For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नज़र मुझ पे कर दे ......गज़ल

एक गज़ल 

वज्न- 122 122 122 12

मेरे दिल को तुझसे वफ़ा चाहिए 

न जख्म ए जिगर फिर नया चाहिए 

~

है अरसा हुआ मै हूँ अब भी वहीँ 

तेरे दिल से निकली सदा चाहिए 

~

जो बीमार को कर सके है भला 

किसी हाथ में वो शिफ़ा चाहिए 

~

ये हैं इन्तेज़ामात तेरे ख़ुदा 

है किसने कहा इब्तिला* चाहिए                               दुःख 

~

जो दिल हैं परेशां जफ़ा से यहाँ 

महज़ उनके खातिर दुआ चाहिए 

~

अजी संगदिल है वो मेरा सनम 

नज़र मुझपे कर दे तो क्या चाहिए 

~

~वेदिका                           

[मौलिक/ अप्रकाशित] 

Views: 996

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 15, 2014 at 6:52pm

आपकी ग़ज़ल को पढ़ा आदरणीया गीतिकाजी. इस कोशिश के लिए हार्दिक बधाई.

Comment by वेदिका on July 13, 2014 at 3:21pm
आभार आदरणीय नीलेश जी! आपने वांछित सुधार हेतु ध्यान आकर्षित कराया।
Comment by Sushil Sarna on July 9, 2014 at 7:15pm

जो दिल हैं परेशां जफ़ा से यहाँ
लिए उनके केवल दुआ चाहिए .... वाह वाह वाह बहुत खूब आदरणीया वेदिका जी … दिलकश अहसासों से लबरेज़ इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 9, 2014 at 6:08pm

प्रिय गीतिका, ऊपर बह्र लिखने से पढने वालों को व् समीक्षा करने वालों को सहूलियत रहती है|बाकि जो कहना चाहती थी सुधी जां पहले ही कह चुके थोड़े से सुधार से उम्दा ग़ज़ल निखर कर आएगी अंतिम शेर तो कमाल का है ...बहुत बधाई आपको प्रयास रत रहिये शुभकामनाएँ |

Comment by Madan Mohan saxena on July 9, 2014 at 3:48pm

अजी संगदिल है वो मेरा सनम
नज़र मुझपे कर दे तो क्या चाहिए

बहुत सुन्दर गजल ,हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 9, 2014 at 10:23am

आदरनीया वेदिका जी , खूब सूरत ग़ज़ल कही है , आपको मेरी दिली बधाइयाँ ॥ आ. नीलेश भाई जी से सहमत हूँ , बह्र मे भी होते हुये -

लिए उनके केवल दुआ चाहिए - शब्द संयोजन खटक रहा है -- चाहें तो आप ऐसा भी कह सकते हैं -- महज़ उनकी खातिर दुआ चाहिये ॥

अगर कुछ ग़लत कहा हो तो क्षमा करें ॥

Comment by savitamishra on July 8, 2014 at 11:17pm

bahut badhiya 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 8, 2014 at 8:20pm

अजी संगदिल है वो मेरा सनम 

नज़र मुझपे कर दे तो क्या चाहिए 

वाह क्या बात है आदरणीया वेदिका जी बहुत खूब कहा

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 8, 2014 at 3:28pm

वेदिका जी

गजल के साथ ही  आखीरी शेर को सलाम  i  सादर i

Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 8, 2014 at 2:48pm

बहुत ख़ूब ..सुन्दर ग़ज़ल हुई है ..
ज़ख्मो जिगर शायद टाइपिंग एरर है ..ज़ख्मे जिगर होगा ..
.
लिए उनके केवल दुआ चाहिए ...इस मिसरे में वाक्य रचना थोड़ी इधर उधर लग रही है ..बाक़ी वरिष्ठ जन जैसा कहें 
सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service