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राखी के पावन त्यौहार पर कुछ दोहे

राखी के पावन त्यौहार पर कुछ दोहे :


राखी का त्यौहार है, बहना की मनुहार।
इक -इक धागा प्यार का, रिश्तों का उपहार।।


'भाई बहना से सदा', माँगे उसका प्यार।
राखी पावन प्रेम के ,बंधन का आधार।।


बाँध जरा तू हाथ पर, बहना अपना प्यार।
दूँगा तुझको आज वो, जो मांगे उपहार।।

राखी है इस हाथ पर, बहना तेरी शान।
तेरे पावन प्यार पर, मुझको है अभिमान।।


सावन में सावन बहे, आँखों से सौ बार।
राखी पर परदेस से,'बहना भेजे प्यार'।।


आ न सकी परदेस से, राखी अबकी बार।
राखी के त्यौहार पर,बह निकली जलधार।।


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 28, 2018 at 11:58pm

आदरणीय सुशील सरनाजी, आपकी कोशिशों और भावमय दोहों से मन मुग्ध है. 

सावन और रक्षाबन्धन का अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है. आपने इनकी अन्योन्याश्रयता को सहज किन्तु आवश्यक भाव दिया है. 

शुभातिशुभ

Comment by Sushil Sarna on August 27, 2018 at 7:16pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय प्रशंसा एवं सुझावों का तहे दिल से शुक्रिया। बहुत सुंदर संशोधन हैं। मैं अभी एडिट करता हूँ। आपका पुनः आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 27, 2018 at 7:14pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन की मनोहारी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 27, 2018 at 7:14pm

आदo  babitagupta  जी सृजन की मनोहारी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 27, 2018 at 7:13pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन की मनोहारी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 27, 2018 at 7:13pm

आदरणीय  डॉ छोटेलाल सिंह जी सृजन की मनोहारी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार।

Comment by Samar kabeer on August 27, 2018 at 6:09pm

जनब सुशील सरना जी आदाब,रक्षा बंधन के मौक़े पर अच्छे दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ,साथ ही आपको रक्षा बंधन की बधाई भी ।

' हर दम भाई बहिन से, माँगे उसका प्यार'

'इस पंक्ति के विषम चरण में 'बहिन से' की मात्रा 122 है, और होना चाहिए 212,इसे यूँ कर सकते हैं:-

'भाई बहना से सदा'

' बहिन ने भेजा प्यार'

इस पंक्ति में 12 मात्रा हैं, इसे यूँ कर सकते हैं:-

'बहना भेजे प्यार'

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 27, 2018 at 12:32pm

आ. भाई सुशील जी, सुंदर दोहे हुये हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by babitagupta on August 26, 2018 at 9:45pm

भाई बहिन के रूढने मनाने वाले पर्व की अच्छी पंक्तियाँ,बधाई स्वीकार कीजियेगा ।आदरणीय सरजी।

Comment by नाथ सोनांचली on August 26, 2018 at 7:24pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन।  प्रासंगिक और समयानुकूल बेहतरीन दोहे, बधाई स्वीकार कीजिये

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