For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जुबाँ से इस कदर कड़वा तू हरदम बोलता क्यूँ है...

1222  1222  1222  1222

बुराई का बुराई से जहाँ में सामना क्यूँ है

कि इतनी ज़ुल्म की बढ़ती हुयी अब इन्तेहा क्यूँ है...१

 

 हमारी राह में तुमने, तुम्हारी राह में हमने

जो बोये थे वही कटेंगे इतना सोचता क्यूँ है ....२

 

कभी मेरी भी बातें सुन कभी मुझसे भी आकर मिल

तेरी परछाई हूँ मुझसे तू इतना भागता क्यूँ है ..३

  

ज़रा सा देख ले तू इक नज़र मेरे भी बच्चों को

तेरे बच्चों के जैसे हैं, तू इनसे रूठता क्यूँ है ....४

 

मेरे कहने से मिलती है तो रख ले सल्तनत तू ही 

मगर जज़्बात से मेरे तू हरदम खेलता क्यूँ  है ...५

 

तुझे हर वक्त दिखती है, बुराई सौ गरीबों में

इन्हें तू अपने चश्में से हमेशा देखता क्यूँ है ...६

 

कभी तो देख ले हमको भी तू इज़्ज़त की नज़रों से

कसम से यार इस पर भी, तू इतना सोचता क्यूँ है ...७

 

सरासर है गलत तुझको भी ये मालूम है लेकिन

जुबाँ से इस कदर कड़वा तू हरदम बोलता क्यूँ है ...८

         (मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 334

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shree suneel on December 5, 2015 at 9:05pm
आदरणीय नादिर ख़ान साहब, एक से बढ़कर एक ख़ूबसूरत अशआर आपने पेश किये हैं इस ग़ज़ल में.
हार्दिक.. हार्दिक बधाइयाँ आपको इस उम्दा ग़ज़ल के लिए. सादर
Comment by नादिर ख़ान on December 4, 2015 at 3:53pm

आदरणीय लक्ष्मण साहब  आपने रचना को सराहा बहुत  शुक्रिया आपका .. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 4, 2015 at 11:50am

आ0 नादिर खान जी, बहुत शानदार ग़ज़ल कही है सादर बधाई ।

Comment by नादिर ख़ान on December 3, 2015 at 11:02am

आदरणीय मिथिलेश जी  सही कहा आपने उस मिसरे में सुधार की आवश्यकता है पहले कैसे नज़र नहीं आया वाही सोच रहा हूँ । बहुत शुक्रिया सर इसे कहते है पारखी नज़र ... 

Comment by नादिर ख़ान on December 3, 2015 at 11:01am

जनाब समर साहब हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 3, 2015 at 4:37am

आदरणीय नादिर खान सर, बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने. शेर दर शेर दाद हाज़िर है. इस मिसरे को एक बार और देख लीजियेगा-

//जो बोये थे वही कटेंगे इतना सोचता क्यूँ है//

Comment by Samar kabeer on December 2, 2015 at 11:19pm
जनाब नादिर ख़ान जी,आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही है आपने,सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो गया,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।
Comment by नादिर ख़ान on December 2, 2015 at 8:01pm

आदरणीय श्याम नारायण जी बहुत बहुत शुक्रिया आपको रचना पसंद आयी |

Comment by नादिर ख़ान on December 2, 2015 at 7:59pm

 आदरणीया कान्ता जी आपने रचना को सराहा बहुत शुक्रिया आपका, उत्साहवर्धन   टिप्पणी के लिए आभार। ... 

Comment by kanta roy on December 2, 2015 at 6:41pm

कभी मेरी भी बातें सुन कभी मुझसे भी आकर मिल
तेरी परछाई हूँ मुझसे तू इतना भागता क्यूँ है--------वाह !!! मजा आ गया पढ़कर ! शानदार ग़ज़ल हुई है आपकी ये आदरणीय नादिर साहब। बधाई !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय प्रतिभा पांडे भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
16 minutes ago
TEJ VEER SINGH left a comment for pratibha pande
"आदरणीय प्रतिभा पांडे भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
17 minutes ago
TEJ VEER SINGH left a comment for योगराज प्रभाकर
"आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
19 minutes ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।"
20 minutes ago
Usha posted a blog post

क्षणिकाएँ

दिन ढलते, शाम चढ़ते, उसका डर बढ़ने लगता है, क़िस्मत, दस्तक भी देगी और भीनी यादें तूफान भी उठायेंगी…See More
31 minutes ago
vijay nikore posted blog posts
32 minutes ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय समर कबीर साहब, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। हृदय से आपका आभार। जी ज़रूर सर, 'मेरे और…"
1 hour ago
Usha commented on Usha's blog post कैसा घर-संसार?
"आदरणीय समर कबीर साहब, मेरी लघु कथा का प्रयास आपको पसंद आया, मेरे लिए हर्ष का विषय है। जी सर अवश्य…"
1 hour ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय विजय शंकर सर, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। उनपर आपके द्वारा दी गयी टिप्पणी से हर्ष हुआ कि…"
1 hour ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय सुशील सरना साहब, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। हृदय से आपका आभार। सादर।"
1 hour ago
Usha commented on Usha's blog post क्षणिकाएँ।
"आदरणीय समर कबीर साहब, मेरी क्षणिकाएँ आपको पसंद आयी। हृदय से आपका आभार। जी ज़रूर सर, 'मेरे और…"
1 hour ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

OPEN BOOKS ONLINE LUCKNOW CHAPTER at KAIFEE AAJMEE ACADEMY , NISHATGANJ, LUCKNOW

November 24, 2019 from 3pm to 6pm
DISCUSSIONS , CRITICISM , CULTURAL ACTIVITY  AND RECITING OF POEMS etc.See More
10 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service