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नवपल को दे अर्थ (दोहें) - लक्ष्मण रामानुज

दो हजार पंद्रह मने, योग लिए है आठ,

मानो यह नव वर्ष भी,लेकर आया ठाठ |

 

 नए वर्ष का आगमन, खुशिया मिले हजार,

सबको दे शुभ कामना, दूर करे अँधियार |

 

रश्मि करे अठखेलियाँ, आता तब नववर्ष

प्राची में सौरभ खिले, सुखद धूप का हर्ष |

 

अच्छे दिन की आस रख, ह्रदय रहे सद्भाव

दूर करे नव वर्ष में, रिश्तों से  अलगाव |

 

 

स्वागत हो नव वर्ष का,लेता विदा अतीत,

प्रथम दिवस के भोर से, शुभ हो समय व्यतीत |

 

समय चक्र गतिशील है, समय जायगा बीत,

गया वक्त मिलता नहीं, यही समय की रीत |

 

बीती ताहि बिसार कर, नव पल को दे अर्थ

भूले कष्ट अतीत का, हो न आज यूँ व्यर्थ |

 

विभू हमें देना सदा, अमर प्रेम की गंध,

प्रेम प्रीत दिल में रहे, सद्भावी सम्बन्ध |

 

धरती माँ की गोद में, आया है नववर्ष,

भाव भरों माँ शारदे, जीवन में उत्कर्ष |

 

ज्ञानोदय पथ पर बढे, सार्थक करे विमर्श,

सजे भाल माँ भारती, तभी सृजित नववर्ष |

 

रहे न किसी को तनिक, दिल में कोई कर्ष 

सच्चे अर्थों में तभी, शुचित प्रस्फुटित हर्ष |  

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 1, 2015 at 10:50am

नव वर्ष के दोहे पसंद करने के लिए  आभार | नव वर्ष की हार्दिक शुभकानाएं आपको श्री शिजू "शकूर" भाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 1, 2015 at 10:29am

आप सभी सहृदयी मित्रों को नव वर्ष की  हार्दिक  शुभकामनाएं श्री (डॉ) विजय शंकर जी, श्री खुर्शीद खैराडी जी और श्री सोमेश कुमार जी -

करे सभी नव वर्ष में, इक दूजे को प्यार, 

निभा सके दायित्व सब, खुशिया मिले अपार |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 1, 2015 at 10:23am

आप सभी को  नव वर्ष  की  हार्दिक शुभकामनाएं श्री मिथिलेश  वामनकर जी, श्री  गिरिराज भंडारी  जी और श्री हरी प्रकाश डूबे जी,--------

नए वर्ष का आगमन, खुशिया मिले हजार, 

सबको दे शुभ कामना, दूर करे अँधियार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 1, 2015 at 8:07am

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद सर नववर्ष पर अच्छी दोहावली रची है आपने बहुत बहुत बधाई

Comment by khursheed khairadi on December 31, 2014 at 11:47am

स्वागत हो नव वर्ष का,लेता विदा अतीत,

प्रथम दिवस के भोर से, शुभ हो समय व्यतीत |

 

समय चक्र गतिशील है, समय जायगा बीत,

गया वक्त मिलता नहीं, यही समय की रीत |

 

बीती ताहि बिसार कर, नव पल को दे अर्थ

भूले कष्ट अतीत का, हो न आज यूँ व्यर्थ |

 आदरणीय लक्षमण प्रसाद लडीवाला जी सुन्दर दोहावली है |नववर्ष की आपको तथा इस मंच के सभी साथियों को शुभकामनाओं सहित -सादर अभिनन्दन 

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 31, 2014 at 5:18am
नव वर्ष की बहुत बहुत शुभ कामनाएं आदरणीय लक्षमण प्रसाद लडीवाला जी।
Comment by somesh kumar on December 30, 2014 at 10:58pm

suner dohe,nv vrsh ke utkrsh me hrshpurvk hardik bdhai nv vrsh evm rchnavo ke lie

Comment by Hari Prakash Dubey on December 30, 2014 at 10:47pm

समय चक्र गतिशील है, समय जायगा बीत,

गया वक्त मिलता नहीं, यही समय की रीत |.........आदरणीय लक्ष्मण जी सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 30, 2014 at 9:58pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , नव वर्ष की शुभकामनायें देते आपके दोहे बहुत अच्छे  लगे ! हार्दिक बधाई स्वीकार करें । 

आदरणीय लक्ष्मण भाई , शिल्प के अनुसार  कुछ दोहों मे मात्रायें कम ज्यादा हैं  और कहीं प्रवाह भी बाधित है , एक बार दोहों की मात्रायें फिर गिन लीजियेगा ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 30, 2014 at 7:15pm

दो हजार पंद्रह का, योग लिए है आठ,

मानो यह नव वर्ष भी,लेकर आया ठाठ |.... वाह सर क्या योग लगाया फिर तुक जमाया आठ के ठाठ ..

बीती ताहि बिसार कर, नव पल को दे अर्थ

भूले कष्ट अतीत का, हो न आज यूँ व्यर्थ |.... सुन्दर दोहा 

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला सर आपको इन बेहतरीन दोहों की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई और नव वर्ष की मंगल कामनाएं 

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