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सुख़नवर प्रेयसी के रूप के वर्णन में डूबा है (ग़ज़ल)

1222  1222  1222  1222

धरा   है  घूर्णन  में  व्यस्त,  नभ   विषणन  में  डूबा  है

दशा  पर  जग  की, ये  ब्रह्माण्ड  ही  चिंतन  में डूबा है

हर इक शय  स्वार्थ  में आकंठ  इस  उपवन में डूबी है
कली   सौंदर्य   में   डूबी,  भ्रमर   गुंजन   में   डूबा  है

बयां   होगी   सितम  की  दास्तां,  लेकिन  ज़रा  ठहरो
सुख़नवर   प्रेयसी   के   रूप   के   वर्णन  में   डूबा  है

उदर के आग  की  वो  क्या  जलन  महसूस  कर  पाए
जो  चौबीसों  घड़ी  ही  अनगिनत  व्यंजन  में  डूबा  है

संवारेगा  वो  किस्मत  देश  की,  बस  पेटियां  भर  ले
अभी  कुछ  दिन  हुए  आए, अभी  शोषण में  डूबा  है

न  मतलब  ईश्वर  तुझ  से, न  तुझ  से  वास्ता अल्लाह
ज़माना  सिर्फ आय और व्यय के विश्लेषण में  डूबा है

अधीन   उन्माद  के   उसके   हुए   हैं   चेतन-अवचेतन
जो क्षण भर को भी "जय" मदिरा भरे लोचन में डूबा है
==================================

जयनित कुमार मेहता

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 12, 2016 at 5:57pm
Waah waah Jaynit Ji bahut umda.badhaiyaan
Comment by narendrasinh chauhan on March 12, 2016 at 1:20pm

शानदार ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by जयनित कुमार मेहता on March 10, 2016 at 9:28am
आदरणीय मिथिलेश भाई जी, आपके उद्गारों के प्रति हृदय से आभारी हूँ।
Comment by जयनित कुमार मेहता on March 10, 2016 at 9:27am
आदरणीय बृजेश कुमार जी, रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभारी हूँ आपका।।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 6, 2016 at 11:53pm

आदरणीय जयनित जी, इस शानदार ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 3, 2016 at 3:43pm

वाहह वाहह आदरणीय...बहुत ही सुंदर

Comment by जयनित कुमार मेहता on February 29, 2016 at 12:01pm

आदरणीय राम अवध जी, आपकी सराहना और उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपको।।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 28, 2016 at 5:07pm
गज़ल की जितनी सराहना की जाये उतनी कम है देवनागरी की चाशनी में डूबी बेहतरीन गज़ल के लिये बधाई
Comment by जयनित कुमार मेहता on February 28, 2016 at 9:23am

आदरणीय योगेन्द्र जी, रचना पर आपकी सराहनात्मक प्रतिक्रिया से अभिभूत हूँ। हार्दिक धन्यवाद आपको।।

Comment by जयनित कुमार मेहता on February 28, 2016 at 8:42am

आदरणीय राहुल जी, हार्दिक धन्यवाद आपको।

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