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वो कुछ ना कह पाती |

जब कली ही मुरझाने लगी ,  फूल कहाँ से आयेगा |
फिर निर्जन विरान मरूस्थल में , फूल कहाँ से लायेगा | 
सब तोड़ते रहेंगे कली ,  पौधा कौन बनाएगा  | 
वो दिन भी ऐसा आयेगा , जब गुलशन मिट जाएगा | 
देख दहेज़ की शिकार बनी , लोग बाग घबराते हैं | 
कोई बचाने नहीं आता , दूर देख डर जाते हैं |
दवा लगाते पौधों में , माँ बाप से छिपाते हैं | 
पर कौन बचाने आयेगा , जब वैद्य घूस खाते हैं |
जब चाहती हँसती गुडिया , तब माँ का फर्ज निभाती |
पर बेटे की चाहत में ही , सब कुछ चुपके सह जाती | 
कभी घर के धौस में आकर , वो कुछ ना कह पाती |
झेल कर अपमान का पीड़ा , जो आगे बढ़ ना पाती | 
बस मंगल में अमंगल होता , जब वो भी कोशी जाये | 
मन ही मन में जलती रहती , जब लोग बनते पराये |
रक्षक ही जब भक्षक बनता है , तब कौन आकर बचाये | 

वर्मा माया के मंडी  में , अब कौन किसे  समझाये | 

श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 408

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Comment by Ashok Kumar Raktale on May 20, 2013 at 11:26pm
देख दहेज़ की शिकार बनी , लोग बाग घबराते हैं | 

कोई बचाने नहीं आता , दूर देख डर जाते हैं |........ बहुत सुन्दर पंक्तिया.

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, बहुत सुन्दर और मार्मिक रचना. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 16, 2013 at 3:04pm

बहुत ही भावनात्मक द्विपादियाँ रचीं हैं आपने आदरणीय सादर बधाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 15, 2013 at 3:18pm

सुन्दर सन्देश देती रचना के लिए बधाई श्री श्याम नारायण वर्मा जी 

Comment by ram shiromani pathak on May 15, 2013 at 2:35pm

बधाई आदरणीय बहुत ही सुन्दर।

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 15, 2013 at 1:35pm
जब कली ही मुरझाने लगी ,  फूल कहाँ से आयेगा |
फिर निर्जन विरान मरूस्थल में , फूल कहाँ से लायेगा | 
सब तोड़ते रहेंगे कली ,  पौधा कौन बनाएगा  | 
वो दिन भी ऐसा आयेगा , जब गुलशन मिट जाएगा | 
देख दहेज़ की शिकार बनी , लोग बाग घबराते हैं | 

कोई बचाने नहीं आता , दूर देख डर जाते हैं |

समझते सब हैं पर अनुपालन नहीं करते 

सादर बधाई आदरणीय 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 15, 2013 at 8:39am

आ0 श्याम नारायण जी,  ‘जब चाहती हँसती गुडिया, तब माँ का फर्ज निभाती। पर बेटे की चाहत में ही, सब कुछ चुपके सह जाती।‘  वाह! बहुत ही सुन्दर।  बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by shalini kaushik on May 15, 2013 at 1:56am

बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .पूर्णतया सहमत 

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