For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़

यारों में जब रंजिश होने लगती है
चुपके चुपके साज़िश होने लगती है

आँखों में जब सोज़िश होने लगती है
रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है

बाबू जी का साया सर से उठते ही
धरती की पैमाइश होने लगती है

तुम जब मेरे साथ नहीं होते जानाँ
मुझ पर ग़म की यूरिश होने लगती है

मुझसे कोई काम अटक जाता है जब
उनको मेरी काविश होने लगती है

जब जब भी मैं नाम तुम्हारा लिखता हूँ
हाथों में क्यूँ लरज़िश होने लगती है

बच्चे ग़ुरबत को क्या समझें उनकी तो
रोज़ नई फ़रमाइश होने लगती है

मुझसे कोई भूल "समर" हो जाये तो
महशर जैसी पुरसिश होने लगती है

---

रंजिश :- दुश्मनी
साज़िश :- षडयंत्र
सोज़िश :- जलन
पैमाइश :- माप (नपती)
यूरिश :- हमला
काविश :- तलाश
लरज़िश :- कम्पन्न
ग़ुरबत :- ग़रीबी
महशर :- महाप्रलय के बाद ईश्वर जिस मैदान में हर इंसान से उसके कर्मों का हिसाब लेगा ।
पुरसिश :- पूछताछ (जवाब तलबी)
___

समर कबीर
मौलिक/ अप्रकाशित

Views: 1566

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 5:52pm
जनाब निलेश'नूर'साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Sushil Sarna on July 5, 2017 at 2:57pm

जब जब भी मैं नाम तुम्हारा लिखता हूँ
हाथों में क्यूँ लरज़िश होने लगती है

बच्चे ग़ुरबत को क्या समझें उनकी तो
रोज़ नई फ़रमाइश होने लगती है


गज़ब आदरणीय समर कबीर साहिब बहुत ही खूबसूरत अहसासों से लबरेज़ है आपकी ये बेहतरीन ग़ज़ल। दिल मुबारक बाद कबूल फरमाएं से सर।

Comment by नाथ सोनांचली on July 5, 2017 at 5:40am
आद0 समर कबीर साहब प्रणाम, बेहद उम्दा गजल। मतले महफ़िल लूट लिया।और सबसे अच्छी बात आपने कतजिन उर्दू शब्दो के जो अर्थ लिख दिए उससे हमे गजल को समझने में और राहत मिली। आपको नमन,आपको अनन्त बधाइयाँ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 4, 2017 at 9:36pm
वाह आदरणीय बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई..सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 4, 2017 at 9:17pm
मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब,बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by विनय कुमार on July 4, 2017 at 7:47pm

वाह, वाह, क्या गजब की गजल हुई है आ मोहतरम समर कबीर साहब, पढ़कर आनंद आ गया| बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by narendrasinh chauhan on July 4, 2017 at 6:38pm

वाह , खूब सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करे 

Comment by Mohammed Arif on July 4, 2017 at 12:31pm
यारों में जब रंजिश होने लगती है वाह!वाह!! क्या ख़ूब अंदाज़ है ।
चुपके चुपके साज़िश होने लगती है
कोई एक शे'र हो तो गिनाऊँ ,यहाँ तो हर शे'र लाजवाब है । जी चाहता है सदियों तक यही ग़ज़ल गुनगुनाता रहूँ ।
शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 4, 2017 at 8:16am

वाह वाह ..मेरा बहुत दिनों बाद इधर आना हुआ और पहली ही घजल आपकी मिल गयी..
क्या कहने 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
2 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय , ग़ज़ल के दूसरे शेर       'ग़म-ए-दौलत मिली है किस्मत से…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"विषय मुक्त होने के कारण लघु कथा लिखने का प्रयास किया है , अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही सारी…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी , सुझाव और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  चौपाई विधान में 121…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  चौपाई की मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार । चौपाई विधान में…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"शब्द बाण…"
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी, रचना/छंदों पर अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।  //तोतपुरी ... टंकण…"
12 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल को इतना समय देने के लिए, शेर-दर-शेर और पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तार देने के लिए और अमूल्य…"
12 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय,  आपका कोटिश: धन्यवाद कि आपने विस्तृत मार्ग दर्शन कर ग़ज़ल की बारीकियाँ को समझाया !"
12 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय नमस्कार, आपने  अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी बहुत शुक्रिया। ग़म-ए-दौलत से मेरा इशारा भी…"
14 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय अजय गुप्ता अजेय जी सादर, प्रथम दो चौपाइयों में आपने प्रदत्त चित्र का सुन्दर वर्णन…"
23 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service