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साथ तुम नहीं होते कुछ मज़ा नहीं होता- सलीम रज़ा रीवा

212 1222   212 1222

साथ तुम नहीं होते कुछ मज़ा नहीं होता
मेरे घर में खुशियों का सिलसिला नहीं होता 
-
राह पर सदाक़त की गर चला नहीं  होता 
सच हमेशा कहने का  हौसला नहीं होता
-
कोशिशों से  देता  है  रास्ता समंदर भी
हौसला रहे क़यिम फिर तो क्या नहीं होता
-
कम खुशी नहीं होती मेरे घर के आँगन में 
दिल अगर नहीं बंटता, घर बंटा नहीं होता
-
थोड़े ग़म ख़ुशी थोड़ी,थोड़ी सिसकियाँ भी है
ज़िन्दगी से अब हमको कुछ गिला नहीं होता
-
डूबती नहीं कश्ती पास आके साहिल के 
बे वफ़ा अगर मेरा  नाख़ुदा  नहीं  होता 
-
उसकी शोख़ नज़रों ने ज़िन्दगी बदल डाली
वो अगर नहीं होता कुछ '' रज़ा '' नहीं होता
.......

मौलिक एवं अप्रकाशित 
 

Views: 922

Comment

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Comment by SALIM RAZA REWA on December 31, 2017 at 11:02pm
जनाब अफरोज साहब, नवाज़िश के लिए शुक्रिया.
Comment by TEJ VEER SINGH on December 31, 2017 at 6:36pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सलीम रज़ा रीवा साहब जी।आदाब ।बेहतरीन गज़ल।

राह पर सदाक़त की गर चला नहीं  होता 
सच हमेशा कहने का  हौसला नहीं होता

Comment by SALIM RAZA REWA on December 31, 2017 at 5:10pm

जनाब समर साहब आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया ✍️

Comment by Afroz 'sahr' on December 29, 2017 at 3:20pm

आदरणीय सलीम रज़ा साहिब उम्दा कलाम बहुत मुबारकबाद आपको,,,

Comment by Mahendra Kumar on December 28, 2017 at 2:56pm

बढ़िया ग़ज़ल हुई है आ. सलीम जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2017 at 2:15pm

आद0 सलीम रज़ा साहब सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल हुईहै। हरेक शैर दमदार। वाह वाह।इस शैर पर अतिरिक्त दाद 

कम खुशी नहीं होती मेरे घर के आँगन में 

दिल अगर नहीं बंटता, घर बंटा नहीं होता

Comment by Ajay Tiwari on December 28, 2017 at 1:48pm

आदरणीय सलीम साहब, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.  

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 9:44am

जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब , बहुत ही उम्दा और कामयाब मुरस्सा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें ।

Comment by Mohammed Arif on December 28, 2017 at 7:40am

आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब,

                               शिकवा- शिकायत कुछ अपनों से उम्मीद की आरज़ू वाली बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

Comment by Samar kabeer on December 27, 2017 at 10:42pm

जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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