For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चुनावी क्षणिकाएँ

1

जारी है कवायद

शब्दों को रफ़ू करने की

बुलाये गए हैं 

शब्दों के खिलाड़ी

 

शब्द

काटे जोड़े और

मिलाये जा रहे हैं

रचे और रंगे जा रहे हैं

शब्दों का सौंदर्यीकरण जारी है

2

शब्द

कभी चाशनी में

घोले जा रहे हैं

तो कभी छौंके जा रहे हैं 

कढ़ाई में

फिर जारी है खिलवाड़

हमारे सपनों का

 

3

 

भाँपा जा रहा है मिजाज़

हर शख्स का

अचानक बढ़ गई है कीमत

जिंदा लाशों की 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 644

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Satyanarayan Singh on May 29, 2014 at 9:52pm

अति सुन्दर क्षणिकायें हार्दिक बधाई आ. नादिर खान जी 

Comment by Meena Pathak on May 20, 2014 at 6:55am

बहुत बहुत  सुन्दर .. बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 20, 2014 at 2:57am

तीनों क्षणिकायें न केवल प्रभावशाली हैं बल्कि अनुकरणीय भी हैं. आपकी इस प्रस्तुति की मैं हृदय से सम्मान करता हूँ. 

हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ, भाई,,.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 7, 2014 at 6:02am

क्या कहने हैं नादिर खान साहब, काश वे समझ पाते शब्दों की गरिमा को....

Comment by नादिर ख़ान on May 7, 2014 at 12:55am

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी आदरणीय गिरिराज जी एवं आदरणीय श्याम नारायण  जी आप सभी का बहुत शुक्रिया ।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 4, 2014 at 12:49pm

सुन्दर क्षनिकाए चुनावी मौसम में | वाह ! -

शब्द बाण के तीर से आहत,

आयोग में कर रहे शिकायत

आंचार सहिता की तलवार

लगता है भोंटी हो गयी धार | - लक्ष्मण  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 3, 2014 at 7:04pm

आदरनीय नादिर खान भाई , तीनो क्षणिकायें , बहुत सामयिक और बहुत सटीक रचे हैं आपने , आपको मेरी दिली बधाइयाँ ॥

Comment by Shyam Narain Verma on May 3, 2014 at 9:49am
इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.................
Comment by नादिर ख़ान on May 2, 2014 at 8:04pm

अदरणीय शिज्जु जी,आदरणीया अन्नपूर्णा जी,  हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 2, 2014 at 4:52pm

यही दुर्भाग्य है देखने समझने की शक्ति होने के बावजूद हम अक्सर अपनी आँखों से नहीं बल्कि किसी और की आँखों से देखते हैं बहुत खूबसूरत क्षणिकायें आदरणीय नादिर भाई बहुत बहुत बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service