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फ़ीडिंग और फ़ीडबैक (लघुकथा)

दुकान के चबूतरे पर चारों मित्र एकदम चौंकते हुए खड़े होकर अपने-अपने धर्म के सिखाये मुताबिक़ कुछ उच्चारण करते हुए अर्थी में ले जाये रहे मृतक को नमन कर श्रद्धांजलि देने लगे।


"ओह, इनके घरवालों को यह सदमा बरदाश्त करने की शक्ति दे! इन्हें स्वर्ग में स्थान दे!" अशरफ़ ने आसमान की ओर देखते हुए कुछ ऐसा ही उच्चारित किया।


"अबे, तू तो हमेशा उर्दू-अरबी में कुछ बोलता है न मय्यत पर! जन्नतनशीं और तौफ़ीक़ जैसे लफ़्ज़ों में!" रामलाल ने उसे टोक ही दिया।


"दरअसल तुम्हारे 'स्वर्ग' और हमारे यहां की 'जन्नत' की थ्योरियों में काफ़ी फर्क़ है!"


यह जवाब सुनकर बाकी साथियों की त्योरियाँ चढ़ गईं। लेकिन जवाब में सम्प्रेषित साम्प्रदायिकता के मद्देनज़र वे चुप रहे। केवल एक तीसरा साथी कुछ पल बाद बोल ही पड़ा - "हवाओं के असरात हैं, क़िताबों की फ़ीड यहां बहस से डिलीट नहीं की जा सकती!"


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 1, 2018 at 12:30am

मेरी इस लघुकथा अभ्यास पोस्ट पर समय देकर अपने विचार/राय सांझा करते हुए मेरी हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी, जनाब समर कबीर साहिब, जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब, आदरणीय महेंद्र कुमार जी और आदरणीया नीलम उपाध्याय जी।

Comment by Mahendra Kumar on June 26, 2018 at 10:12pm

बढ़िया लघुकथा है आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। 

"ओह, इनके घरवालों को यह सदमा बरदाश्त करने की शक्ति दे! इन्हें स्वर्ग में स्थान दे!"// क्या इसे इस तरह किया जा सकता है? “ओह, इनके घरवालों को यह सदमा बरदाश्त करने की ताक़त बख़्श दे! इन्हें जन्नत तौफ़ीक़ कर!” देख लीजिएगा। सादर। 

Comment by Neelam Upadhyaya on June 26, 2018 at 2:20pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी  जी, नमस्कार एवं बधाई अच्छी लघुकथा की प्रस्तुति के लिए ।     

Comment by Mohammed Arif on June 26, 2018 at 1:47pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                       बहुत ही सशक्त और कटाक्षपूर्ण लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on June 26, 2018 at 12:21pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 26, 2018 at 6:07am

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब जी।बेहतरीन संदेश प्रद लघुकथा।

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