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जीवन में उत्कर्ष (दोहे)- लक्ष्मण रामानुज

धरती माँ की गोद में, फिर आया नववर्ष,     

प्यार मिला माँ बाप से, जीवन में उत्कर्ष |

 

भाई सब देते रहे, मुझको प्यार असीम,

मित्र मिले संसार में, रहिमन और रहीम |

 

आई बेला साँझ की, समय गया यूँ बीत,

इतने वर्षों से यही,  समय चक्र की रीत |

 

बचपन बीता चोट खा,  माँ बापू बेचैन,

पूर्व जन्म के कर्म थे, भोगूँ मै दिन रेन |

 

मिला मुझे संयोग से,सात जन्म का प्यार,

मेरे घर परिवार से,  दूर  हुआ अँधियार |

 

दुर्बल तन बलवान मन, रहूँ वैद्य से दूर,

संतोषी मन भाव से, ह्रदय प्रेम भरपूर |

 

सरस्वती भण्डार से, मिला मुझे कुछ ज्ञान,

विद्वजनों की राह से, ठीक हुए दिनमान |

 

गुरुजन को मै दे सकूँ, क्या ऐसी सौगात,

सूरज सम्मुख दीप की, क्या कोई औकात |

 

जय हो वीणा वादिनी भरे भाव भरपूर,

सौरभ सा खिलता रहे, मेरे मन का नूर |

 

सत्तर की दहलीज पर, करो अगर स्वीकार

मुक्त ह्रदय से कर रहा, मै सबका आभार |

(मार्गदर्शक आद श्री योगराज प्रभाकर जी और श्री सौरभ पाण्डेय जी को समर्पित)

(मौलिक व अप्रकाशित)

-लक्ष्मण रामानुज लडीवाला 

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 23, 2014 at 10:24am

नमस्कार  भाई  श्री  सत्यनारायण सिंह जी, आपकी  शुभकामनाए  मेरे लिए अहम् है | दोहे सारगर्भित  बताकर  मान  देने के लिए आपका  ह्रदय से अतिशय  आभार |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 23, 2014 at 10:21am

दोहे पसंद  करने  के  लिए  आपका  हार्दिक  आभार  श्री  गिरिराज भंडारी जी 

Comment by Satyanarayan Singh on November 22, 2014 at 8:53pm

आ. लडिवालाजी सादर,

सर्वप्रथम  इस जन्मदिन की विलंबित शुभकामनाएं, जन्मदिन के शुभअवसर पर सुन्दर! सारगर्भित दोहों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 22, 2014 at 10:19am

दोहे पसंद कर  सराहने के लिए हार्दिक  आभार  श्री हरी प्रकाश दुबे जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 22, 2014 at 10:18am

दोहे प्रभाशाली बता कर दोहों का महत्व बढाने  के  लिए  आपका हार्दिक  आभार  श्री (डॉ) विजय शंकर जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 20, 2014 at 11:57pm

गुरुजन को मै दे सकूँ, क्या ऐसी सौगात,

सूरज सम्मुख दीप की, क्या कोई औकात ------- आदरणीय लक्ष्मण भाई , लाजवाब दोहावली के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Hari Prakash Dubey on November 20, 2014 at 5:20pm

बचपन बीता चोट खा,  माँ बापू बेचैन,

पूर्व जन्म के कर्म थे, भोगूँ मै दिन रेन |......बहुत ही खूबसूरत ,हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण रामानुज  जी।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 20, 2014 at 10:19am

दोहों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया से और उत्साह्वार्धन हुआ है | आपकी  शुभकामनाए पाकर मै धन्य हुआ | आपका हृदयतल से हार्दिक आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी | 

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 19, 2014 at 5:52pm
प्रभावशाली दोहों की प्रस्तुति , बधाई आदरणीय लक्षमण लडीवाला जी ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 19, 2014 at 5:30pm

जन्मदिवस की असीम शुभकामनायें .

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