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छप्पय छंद-रामबली गुप्ता

ज्योतिपुंज जगदीश! रहो नित ध्यान हमारे।
कलुष-द्वेष-दुर्भाव, हृदय-तम हर लो सारे।।
सत्य-स्नेह-सद्भाव, समर्पण का प्रभु! वर दो।
जला ज्ञान का दीप, प्रभा-शुचि हिय में भर दो।
दो बल-पौरुष-सद्बुद्धि हरि! मार्ग चुनेें सद्कर्म का।
हर जनजीवन के त्रास हम, फहरायें ध्वज धर्म का।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

रचनाकार-रामबली गुप्ता

शिल्प-प्रथम चार पद रोला छंद और अंतिम दो पद उल्लाला छंद के संयोग से छप्पय छंद की निष्पत्ति होती है।

Views: 877

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 14, 2018 at 3:52pm

आ. भाई रामबली जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by रामबली गुप्ता on October 13, 2018 at 9:44pm

हृदय से धन्यवाद भाई सुरेन्द्रनाथ जी

Comment by रामबली गुप्ता on October 13, 2018 at 9:43pm

आद०भाई नरेंद्र चौहान जी सादर आभार

Comment by रामबली गुप्ता on October 13, 2018 at 9:43pm

सादर धन्यवाद आद०डॉ छोटेलाल जी

Comment by रामबली गुप्ता on October 13, 2018 at 9:42pm

आद० बसन्त भाई जी सादर धन्यवाद

Comment by रामबली गुप्ता on October 13, 2018 at 9:41pm

हार्दिक आभार आद०समर भाई साहब

Comment by नाथ सोनांचली on October 13, 2018 at 10:45am

आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। छप्पय छंद में भक्ति रस से सराबोर बेहतरीन रचना पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये। 

Comment by narendrasinh chauhan on October 12, 2018 at 2:27pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 11, 2018 at 5:46pm

आदरणीय रामबली जी सुंदर एवं आकर्षक छप्पय छन्द पढ़कर आनन्द आ गया बधाई हो 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on October 10, 2018 at 3:24pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी शुभ दोपहर, बहुत सुंदर छंद का निर्वाह हुआ है , उत्तम रचना , बहुत बहुत बधाई आपको|

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