For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तरही ग़ज़ल (कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें)

बह्र 2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी की राह मुश्किल हौसला रोशन करें
हर गली हर रास्ते पर हम दिया रोशन करें ||

ऐ ख़ुदा बर्कत की ख़ातिर भेज दे महमाँ कोई
अपने दस्तर ख़्वान पर हम ये दुआ रोशन करें ||

हुस्न वाले भी निखर जायेंगे मोती की तरह
गर नुमाइश छोड़ कर शर्म-ओ-हया रोशन करें ||

दूसरों से पूछना क्या हर कमी दिख जाएगी
आप अपने दिल का बस ये आइना रोशन करें ||

हैं यहाँ तनहाइयाँ और वक़्त की मजबूरियाँ
कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें ||

वक़्त जब विपरीत हो, जिंदा रखे बस धैर्य को
*इक दिया जब साथ छोड़े दूसरा रोशन करें ||*

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 1068

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2017 at 9:48am

आदरणीय सुरेन्द्र भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ... बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on May 14, 2017 at 10:11pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by नाथ सोनांचली on May 14, 2017 at 2:44am
आद0 ब्रजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 13, 2017 at 10:21pm
वाह वाह आदरणीय क्या ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई..हार्दिक बधाई
Comment by नाथ सोनांचली on May 13, 2017 at 12:23pm
आद0 शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपके आशीष और हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 13, 2017 at 11:16am

इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको आ. सुरेंद्र नाथ जी

Comment by नाथ सोनांचली on May 13, 2017 at 10:31am
आद0 अनुराग वशिष्ट जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई के किये हृदय तल से आभार। विचारो को मान देने के लिए अतिशय आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on May 13, 2017 at 4:25am
आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन, मैं सुरेन्द्र नाथ सिंह हूँ , आपसे नाम लिखने में थोड़ा भ्रम हुआ शायद।

आपकी हौसला अफजाई के लिए हृदय की गहराइयों से आभार।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 12, 2017 at 9:32pm

मुह्तरम जनाब सुरेन्द्र . कुमार  . साहिब, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद और,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ----

Comment by नाथ सोनांचली on May 12, 2017 at 8:53pm
आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन, आपके ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
8 hours ago
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
9 hours ago
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service