For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नहीं इतर इससे कभी, ना कम ना अतिरिक्त
जीवन प्रभु की प्रीत से, रहे सदा संसिक्त

मन के कञ्चन भाव सब, आँके ना निर्मोल
सौदागर की लो प्रथम, नीयत ज़रा टटोल

पंछी उड़ उन्मुक्त अब, अपने पंख पसार
खींच लकीरें आज नव, अम्बर के उस पार

दृढ़ इच्छित पग थाप पर, पर्वत देंगे राह
मूर्त ढले हर कामना, प्रबल रहे जो चाह

बन जाओ दिनमान के, स्वतः एक पर्याय
उज्वल स्वर्णिम तेजमय, लिख दो हर अध्याय

सरल सहज व्यक्तित्व हो, बातें सब हों गूढ़
मन अंतर झकझोर दें, सदा सत्य आरूढ़

तुम ही सागर से गहन, तुम असीम विस्तार
तुम चातक की स्वाति हो, यही तुम्हारा सार

प्रीत पतंगा ज्यों करे दीपक से दिन रात
मन आकुल त्यों प्रीत में जलता है निश् प्रात

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 669

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kanta roy on February 4, 2016 at 11:18am
सभी दोहे सारगर्भित बने है यहाँ आपके आदरणीया प्राची जी । पढकर मन आनंद आनंद हुआ । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by MUKESH SRIVASTAVA on February 4, 2016 at 11:12am

khoobsoorat aur achhee dohe - badhaee


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 4, 2016 at 12:01am

आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी, बहुत ही शानदार दोहावली हुई है. आपका शब्द संयोजन अद्भुत है. इस शानदार प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. सादर नमन 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 3, 2016 at 3:33pm

दोहे पसंद कर हौसला अफजाई करने के लिए धन्यवाद आ० समर कबीर जी , आ० सतविंदर कुमार जी , आ० सुशील सरना जी , आ० हरि प्रकाश दूबे जी, आ० लक्ष्मण धामी जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2016 at 12:33am

आ० प्राची बहन सुन्दर दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई l

Comment by Hari Prakash Dubey on February 2, 2016 at 12:59am

आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी, बहुत ही सुन्दर दोहावली है, बहुत बहुत बधाई आपको ! सादर 

Comment by Sushil Sarna on February 1, 2016 at 8:13pm

मन के कञ्चन भाव सब, आँके ना निर्मोल
सौदागर की लो प्रथम, नीयत ज़रा टटोल

वाह आदरणीया प्राची सिंह जी वाह ... जीवन को परिभाषित करते इन गूढ़ और संदेशप्रद दोहों की प्रस्तुति पर आपको नमन करता हूँ। सुंदर शब्द चयन भावों की गरिमा को अलंकृत करते प्रतीत होते हैं। मनभावन इस प्रस्तुति के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on February 1, 2016 at 8:06pm
बहुत सुंदर उपदेशक दोहे।हार्दिक बधाई आदरणीया प्राची सिंह जी।
Comment by Samar kabeer on February 1, 2016 at 2:40pm
मोहतरमा डॉ.प्राची सिंह जी आदाब,बहुत अच्छे दोहे लिखे आपने बधाई स्वीकार करें !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service