हार्दिक बधाई, डॉक्टर साहब.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:14pm

खूब सूरत गजल हेतु हार्दिक बधाई. सर जी 

Comment by ajay yadav on February 20, 2013 at 5:05pm

सादर प्रणाम सर

बहुत ही प्रेरक और हकीकत से रूबरू रचना ...

जगी आँखों से सपने देखते हैं जो यहाँ “सूरज”,
फ़लक पर चाँद तारों की तरह वो जगमगाते हैं॥

बहुत प्रेरक |आभार |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
13 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
16 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
yesterday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service