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ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फऊलन)

मेरे प्यार का शम्स ढलने से पहले |
कोई आ गया दम निकलने से पहले |

बहुत होगी रुसवाई यह सोच लेना
रहे इश्क़ में साथ चलने से पहले |

तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली
कहाँ तू ने सोचा मसलने से पहले|

कहे सच हर इक आइना सोच लेना
बुढ़ापे में इसको बदलने से पहले |

ख़यालों में आ जाओ कटती नहीं शब
मिले चैन दिल को मचलने से पहले |

अज़ल से है उल्फ़त का दुश्मन ज़माना
लगाए यह ठोकर संभलने से पहले |

है शतरंज का खेल तस्दीक़ उल्फ़त
न दिल की तू सुन चाल चलने से पहले |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 5:40pm
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब, गज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया, महरबानी
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 5:33pm
जनाब हरि प्रकाश साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Mohammed Arif on July 16, 2017 at 5:05pm
तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली
कहाँ तू ने सोचा मसलने से पहले|वाह!वाह!! बहुत ख़ूब । बड़ा ही लाजवाब शे'र ।
शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 3:55pm
मुहतर्मा कल्पना साहिबा, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया, महरबानी
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 3:53pm
मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया, महरबानी
Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 3:52pm

आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan साहब , सुंदर गजल है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 3:52pm
जनाब लक्ष्मण धामी साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 3:20pm
आदरणीय तस्दीक जी उम्दा ग़ज़ल कही है आपने बधाई स्वीकारें |
Comment by Samar kabeer on July 16, 2017 at 3:14pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 16, 2017 at 2:13pm
आ.भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

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