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क़ैद मैं कैसे दायरे में हूँ....संतोष

अरकान:

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फेलुन

क़ैद मैं, कैसे दायरे में हूँ

कौन है जिसके सिलसिले में हूँ

आप तो मीठी नींद सोते हैं

और मैं सदियों से रतजगे में हूँ

अब नहीं कोई फ़िक्र दुनिया की

चैन से अपने मक़बरे में हूँ

मुझको मंज़िल मिली नहीं अब तक

एक मुद्दत से रास्ते में हूँ

उनकी यादों को भूलना है मुझे

यूँ मैं 'संतोष'मैकदे में हूँ

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

~संतोष

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 27, 2018 at 9:24pm

आ. संतोष जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 27, 2018 at 7:53pm

वाह बहुत ही अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय...

Comment by Mohammed Arif on October 27, 2018 at 12:04pm

आदरणीय संतोष खिरवड़कर जी आदाब,

                       बहुत ही बेहतरीन या मुरस्सा ग़ज़ल । हर शे'र बड़ा माकूल । दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।

Comment by Ajay Tiwari on October 27, 2018 at 7:40am

आदरणीय संतोष जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.

Comment by Samar kabeer on October 26, 2018 at 5:38pm

जनाब संतोष जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

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