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ओ बी ओ पर्याय (दोहें) - लक्ष्मण रामानुज

विद्वजनों के योग से,सफल हुआ यह काज,
पाँच वर्ष के काल में, खूब सजाया साज |
 
रसिक मंच से जुड़ सके, करें कौन पाबन्द
दूर देश से जुड़ रहें,  देख  यहाँ  आनंद |  
 
छंदों को यूँ खोजकर, देते सबको ज्ञान,
मान धरोहर देश की,  लाते सबके ध्यान |
 
ह्रदय भाव से आ मिले, इक दूजे के संग,
होली से माहौल में, खिले प्रीत के रंग |
 
पाँच वर्ष की साधना, ओ बी ओ पर्याय,
कृपा करे माँ शारदा, सब पर रहे सहाय |
.
(मौलिक अ अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 1, 2015 at 10:55am

ओबीओ के 5 वर्ष होने पर मन में आयें भावों पर रचे दोहें सराहने के लिए हार्दिक आभार श्री सुरेद्न्र कुमार शुक्ल  भ्रमर जी 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 30, 2015 at 4:48pm
ह्रदय भाव से आ मिले, इक दूजे के संग,
होली से माहौल में, खिले प्रीत के रंग |
ओ बी ओ का मान बढाती और सब को गले लगाती अच्छी प्रेरक रचना
भ्रमर ५
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 4, 2015 at 5:29pm

नमस्ते समर कबीर साहब | दोहे सराहने  के  लिए शुक्रिया सहित ओबीओ वर्षगाँठ पर पेश की गई  आपकी उम्दा गजल के लिए बधाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 4, 2015 at 5:26pm

शुभ्कनाओं  सहित हार्दिक आभार आपका श्री श्याम नारायण वर्मा  जी | सादर 

Comment by Samar kabeer on April 3, 2015 at 3:03pm
जनाब लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी,आदाब,अच्छे दोहे हुए हैं भाई,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं |
Comment by Shyam Narain Verma on April 3, 2015 at 12:17pm
सुंदर दोहों की बधाई, पूरे मन से ॥
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 3, 2015 at 10:35am

ओबीओ की पांचवी  वर्षगाँठ की  हार्दिक  बधाई के साथ इस इस उपलक्ष में रचित पाँच दोहें सराहने के लिए आपका हृदयतल से हार्दिक  आभार श्री शुशील सरना जी और  श्री विजय शंकर जी | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 3, 2015 at 10:33am

ओबीओ के सफलतापूर्वक पाँच वर्ष पूर्ण होने की की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ ही दोहे सराहने के लिए आपका हार्दिक  आभार आद. डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, श्री श्याम मठपाल जी और  श्री  सुशिल सरना जी | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 3, 2015 at 10:29am

ओबीओ के  पाँच वर्ष पूर्ण होने पर आपकों हार्दिक  बधाई एवं दोहें पसंद करने के लिए हार्दिक आभार श्री कृष्णा मिश्रा "जान" गोरखपुरी जी, श्री मिथिलेश  वामनकर जी, और श्री गिरिराज भंडारी जी | सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 2, 2015 at 10:43pm
रोचक, आदरणीय लक्षमण रामानुज लडीवाला जी , बधाई , सादर।

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